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जुलाई, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Kisan aur uska wafadar Hindi kahaniya moral stories

मटरू एक गरीब किसान था। जिसके पास तीन-चार मुर्गियां एक बकरी और एक छोटा सा खेत था। मटरू के परिवार में उसके अलावा और कोई नहीं था लेकिन फिर भी मटरू खुश था क्योंकि उसे अपने खेत और पालतू जानवरों से बहुत प्यार था। मटरू अपना खाना अपने मुर्गियों और बकरियों के संग भी बांटा करता था। एक दिन बात है मेट्रो बाजार से सामान लेकर गांव की ओर लौट रहा था। तभी रास्ते में उसकी नजर एक छोटे से कुत्ते पर पड़ी जोर दर्द के मारे कहार रहा था। मेट्रो ने एक हाथ पर अपना सारा सामान पकड़ा और दूसरे हाथ में उस छोटे कुत्ते को मटरू अपने घर गया पहले उसकी मरहम पट्टी और फिर मेट्रो ने कुत्ते को अपने हाथों से खाना खिलाया वह छोटा कुत्ता ठीक होने लगा। अब मटरू उसके साथ खूब खेला करता था। मत रोको एक नया साथी मिल गया था। दिन में जब मटरू खेत में खेती किया करता था। तो उसका कुत्ता उसी के आसपास मंडराता रहता था। वर्ष बीतते गए और मटरू और कुत्ते की दोस्ती और गहरी होती गईं। अब मटरू पहले अपने कुत्ते को खिलाता और फिर खुद खाया करता था। कुछ वर्ष बीत गए और अब मटरू की तबीयत खराब रहने लगी थी। उसे रोजाना दवा खाने जाना पड़ता था।

Mughlai paneer kaise banaye

सामग्री 500 ग्राम ताजा पनीर 75 ग्राम देसी घी या मक्खन 100 ग्राम फ्राई प्याज 2 छोटा चम्मच अदरक, लहसुन पेस्ट आधा कप दही ( फे टी हुई) 4 नग लौंग दो नग बड़ी इलायची दो नग तेजपत्ता 2 ग्राम या एक चुटकी जावित्री पाउडर 1/2 छोटा चम्मच गरम मसाला पाउडर 2 ग्राम हल्दी पाउडर नमक स्वादानुसार 10 - 10 ईशा काजू, बादाम और पिस्ता 25 ग्राम कद्दूकस किया हुआ मावा ऐसे बनाएं पनीर को छोटे-छोटे तिकोने टुकड़ों में काटकर रखें। सूखे मेवों में आधा कप गर्म पानी डालकर पीस कर पेस्ट बना लें। फ्राई प्याज में एक कप गुनगुना पानी डालकर पीस कर पेस्ट बनाकर रखें। एक मोटी तले वाली कढ़ाई या नॉन स्टिक कढ़ाई में घी या मक्खन को गरम करें और साबुत मसालों को डालकर 1 मिनट फ्राई करके अदरक लहसुन का पेस्ट डालें और 5 से 6 मिनट पकाकर हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर एवं नमक डालकर तीन-चार मिनट फ्राई करके दही डालें तथा पकाए। उबाल आने पर मेवों के पेस्ट को डालें तथा 1-1/2 कप पानी डालें और पकाएं। पुनः उबाल आने पर पनीर , मावा , जावित्री पाउडर एवं गरम मसाला पाउडर डालें तथा पकाएं गाढ़ा होने पर गरम गरम परोसें ।

Jisne sawari ko Anmol seekh Di yeah Hindi kahani Ek taxi driver ki Hai

विक्रम एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करता था। एक दिन उसे दफ्तर से घर जाने में काफी देर हो गई। उसने सोचा, क्यों ना टैक्सी से चला जाए। रास्ता लंबा था, तो विक्रम ने ड्राइवर से बात चीत करनी शुरु कर दी। पता चला कि ड्राइवर का नाम गुरप्रीत है। गुरप्रीत अपने अनुभव विक्रम के साथ बांट रहा था कि तभी दुर्घटना होते होते बची। गुरप्रीत सड़क के बीच में गाड़ी चला रहा था और बाई तरफ कुछ गाड़ियां खड़ी थी। सड़क पर कोई डिवाइडर नहीं था और सामने की तरफ से एक बड़ा सा ट्रक आ रहा था। तभी अचानक बाई तरफ की गाड़ी सड़क के बीचो बीच आ गई। गुरप्रीत के पास दो ही विकल्प थे, या तो जोर से ब्रेक लगाए, या सड़क की दाएं तरफ चला जाए। गुरप्रीत ने पहला विकल्प लिया और जोर से ब्रेक लगा दिया। टैक्सी जोर से आवाज करती सामने वाली गाड़ी से थोड़ी दूर पर जा रुकी। सामने वाली गाड़ी से एक शख्स उतरकर आया और बोला, क्या दिखाई नहीं देता है ? गुरप्रीत मुस्कुराते हुए बोला, माफ कीजिएगा, आप ठीक तो है न । उस शक्स ने घूम कर विक्रम को देखा और अपनी गाड़ी में चला गया। विक्रम बोला, उसकी वजह से हमारी जान जाते-जाते बची और तुमने उसी से माफी मांगी ? गुरप्री

Vipin,ladki or der Hindi story

विपिन 14 साल का था, जब एक ऐसे में उसका मुंह पर हाथ जल गया था। उसकी कई सर्जरी हुई, पर चेहरा पहले जैसा नहीं हो सका। उसके हाथों की उंगलियों भी काटनी पड़ी। जिससे हाथ भयावह दिखने लगे। जो भी उसे देखता, वह डर जाता था। विपिन 19 साल का हो गया था। उसके पास एक छोटा सा कुत्ता था। विपिन जब भी उसे टहला निकलता था, तो डरा सहमा सा रहता था। वह खुद वाली जैकेट पहन कर निकलता और बाहर कदम रखते ही चेहरा ढक लेता। एक दिन जब वह कुत्ते को टहला कर घर पहुंचा, तो एक छोटी सी लड़की दरवाजे पर खड़ी थी। पहले तो वहां विपिन को देखकर डर गई। फिर बड़ी मासूमियत से पूछा, मैं आपके पड़ोस में नहीं आई हूं। क्या मैं आपके कुत्ते के साथ खेल सकती हूं ? विपिन ने हां में सिर हिलाया और अंदर चला गया। अंदर जाकर उसने अपना हुड उतार दिया। लड़की विपिन का चेहरा देख रही थी।विपिन को लगा कि आप वह लड़की कभी मुझसे बात नहीं करेगी। पर लड़की बोली, वाह आप कितने सुंदर हैं। एकदम चमकती खाल है आपकी। आप इसलिए हुड वाली जैकेट पहनते हैं ना, ताकि लोग आपकी सुंदरता ना देख ले।कुछ ही दिनों में वह छोटी सी बच्ची विपिन की सबसे अच्छी दोस्त बन गई। 1 दिन लड़की ने विपिन

Mahesh, Sahab aur unka parivar

महेश की कहानी, जिसमें 10 वर्षों तक मालिक की नि:स्वार्थ सेवा करने के बदले उपहार मिला । महेश पिछले लगभग 10 साल से ड्राइवर की नौकरी करता था। उसके दो बेटे थे, जो अभी बहुत छोटे थे। रविवार का दिन था और महेश ड्यूटी पर जाने को तैयार ही हो रहा था कि उसके साहब का फोन आया। वह बोले, महेश, आज अपने दोनों बच्चों और पत्नी को लेकर आना। महेश समझ नहीं पाया कि साहब ने ऐसा क्यों कहा। लगभग 1 घंटे बाद महेश सब को लेकर जैसे ही घर के बाहर निकला, उसने देखा साहब अपनी गाड़ी लेकर उसके दरवाजे पर खड़े थे। महेश तुरंत ड्राइविंग सीट के पास गया और बोला, लाइए साहब, मैं चलाता हूं और आप बताइए कहां जाना है ? साहब बोले, महेश तुम अपने परिवार के साथ पीछे वाली सीट पर बैठ जाओ, गाड़ी मैं चला रहा हूं।वह बहुत हिचकीचाहते हुए, अपने परिवार के साथ गाड़ी में बैठ गया। कुछ ही देर में वह सब साहब के घर पहुंच गए। उन्होंने देखा,साहब का पूरा परिवार महेश और उसके परिवार का स्वागत करने के लिए दरवाजे पर खड़ा था। गाड़ी से उतरकर महेश और उसका परिवार घर के अंदर पहुंचा, तो देखा कि कई तरह के पकवान  तोहफे रखे हुए थे। महेश बोला, साहब, मुझे कुछ समझ नह

Dhanish ruhi aur rakt daan Hindi story धनिश रोही और रक्तदान

एक छोटे उम्र बच्चे की कहानी, जिसने अपनी बड़ी बहन को बचाने के लिए खुशी-खुशी अपना खून दिया। डॉक्टर सुनील शहर के नामचीन सर्जन थे। वह स्वभाव से बहुत विनम्र थे और सब को सेवा दृष्टि से देखते थे। एक बार उन्हें एक कॉलेज में बतौर मुख्य अतिथि बनाया गया। वहां उन्होंने कहा, एक डॉक्टर होने के नाते मैं समाज में कई तरह के लोगों से मिलता हूं। रोज मुझे अलग-अलग होते हैं। लेकिन कुछ अनुभव ऐसे होते हैं, जो जीवन भर याद रह जाते हैं। उन्हीं में से एक अनुभव में आज आपसे बांट रहा हूं। एक बार मेरे अस्पताल में 8 वर्ष के एक लड़की रूही विराज के लिए आई। उसके शरीर का खून धीरे-धीरे खराब हो रहा था। जिससे उसके शरीर के कई अंगों पर पड़ने लगा था। उसे रक्तदान यानी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत थी। रूही का एक छोटा भाई था दानिश, जो 5 साल का था। लगभग 1 साल पहले दानिश को भी कुछ ऐसे ही बीमारी हुई थी।लेकिन दानिश के खून में वैसी रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं थी, जिस कारण व एकदम स्वस्थ था। मैंने नन्हे से दानिश से पूछा, क्या वह अपनी बहन को बचाने के लिए अपना खून देने को तैयार है। कुछ देर तक चुप रहने के बाद उसने पूछा, क्य

Mushroom makhana lababdar khana मशरूम मखाना लबाबदार

मशरूम का मखाना सामग्री मशरूम 400 ग्राम (पैक्ड टिन) मक्खन 800 ग्राम दो लाल टमाटर 500 ग्राम प्याज साबुत मसाले चार लौंग, दो छोटी, दो बड़ी इलायची, 25 ग्राम मखाना, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 छोटा चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, नमक स्वादानुसार, पानी 1/2 लीटर, 2 छोटा चम्मच बारीक कटा हुआ हरा धनिया, 2 ग्राम गरम मसाला, ऐसे बनाएं  मशरूम को धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। अब प्याज को काटकर पानी में डालकर 8-10 मिनट पकाकर पानी से छानकर पेस्ट बनाकर रखें। टमाटर का पेस्ट बनाकर रखें। एक कढ़ाई में मक्खन को गर्म करें और सारे साबुत मसालें डालें तथा 1 मिनट फ्राई करके प्याज और अदरक लहसुन के पेस्ट को डालकर हल्की आंच पर 10 से 12 मिनट भुनें और टमाटर का पेस्ट, हल्दी पाउडर तथा मखाना डालकर पकाएं। पकते पकते जब तेल ऊपर आने लगे, तब नमक एवं पानी डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं। गाढ़ा होने पर गरम मसाला मिलाकर एक बाउल में डालें और हरे धनिए से सजाएं । जामुन का शरबत सामग्री 250 काम जामुन, 1/2 चम्मच नमक, 1/2 चम्मच काला नमक , 1/4 चम्म

khajur aur mahatma ka maan Hindi short Story खजूर और महात्मा का मन

एक बार एक महात्मा बाजार से होकर गुजर रहे थे। रास्ते में एक व्यक्ति खजूर भेज रहा था। उस महात्मा के मन में विचार आया कि खजूर लेनी चाहिए। उन्होंने अपने मन को समझाया और वहां से चल दिए। किंतु महात्मा पूरी रात भर सो नहीं पाए। वह विवश होकर जंगल में गए और जितना बड़ा लकड़ी का गट्ठर उठा सकते थे, उन्होंने उठाया, महात्मा ने अपने मन से कहा कि यदि मुझे खजूर खाने हैं, तो यह बोझ उठाना ही पड़ेगा। महात्मा, थोड़ी दूर चलते, फिर गिर जाते, फिर चलते और गिरते। उनमें एक कट्ठा उठाने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन उन्होंने लकड़ी के भारी-भारी तो कट्टर उठाए हुए थे। दो ढाई मील की यात्रा पूरी करके वह शहर पहुंचे और उन लकड़ियों को बेचकर जो पैसे मिले, उससे खजूर खरीदने निकल पड़े। खजूर सामने देखकर महात्मा का मन बड़ा प्रसन्न हुआ। महात्मा ने उन पैसों से खजूर खरीदें, लेकिन महात्मा ने अपने मन से कहा कि आज तूने खजूर मांगा है, कल फिर कोई और इच्छा करेगा। कल अच्छे-अच्छे कपड़े मांगेगा..... तब तो मैं पूरी तरह से तेरा गुलाम ही हो जाऊंगा। सामने से एक मुसाफिर आ रहा था।महात्मा ने उस मुसाफिर को बुलाकर सारे

Mohan,Seth aur tarazu Hindi story Mohan ki kahani snake Seth ko uski Yatra se mahatekar sabak sikhaya

मोहन एक व्यापारी था। एक बार व्यापार में उसे भारी नुकसान हुआ। उसने दूसरे देश में व्यापार करने के बारे में सोचा। उसके पास एक कीमती तराजू था, जिसका वजन 20 किलो था। उसने उसे एक सेठ के पास धरोहर रख दिया और व्यापार करने चला गया। कुछ साल बाद घर लौट कर उसने सीट से अपना तराजू मांगा। लेकिन सेठ बोला, भाई तुम्हारे तराजू को तो चूहे खा गए। मोहन सेठ की असलियत समझ गया। वह बोला, मैं नदी में नहाने जा रहा हूं। यदि आप अपने बेटे को मेरे साथ भेज दे, तो बड़ी कृपा होगी। सेठ ने अपने बेटे को साथ भेज दिया। नहाने के बाद मोहन ने सेठ के लड़के को एक गुफा में छोड़ दिया, फिर सेठ के पास लौट आया। सेठ ने पूछा, मेरा बेटा कहां रह गया ? मोहन बोला, जब हम नदी किनारे बैठे थे, तो एक बड़ा सा बाज आया और आपके पुत्र को उठा कर ले गया। यह सुनकर सेठ क्रोध से भर कर बोला तुम झूठे हो। कोई बात इतने बड़े लड़के को उठाकर कैसे ले जा सकता है? तुम मेरे बेटे को वापस ले आओ, नहीं तो मैं तुम्हारी शिकायत पुलिस में कर दूंगा। मोहन पी पुलिस के पास जाने को तैयार हो गया। थाने में सेठ ने मोहन पर अपने बेटे के अपहरण का आरोप लगाया। थानेदार ने मोहन से कह

Hindi jokes papa mujhe DJ kharid do

पप्पू : पापा मुझे डीजे खरीदो पापा : नहीं दूंगा, तू लोगों को तंग करें पप्पू : नहीं पापा, मैं किसी को तंग नहीं करूंगा। जब सब सो जाएंगे, तभी बजाया करूंगा! टीचर : एक टोकरी में 10 आम है, उसमें से दो आम सड़ गए, बताओ कितने बचे ? संजू : सर 10 आम। टीचर : वह कैसे ? संजू : सड़ने के बाद भी आम तो आम ही रहेगा न, केले तो नहीं बन जाएंगे। चिंटू : यार बता 'आई एम गोइंग का मतलब क्या होता है ? टिल्लू : मैं जा रहा हूं । चिंटू : ऐसे कैसे जाओगे, मैं 20 लोगों से पूछ चुका हूं, सब चले जाने की बात कहते हैं, जवाब बताकर जाओ। एक सत्संग के दौरान : बाबा जी प्रवचन करते हुए "जो इस जन्म में नर है, वह अगले जन्म में भी नर ही होगा और जो इस जन्म में नारी है, वह अगले जन्म में भी नारी होगी।" यह सुनने के बाद एक बुजुर्ग औरत उठकर जाने लगी। बाबा जी : कहां जा रही हो ऐसे उठकर ? बुजुर्ग औरत : जब अगले जन्म में भी रोटियां ही बनानी है, तो सत्संग सुनकर क्या फायदा ? Ek satsang ke : Baba ji pravachan karte hue "Jo is janam mein Nar hai, hua agle janam mein bhi nar hi hoga aur jo is janam mein nari hai, wa

Kiyan pita aur shikshaka Hindi story gyan ke pita ki kahani

कियान के पिता एक बड़ी कंपनी में प्रेसिडेंट थे। अपने काम में वह इतना व्यस्त रहते थे कि घर के लिए कम ही समय निकाल पाते थे। पर कियान के लिए उन्होंने हर सुख-सुविधा का प्रबंध कर रखा था। कियान छठी में पढ़ता था। सबसे अच्छी कोचिंग क्लास की टीचर उसे पढ़ाने आती थी। कियान को उनसे पढ़ते हुए तुम साल हो गए थे। फिर भी परीक्षा में उसके नंबर कम आते थे। 1 दिन ज्ञान के इतने टीचर से शिकायत करते हुए कहा, आपके पढ़ाने का फायदा ही क्या है, जब उसके अच्छे नंबर ही नहीं आए। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उसे कितने घंटे पढ़ती हैं या इतने पैसे चाहती है। मैं बस यही चाहता हूं कि उसके अच्छे नंबर आए। टीचर मुस्कुराते हुए बोली, तो फिर ठीक है, आप मुझे दस लाख रुपए प्रति घंटा वेतन दीजिए, उसके नंबर अच्छे खाने की जिम्मेदारी मेरी। कियान के पिता यह सुनकर दंग रह गए। वह बोले, दस लाख रुपए प्रति घंटा। इतना तो मैं भी नहीं कमाता। टीचर बोली, तो आप ओवरटाइम करिए। अच्छे नंबरों के लिए कुछ तो आपको भी करना हो पड़ेगा न‌। कियान के पिता बोले, मैं कितना भी कमा लूं, दस लाख प्रति घंटा फीस नहीं दे सकता। टीचर बोली, आपकी इतनी भी हैसिय

Kaddu ki idli kaise banaye

कद्दू की इडली सामग्री 500 ग्राम कद्दू (पीला वाला), 250 ग्राम रवा (सूजी), चार चम्मच ईनो, दो चम्मच नमक,सास और सजाने के लिए टमाटर। ऐसे बनाएं सबसे पहले कद्दू को छीलकर बड़े बड़े टुकड़ों में काट लें और इन्हें अगले पानी में डाल दे। 2 मिनट उबलने दे।फिर उन्हें निकाल कर ठंडे पानी में डालें और ठंडा करें। अप कद्दू के टुकड़ों को मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना ले। अब इस पेस्ट में सूची, नमक मिलाकर इटली बनाने लायक काला ना ज्यादा पतला घोल बना लें। इसके  बाद उसे आधा घंटे के लिए ढककर रख ले। आधे घंटे बाद स्टीवर में पानी गर्म होने पर इटली के खोल में ईनो मिलाकर सांचों में डालें। इसी समय इटली को टमाटर से सजाकर 15 से 20 मिनट तक स्टीम करके पका ले। आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक इटली तैयार है। इसे मजे लेकर खाइए

Pandit aur navik (पंडित और नाविक)

गंगा नदी के किनारे एक भोला नाम का नाविक रहता था। वह यात्रियों को गंगा नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे ले जाता और लाया करता था। एक दिन वह कुछ यात्रियों को अपनी नाव पर बैठा कर ले जा रहा था, जिसमें एक पंडित जी थे, जिन्हें अपने ज्ञानी होने का बड़ा घमंड था। पंडित जी ने बोला से पूछा, क्या तुम भूगोल जानते हो नाविक ? भोला ने उत्तर दिया, नहीं, भूगोल क्या है, इसका अंदाजा मुझे नहीं है श्रीमान। पंडित जी ने कहा फिर तो तुम्हारी पाव भर जिंदगी पानी में समझो। फिर पंडित जी ने एक और प्रशन भोला से पूछा, क्या तुम इतिहास के बारे में कुछ बता सकते हो ? गांधी जी का जन्म कब और कहां हुआ ? भोला फिर से अपनी अज्ञानता बताते हुए बोला, जी इसके बारे में भी नहीं जानता । पंडित जी ने विजय मुद्रा में कहा, फिर तो तुम्हारी आधी जिंदगी पानी में गई समझो । पंडित जी ने अपने को ज्ञानी समझते हुए एक और प्रशन किया, तुम फिर महाभारत के पांडव और कौरवों की बारे में जानते होंगे ? भोला शर्म के मारे अपना सिर हिलाते हुए बोला नहीं.... पंडित जी हंसते हुए बोले, फिर तो तुम्हारी पौना जिंदगी पानी में समझो। कुछ ही देर में गंगा मैं प्रभाव तीव

Charu sharminda thi, kyonki uski maa bhi aise(चारू शर्मिंदा थी,)

दरवाजे पर दस्तक हुई तो मां ने दरवाजा खोला, आ गया तू, चल हाथ मुंह धोकर कपड़े बदल ले, साथ में खाना खाते हैं। आज तेरी पसंद की सब्जी बनाई है। तेरे बाबूजी और मैंने अभी तक खाना नहीं खाया। मां ने कहा। सुनील ने कहा, "अरे मां, क्यों तुझे चारों ने बताया नहीं क्या? आज उसके दोस्त की पार्टी है और हमें वही जाना है"। मां शांत रही, चारु सीढ़ियों से नीचे आ रही थी, उसे इस बात का डर था कि कहीं मां बोल ना दे कि चारों में कुछ नहीं बोला। मां चारों को देख चुकी थी, भूलने की बीमारी हो गई है। चलो तुम जाओ तैयार हो जाओ, मैं और तुम्हारे बाबूजी आराम से खाना खा लेंगे। सुनील हंसने लगा और बोला कि आपको भी बीमारी हो गई । माने असमंजस में पूछा, "मुझे भी ?" सुनील ने कहा, "हां चारु की मां को भी यह बीमारी है, जब भी उसके भाई भाभी को कहीं जाना होता है, तो मा भूल जाती है और फिर चारु को बता कर दुखी होती है। मां ने बेटी आंखों से चारु को देखा। चारू शर्मिंदा थी,क्योंकि उसकी मां भी ऐसे ही भूलने की बीमारी का शिकार होती थी, बीमार ना होते हुए भी बीमार थी।

Hindi jokes subah subah Pani ko Khush karne ke liye

सुबह-सुबह पत्नी को खुश करने के लिए पति ने फ्रिज से दूध का बर्तन निकाला और गैस पर रखा। लेकिन जब आधा घंटा हो जाने के बाद भी उस में उबाल नहीं आया, तो उसने सोचा कि, समझ में आया कि वह तो इटली का घोल था। पत्नी बेलन लेकर ढूंढ रही है.... पति फरार है। Subah subah Patni ko Khush karne ke liye pati main free se doodh ka bartan nikala aur gas par rakha. Lekin jab aadha ghanta ho Jane k bad bhi usme ubal nahi aaya to usne socha ki, samajh mein Aaya ki vah to idli ka ghol tha. Patni belan laikar dhoondh rahi hai pati farhar hai. बैंक से फोन : मैडम, आपका अकाउंट हैक हो गया है। मैडम : व्हाट्सएप अकाउंट ? बैंक वाला : नहीं मैडम, बैंक अकाउंट। मैडम : थैंक गॉड..... आपने तो मुझे डरा ही दिया था। Bank se phone : madam, aapka account hai ho gaya hai. Madam : WhatsApp account ? Bank wala : Nahin madam, bank account. Madam : thank God, aapne to mujhe tha. पंडित जी ने प्रवचन देते हुए कहा : सोचो, तुम्हें परमपिता परमेश्वर ने हाथ क्यों दिए हैं ? एक आदमी बोला : हाथ पर हाथ रखकर प्रवचन सुनने के लिए। Pa

Ananya, yuvak aur chips ka packet

अनन्या की कहानी, जिसे बाद में एहसास हुआ कि वह जिसे चोर समझ रही थी वह भला आदमी था। अनन्या दिल्ली से आगरा ऑफिस के काम से जा रही थी। उस दिन वह आधा घंटा पहले ही प्लेटफार्म पहुंच गई। ट्रेन आने में अभी देर थी,तो उसने सोचा कि क्यों ना चिप्स का पैकेट लिया जाए, और पर्स में पड़े नोबेल को पूरा पढ़ लिया जाए, जिसके कुछ ही पन्ने पढ़ने को बचे हैं। अनन्या ने चिप्स का पैकेट लिया और प्लेटफार्म पर लगी सीट पर बैठ गई। कुछ देर में एक  सभ्य सा दिखने वाला युवक आकर उसके बगल में बैठ गया। नोबल पढ़ते-पढ़ते अनन्या के कानों में युवक के चिप्स खाने की आवाज सुनाई दी। जब अनन्या ने नजर घुमाकर देखा, तो पाया कि अनन्या वाले चिप्स का पैकेट खुला हुआ है और उन दोनों के बीच में रखा हुआ है। अनन्या मन ही मन उसी युवक को खूब कोसने लगी की देखने में इतना सीधा साधा लेकिन हरकतें देखो। बिना पूछे इसने मेरे चिप्स को हाथ से कैसे लगाया?कुछ ही देर में युवक ने कुछ और चिप्स पैकेट से निकाले और हाथ में लेकर खाने लगा। अनन्या को गुस्सा आ गया। उसने घूर कर उस युवक की तरफ देखा और चिप्स का पैकेट अपनी तरफ सरका कर अपने पर्स के ऊपर रख दिया। युवक कुछ

Maa Hindi Story Muns Premchand ki

आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, वह सब पति के सत्कार और स्वागत की तैयारियों में खर्च कर दिये। पति के लिए धोतियों का नया जोड़ा लायी थी, नये कुरते बनवाये थे, बच्चे के लिए नये कोट और टोपी की आयोजना की थी। बार-बार बच्चे को गले लगाती ओर प्रसन्न होती। अगर इस बच्चे ने सूर्य की भाँति उदय होकर उसके अंधेरे जीवन को प्रदीप्त न कर दिया होता, तो कदाचित् ठोकरों ने उसके जीवन का अंत कर दिया होता। पति के कारावास-दण्ड के तीन ही महीने बाद इस बालक का जन्म हुआ। उसी का मुँह देख-देखकर करूणा ने यह तीन साल काट दिये थे। वह सोचती— जब मैं बालक को उनके सामने ले जाऊँगी, तो वह कितने प्रसन्न होंगे! उसे देखकर पहले तो चकित हो जायेंगे, फिर गोद में उठा लेंगे और कहेंगे— करूणा, तुमने यह रत्न देकर मुझे निहाल कर दिया। कैद के सारे कष्ट बालक की तोतली बातों में भूल जायेंगे, उनकी एक सरल, पवित्र, मोहक दृष्टि दृदय की सारी व्यथाओं को धो डालेगी। इस कल्पना का आनंद लेकर वह फूली न समाती थी। वह सोच रही थी— आदित्य के साथ बहु