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Hindi Shayari Mohammad Rafi Famous Filmy Sher | नग़मों से वो चुनिंदा शेर जिन्हें मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ मिली

नग़मों से वो चुनिंदा शेर जिन्हें मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ मिली
 Shayari Mohammad Rafi




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इक दिल के टुकड़े हज़ार हुए, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा
बहते हुए आँसू रुक न सके, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा
- क़मर जलालाबादी
फिल्म- प्यार की जीत (1948)



गुज़रे हैं आज इश्क़ में हम उस मक़ाम से
नफ़रत सी हो गई है मुहब्बत के नाम से
- शकील बदायूंनी
फिल्म- दिल दिया दर्द लिया  (1966)



दिल सुलगने लगा अश्क़ बहने लगे
जाने क्या-क्या हमें लोग कहने लगे
-फारुख़ कैसर
फिल्म- पारसमणि (1963)






आप ने सीखा है क्या दिल के लगाने के सिवा
आप को आता है क्या नाज़ दिखाने के सिवा
- राजा मेंहदी अली खान
फिल्म- नीला आकाश (1965)


 

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम
- साहिर लुधियानवी
- फिल्म- प्यासा (1957)


कल रात ज़िन्दगी से मुलाक़ात हो गयी
लब थराथरा रहे थे मगर बात हो गयी
- शकील बदायूंनी
फिल्म-पालकी (1967)





दिल का सूना साज़ तराना ढूँढेगा
तीर-ए-निगाह-ए-नाज़ निशाना ढूँढेगा
- असद भोपाली
फिल्म- एक नारी दो रूप (1973)




कोई सागर दिल को बहलाता नहीं
बेख़ुदी में भी करार आता नहीं
- शकील बदायूंनी
फिल्म- दिल दिया दर्द लिया  (1966)




तुझे प्यार करते हैं,  करते रहेंगे
के दिल बनके दिल में धड़कते रहेंगे
- हसरत मोहानी
फिल्म- अप्रैल फूल (1964)



चले आज तुम जहां से, हुई ज़िंदगी पराई
तुम्हें मिल गया ठिकाना, हमें मौत भी न आई
- शकील बदायूंनी
फिल्म- उड़न खटोला (1955)



तुझे भूल जाऊँ ये मुमकिन नहीं है
कहीं भी रहूँ मेरा दिल तो यहीं है
- हसरत मोहानी
-फिल्म- अप्रैल फूल (1964)



सूनी हैं दिल की राहें, खामोश हैं निगाहें
नाकाम हसरतों का उठने को है जनाज़ा
- शकील बदायूंनी
फिल्म- उड़न खटोला (1955)



अगर मर गया रूह आया करेगी
तुझे देख कर गीत गाया करेगी
- हसरत मोहानी
फिल्म- अप्रैल फूल (1964)



कितनी राहत है दिल टूट जाने के बाद
ज़िदगी से मिले मौत आने के बाद
- शमीम जयपुरी

रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं
ये मुरादों की हंसी रात किसे पेश करूं
- साहिर लुधियानवी
  फिल्म- ग़ज़ल (1964)


मैंने जज़्बात निभाए हैं उसूलों की जगह
अपने अरमान पिरो लाया हूँ फूलों की जगह
- साहिर लुधियानवी
  फिल्म- ग़ज़ल (1964)



कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया
बात निकली, तो हर इक बात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी
फिल्म- हमदोनों (1961)



कौन कहता है कि चाहत पे सभी का हक़ है
तू जिसे चाहे, तेरा प्यार उसी का हक़ है
- साहिर लुधियानवी
  फिल्म- ग़ज़ल (1964)


ज़िन्दगी आज मेरे नाम से शर्माती है
अपने हालत पे मुझे खुद भी हंसी आती है
- शकील बदायूंनी
फिल्म- सन् ऑफ इंडिया (1962)


राह चलते हुए कुछ सोच के रुक जाता हूँ
हर कदम पे कोई भूली हुई याद आती है
- शकील बदायूंनी

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