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वह आने जाने का एक आम रास्ता था, जिस पर सब लोग आते जाते थे।
उस रास्ते में एक बहुत बड़ा पेड़ था, जो वर्षों से शोभा पा रहा था।उसकी एक डाली को शरारत सूझी और वह रास्ते की तरफ बढ़ने लगी।


कुछ ही दिनों में उसने रास्ते पर अपनी बाहें फैला ली।
सभी राहगीर डाली से झुककर जाने लगे।डाली बहुत प्रसन्न होती थी कि मेरे सामने सब झुकते हैं।
लेकिन एक दिन उस रास्ते से भीमा गुजर रहा था।
भीमा ताकतवर था वह किसी के सामने झुकता नहीं था। भीमा ने कहा डाली तुम मेरे रास्ते से हट जाओ।
डाली बोली नहीं मैं नहीं आऊंगी। तुम्हें इस रास्ते से जाना है तो झुककर जाओ। भीमा ने कहा मैं किसी के सामने झुकता नहीं हूं।


डाली बोली ठीक है तो फिर जाओ धीमा अपनी ऐंठ में सीधे चलने लगा और डाली से उसका सिर टकरा गया।
भीमा बुरी तरह घायल हो गया। भीमा को गुस्सा आया और उसने डाली को दोनों हाथों से पकड़ा और खींच लिया ।
डाली पेड़ से टूट गई। भीमा ने उसे रास्ते से अलग फेंक दिया। भीमा घायल था, इसीलिए वह भी गिर पड़ा।
तभी वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों ने घायल भी को देखा और उसका उपचार करने लगे।


सभी बहुत खुश थे, क्योंकि उस डाली से सब को परेशानी होती थी। तभी एक वृद्ध राहगीर वहां आया।
उसने एक तरफ पड़ी टूटी डाली को देखा और दूसरी तरफ घायल भीमा को देखा।

दोनों को देखकर वह हंसते हुए बोला देखो अहंकार सबको इसी तरह घायल कर देता है और किसी किसी को इस तरह तोड़ कर रख देता है।

इसीलिए किसी को कभी अहंकार नहीं करना चाहता।
दानी की तरह किसी के रास्ते का बादा नहीं बनना चाहिए और भीमा की तरह सभी जगह अकड़ नहीं दिखानी चाहिए।

समय के अनुसार कभी-कभी झुकना भी पड़ता है।

Wah aane jane ka ek aam rasta tha jis par sab log aate jaate the.
us raste mein ek bahut bada ped tha, Jo varshon se sobha pa raha tha .

uski ek thali ko Sararat suchi aur vah raste ki taraf jhukne lage.
kuch hi Dino mein usne raste par apni behen faila li.

Sabhi ragir Dal se Jude kar Jane lage. dali bahut pasand hoti thi ki mere samne sab jhukte hai.

Lekin ek din use raste se bima gujar raha tha bhima takatvar tha. wah Kisi ke samne jhukta Nahin tha. bhima ne Kaha dali tum mere raste se hat jao.

Daali boli, Nahi, main Nahin karungi. tumhe is raste se jaana hai, tu jhuk kar jao. Bhima ne Kaha main Kisi ke samne nahi jhukta.

Dali bole, thik hai, to fir jao. Bheema apni aith mein sidhe chalne laga aur daal se  uska sir takra Gaya. Bheema buri Tarah ghayal ho Gaya.

Bheema ko gussa aaya aur usne Dali ko dono hatho se pakda aur khicha liya.
Dali ped se toot Gaye. Bheema ne use raste se alag fek diya.

Bheema ghayal tha, isiliye woh bhi gir pada.
Tabhi waha se gujre mujhe rahe kuch Raha girane ghayal bheema ko Dekha aur uska upchar karne lage.

Sabhi bahut khush the, kyunki use Dali se sab ko pareshani hoti thi. tabbhi ek vriddh rahgir waha aya.

Usne ek taraf badi tuti Dali ko Dekha aur dusri taraf ghayal Bheema ko Dekha. Dono ko dekh kar wah hanste hue bola,
Dekho ahankaar sabko isi Tarah ghayal kar deta hai aur kisi Kisi ko is Tarah todkar Rakh deta hai.


Isliye kisi ko bhi ahankaar nahi karna chahiye. Daali ki Tarah kisi ke raste ka badha nahi banana chahiye aur bheema ki Tarah sabhi Raha jagah akad Nahin dikhane chahiye.

Samay ke anusar kabhi kabhi jhukna bhi padta hai.

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