Hindi jokes subah subah Pani ko Khush karne ke liye सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Hindi jokes subah subah Pani ko Khush karne ke liye

सुबह-सुबह पत्नी को खुश करने के लिए पति
ने फ्रिज से दूध का बर्तन निकाला और गैस पर रखा।
लेकिन जब आधा घंटा हो जाने के बाद भी उस में उबाल नहीं आया, तो उसने सोचा कि, समझ में आया कि वह तो इटली का घोल था।

पत्नी बेलन लेकर ढूंढ रही है....
पति फरार है।

Subah subah Patni ko Khush karne ke liye pati main free se doodh ka bartan nikala aur gas par rakha.

Lekin jab aadha ghanta ho Jane k bad bhi usme ubal nahi aaya to usne socha ki, samajh mein Aaya ki vah to idli ka ghol tha.
Patni belan laikar dhoondh rahi hai
pati farhar hai.

बैंक से फोन : मैडम, आपका अकाउंट हैक हो गया है।
मैडम : व्हाट्सएप अकाउंट ?
बैंक वाला : नहीं मैडम, बैंक अकाउंट।
मैडम : थैंक गॉड..... आपने तो मुझे डरा ही दिया था।

Bank se phone : madam, aapka account hai ho gaya hai.
Madam : WhatsApp account ?
Bank wala : Nahin madam, bank account.
Madam : thank God, aapne to mujhe tha.

पंडित जी ने प्रवचन देते हुए कहा : सोचो, तुम्हें परमपिता परमेश्वर ने हाथ क्यों दिए हैं ?

एक आदमी बोला : हाथ पर हाथ रखकर प्रवचन सुनने के लिए।

Pandit ji ne pravachan dete hue Kahan : socho, tumhe Param pita parmeshwar ne hath kyu diye Hain ?

Ek aadmi bola : hath par hath Rakh kar pravachan sunne ke liye.

नितिन ने सुधीर से कहा : शराब आप आदमी की दुश्मन है ।
सुधीर : लेकिन बुजुर्गों ने तो कहा है कि अपने दुश्मन को भी गले लगाना चाहिए ।
नितिन : गले लगाने के लिए ही कहा है, गले से नीचे उतारने के लिए नहीं ।

Nitin ne Sudhir se Kaha : sharab aadmi ke dushman hai.
Sudhir : lekin bujurgo ne to Kaha car Hai ki Apne dushman ko bhi gale lagana chahi.
Nitin : gale lagane ke liye hi kaha hai, gale se niche utarne ke liye Nahin. 🤣🤣🤣

                          Ek shayari

जायजा जब लिया गुलिस्ता का,
फूल के भेष में खार निकले।
हम समझते थे मासूम जिनको,
वह पुराने गुनहगार निकले।

डॉक्टर : आप की बीमारी का असल वजह मेरी समझ में नहीं आ रही, हो सकता है, शराब पीने की वजह से ऐसा हो रहा हो।

मरीज : कोई बात नहीं डॉक्टर साहब, जब आपकी उतर जाए तब चेकअप के लिए दोबारा आ जाऊंगा।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे