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Bail Gadi Par Shayari Bail Gadi Shayari In Hindi - Hindi Shayari H

  बैलगाड़ी शायरी   बैठ जाते थे अपने पराये बैल गाड़ी में जिसमे पूरा परिवार न बैठ पाए उसे तुम कार कहते हो मुझको वो मेरा गांव  याद दिलाता है बैलगाड़ी कविता सस्ती लोकप्रियता का सुंदर तरीका हमने भी आख़िर लिख दी कविता गलत पिच पर बल्ला घुमाओ देश भर के मीडिया में छाओ चमचे बनाएंगे डैडी सा हीरो अंत में तो बनना है ही ज़ीरो चढ़े हो तुम भी 'बैलगाड़ी' ज्यादा नहीं दूर जाएगी गाड़ी !

Chhanv Shayari In Hindi छांव शायरी In Hindi - Hindi Shayari H

छांव शायरी In Hindi     सफ़र में सोचते रहते हैं छांव आए कहीं ये धूप सारा समुंदर ही पी न जाए कहीं - मोहम्मद अल्वी Chhanv sher छांव पर शेर   मैं कि ख़ुद्दार था ठहरा न किसी छाँव तले गो कि रस्ते में मिले थे कई अश्जार घने - अहसन रिज़वी ख़्वाबों की छाँव में जो था अपना आशियाना सूरज जला चुका है ख़्वाबों का शामियाना - यूसुफ़ बिन मोहम्मद chhanv shayari छांव शेर बचपन तमाम गुज़रा है तारों की छाँव में तितली के पीछे जाती थी बादल के गाँव में - अनीता सोनी दूर सहरा की कड़ी धूप में छाँव जैसा वो तो लगता था मुझे मेरी दुआओं जैसा - अवैसुल हसन खान अब तक अपने हाथ न आया सुरमई छाँव का दामन भी चाँदी जैसी धूप में जलते एक ज़माना बीत गया - फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी   channv par sher छांव पर शायरी छाँव छाँव पुकारता जाए कौन करने लगा सफ़र मुझ में - जीम जाज़िल ये सोच कर कि दरख़्तों में छाँव होती है यहाँ बबूल के साए में आ के बैठ गए - दुष्यंत कुमार यादों के दरख़्तों की हसीं छाँव में जैसे आता है कोई शख़्स बहुत दूर से चल के - ख़ुर्शीद अहमद जामी chhanv par shayari छांव उर्दू शायरी पेड़ के नीचे ज़रा सी छाँव जो उस को मिली सो गया मज़दूर तन

Hawa Par Shayari Tez Hawa Shayari In Hindi हवा का झोंका शायरी

हवा पर शायरों की कुछ लाइन  hawa shayari   Two Lines Shayari on Hawa   हवा तो है ही मुख़ालिफ़ मुझे डराता है क्या हवा से पूछ के कोई दिए जलाता है क्या - ख़ुर्शीद तलब हवा के दोश पे रक्खे हुए चराग़ हैं हम जो बुझ गए तो हवा से शिकायतें कैसी - उबैदुल्लाह अलीम है आज रुख़ हवा का मुआफ़िक़ तो चल निकल कल की किसे ख़बर है किधर की हवा चले - इस्माइल मेरठी hawa par shayari रोज़ कहता है हवा का झोंका आ तुझे दूर उड़ा ले जाऊँ - मोहम्मद अल्वी हवा के साथ सफ़र का न हौसला था जिसे सभी को ख़ौफ़ उसी लम्हा-ए-शरर से था - मर्ग़ूब हसन Qamar Jalalabadi Famous Shayari In Hindi ऐसा न हो कि ताज़ा हवा अजनबी लगे कमरे का एक-आध दरीचा खुला भी रख - मरग़ूब अली   Tez Hawa Shayari In Hindi  ये हवा यूँ ही ख़ाक छानती है या कोई चीज़ खो गई है यहाँ - काशिफ़ हुसैन ग़ाएर हवा दरख़्तों से कहती है दुख के लहजे में अभी मुझे कई सहराओं से गुज़रना है - असद बदायूंनी  हवा के ऊपर शायरी उन के रुख़ पे देख कर आँचल हवा और पागल हो गई पागल हवा - इक़बाल सैफ़ी कहने लगा खुलते हुए दरवाज़ा हवा से ये पहला तआरुफ़ है मिरा ताज़ा हवा से - एहतिशाम हसन  

Father's Day Special Story Navjeevan Kahani In Hindi - Hindi Shayari h

  फादर्स डे स्पेशल : नवजीवन -विनय के पिता की क्या इच्छा थी? आसपास के दूषित वातावरण के कारण विनय के पिता का स्वास्थ्य बिगड़ गया था. फिर कैसे विनय ने अपने घर के आसपास के वातावरण को शुद्ध कर के पिता को नवजीवन प्रदान किया? नवजीवन Kahani In Hindi विनय बहुत होनहार छात्र था. उस के घर में कुल 3 सदस्य थे. उस के मातापिता और वह स्वयं. उस के पिता मुकुटजी बड़े ही सभ्य पुरुष थे. घर में सुखसुविधा के विशेष साधन नहीं थे फिर भी परिवार के सभी लोग अपना कर्तव्य निभाते हुए बड़ी प्रसन्नतापूर्वक जीवनयापन कर रहे थे. विनय अपने पिता की भांति धीरगंभीर और हंसमुख स्वभाव का तेजस्वी किशोर था. उस में कोई भी अवगुण नहीं था. इसी कारण घर से स्कूल तक सभी उस पर गर्व करते थे. वह मातापिता तथा गुरु का सम्मान करता था. उन की प्रत्येक आज्ञा का पालन बड़ी निष्ठा के साथ करता था. इसी तरह दिन बीतते जा रहे थे. विनय के पिता ने जहां घर लिया था, वहां बहुत सी मिलें, फैक्टरियां आदि आसपास ही थीं. वे स्वयं भी एक मिल में कार्यरत थे. दिन भर काम करते तथा शाम को थकेहारे घर आते. विनय उस समय पढ़ाई करता रहता. पिताजी को देख कर वह सोचता, ‘पिताजी मेरी

Qamar Jalalabadi Famous Shayari In Hindi क़मर जलालाबादी पोएट् kuchh to hai baat - Hindi Shayari h

क़मर जलालाबादी पोएट् kuchh to hai baat  क़मर जलालाबादी पोएट् चाहा तुझे तो ख़ुद से मोहब्बत सी हो गई खोने के बाद मिल गई अपनी ख़बर मुझे तेरे ख़्वाबों में मोहब्बत की दुहाई दूंगा जब कोई और न होगा तो दिखाई दूंगा   दुनिया को भूलकर तेरी दुनिया में आ गया ले जा रहा है कौन इधर से उधर मुझे  qamar jalalabadi poetry in hindi गोरा मुखड़ा ये सुर्ख़ गाल तेरे, चांदनी में गुलाब देखा है नर्गिसी आंख ज़ुल्फ़ शबरंगी, बादलों का जवाब देखा है   दुनिया का हर नज़ारा निगाहों से छीन ले कुछ देखना नहीं है तुझे देखकर मुझे  इश्क़ में उसने जलाना ही नहीं सीखा कभी आग दे जाएगा मुझ को ख़ुद धुआं ले जाएगा  कुछ तो है बात जो आती है क़ज़ा रुक रुक के ज़िंदगी कर्ज़ है क़िस्तों में अदा होती है   क़मर जलालाबादी की शायरी तेरी ही रूह का नग़्मा हूं अगर मिट भी गया मैं तुझे दूसरी दुनिया से सुनाई दूंगा  कोई इंसां नज़र आए तो बुलाओ उसको उसे इस दौर में जीने पे बधाई दूंगा तुझ को बिठा के दूर से देखा करेंगे हम यूं भी तेरे ग़ुरूर से खेला करेंगे हम   qamar jalalabadi shayari  

वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे २०२१ शायरी कलेक्शन इन हिंदी World Environment Day Shayari in Hindi - Hindi Shayari h

 World Environment Day 2021 Shayari Collection In Hindi   विश्व पर्यावरण दिवस शायरी इन हिंदी 2021       मैंने अपनी ख़ुश्क आंखों से लहू छलका दिया इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए - राहत इंदौरी अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है - बशीर बद्र       world environment day 2021 Poetry गाँव से गुज़रेगा और मिट्टी के घर ले जाएगा एक दिन दरिया सभी दीवार-ओ-दर ले जाएगा - जमुना प्रसाद राही गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो आँधियों तुमने दरख़्तों को गिराया होगा - कैफ़ भोपाली साहिल पे लोग यूं ही खड़े देखते रहे दरिया में हम जो उतरे तो दरिया उतर गया -अज्ञात मंज़िल तो सबकी एक ही है, रास्ते हैं जुदा, कोई पतझड़ से गुजरा, कोई सहरा से गया। किसी शजर के सगे नहीं हैं ये चहचहाते हुए परिंदे तभी तलक ये करें बसेरा दरख़्त जब तक हरा भरा है -नीरज      विश्व पर्यावरण दिवस शायरी इन हिंदी   फलदार था तो गांव उसे पूजता रहा सूखा तो क़त्ल हो गया वो बे-ज़बां दरख़्त -परवीन कुमार अश्क़ किसी दरख़्त से सीखो सलीक़ा जीने का जो धूप छांव से रिश्ता बनाए रहता है - अतुल अजनबी

Jheel Shayari in Hindi Font Collection झील पर शायरों pic - Hindi Shayari h

झील पर शायरों quotes झील सी आँखें शायरी      कोहरा ओढ़े टहल रही थी झील पे गहरी ख़ामोशी फिर सूरज ने धूप बिछाई तब कुछ ठहरी ख़ामोशी - ख़्वाजा तारिक़ उस्मानी उस ने हम को झील तराई और पहाड़ दिए हम ने इन सब की गर्दन में पंजे गाड़ दिए - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी यही चिनार यही झील का किनारा था यहीं किसी ने मिरे साथ दिन गुज़ारा था - मक़बूल आमिर     jheel kinare shayari झील के पार धनक-रंग समाँ है कैसा झिलमिलाता हुआ वो अक्स वहाँ है कैसा - नुसरत ग्वालियारी मुरझा के काली झील में गिरते हुए भी देख सूरज हूँ मेरा रंग मगर दिन-ढले भी देख - शकेब जलाली जिस तरह झील के पानी में सुकूँ तैरता है मेरी आँखों में तिरा अक्स भी यूँ तैरता है - ख़्वाजा तारिक़ उस्मानी मैं ने झील किनारे उस का नाम लिया झील ने हँस के नीले मोती उगल दिए - निगहत नसीम     , jheel related shayari     झील में चाँद गिरा था और मैं झील के पार दिखाई दिया हूँ - अहमद कामरान मिरी ख़ामोशियों की झील में फिर किसी आवाज़ का पत्थर गिरा है - आदिल रज़ा मंसूरी गहरी ख़मोश झील के पानी को यूँ न छेड़ छींटे उड़े तो तेरी क़बा पर भी आएँगे - मोहसिन नक़वी