हेल्दी केक रेसिपी: ग्लूटन फ्री चॉकलेट केक सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हेल्दी केक रेसिपी: ग्लूटन फ्री चॉकलेट केक




अगर आपको केक खाने की क्रेविंग हो रही है और ग्लूटन से परहेज है, तो आप इस ग्लूटन फ्री चॉकलेट केक को अपनी डायट में शामिल करके अपनी क्रेविंग शांत कर सकते हैं. यह रेसिपी श्री लंका के कोलंबिया में स्थित मूवएनपीक होटल के पेस्ट्री शेफ़ नमल कालूबोवालिया की है. यक एक तरह की कीटो केक है.\


सामग्री
200 ग्राम शक्कर
200 ग्राम बादाम पाउडर
05 अंडे
125 ग्राम पिघला बटर
240 ग्राम पिघला डार्क चॉकलेट


विधि
• सबसे पहले ओवन को 160 सेल्सिया टैम्प्रेचर पर गर्म कर लें.
• शक्कर, बादाम पाउडर, अंडे और पिघले हुए बटर को एक साथ मिलाएं.
• अब उसमें डॉर्क चॉकलेट को भी मिलाकर, उसे एक चलाते हुए एक गाढ़ा मिश्रण बनाएं.
• मिश्रण को केक मोल्ड में डाकलर पहले से गर्म किए हुए ओवन में 30 से 40 मिनट तक बेक करें.
• केक को बाहर निकालकर डॉर्क चॉकलेट से डालकर सर्व करें.



 2)      सेहतभरा डिज़र्ट: जैगरी पैनाकोटा





लंच या डिनर के बाद मीठा खाने का मन हो, पर सेहत का ख़्याल आए, तो गुड़ से बने इस डिज़र्ट की तरफ़ रुख़ कर सकते हैं, जिसका नाम है जैगरी पैनाकोटा.


सामग्री
2 कप फुल फ़ैट दूध
¼ कप जैगरी (गुड़)
2 टीस्पून जैलेटिन
3 इलायची
¼ इलायची पाउडर (वैकल्पिक)
1/8 टीस्पून दालचीनी पाउडर


विधि
1. एक बाउल में 2 टीस्पून पानी लें और उसके ऊपर जेलेटिन डालकर 5 मिनट के लिए छोड़ दें.
2. अब एक पैन में दूध और गुड़ एक साथ डाल लें फिर इलायची छीलकर इसके दाने और छिलके दोनों को पैन में डालकर धीमी आंच पर पकाएं.
3. जब दूध में गुड़ पूरी तरह घुल जाए तो इसमें जेलेटिन, इलाइची पाउडर और दालचीनी पाउडर डालकर अच्छी तरह से चलाते हुए 5 मिनट तक पकाएं.
3. कुछ देर के लिए इस मिश्रण को ठंडा होने के लिए छोड़ दें. इसके बाद इसे छानकर पुडिंग मोल्ड में डालें और 2 घंटे रेफ्रिजरेंटर में सेट होने के लिए रख दें. अगर पूरी रात रखते हैं, तो और भी अच्छा होगा.
5. ठंडे पैनाकोटा को सर्विंग प्लेट में निकालें और उसके ऊपर क्रैनबेरी सॉस डालकर सर्व करें.


रेसिपी सौजन्य: तरुण सिब्बल, डायरेक्टर, वन फ़ाइन मील

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे