कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता 2 सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता 2



पिया अभि को देखकर हैरान रह गई थी। उसकी कल्पना से बिल्कुल उलट, अभि पिया से उम्र में काफी बड़ा दिखाई दे रहा था। छोटा कद,भारी शरीर,सांवला रंग... उफ्फ! ये कैसा लड़का पसन्द किया है पापा ने!


तभी उसे अपनी कही हुई बात याद आ गई " पापा आप जिसको चुनेंगे मैं उसी से शादी करूँ<गी।" ये क्या कर दिया मैंने, अपने जीवन का इतना अहम फैसला पापा के ऊपर छोड़ दिया!! पिया का मन हुआ कि तुरंत वहां से उठ कर चली जाये लेकिन अपने ही शब्द और पापा का चेहरा आँखों के आगे घूम गया और वो अपने स्थान पर ही जड़ हो गई।


आज बरसों बाद फ़िर उसकी आंखों के आगे रठि का चेहरा घूम रहा था। रवि,6 फुट लंबा,चौड़ा,गोरा रंग घुंघराले काले बाल, इतना आकर्षक कि जब पहली बार पिया ने उसे देखा तो देखती ही रह गई थी!!


रावि औरपिया, सुन की शादी में।मिले थे/सुयन पिया की ढुआ की बेटी थी। उन दोनों के बीच में पहली नज़र में ही प्यार हो गया था। लेकिन पिया ने कभी कुछ जाहिर नही होने दिया था/शादी केबिन जब।पिया गुलाबी लहंगा पहन कर जाई तो रावि की नज़र ही नही हट रही थी पिया से।


गुलाबी रंगत वाली पिया गुलाबी पौशाक यें सच एक गुलाब की कली ही लग रही थी।


रवि पढ्ा लिखा वेल सैटल्ड लड़का थाबिल्कुल वैसा जैसा कभी कोड लड़की अपने ख्वाबें में सोचती है।पिया के पास इन्कार की कोई वजह नही थी इसलिये जब रवि ने अपने।विल की बात।पिया को बताई तो।पिया ने यह प्रेम प्रस्ताव स्वीकार कर।लिया।


शादी से लोटते समय दोनों ने फ़ोन नंबरों की अवला बदली की और जपने अपने घर आ गये।


पिया का एय बी ए का पहला साल था रवि ने।पिया को वादा किया था।कि वह अपनी पढाई पूरी कर लेगी तब रावि और पिया शादी कर लेगे।


पिया और रावि की फोन पर बात होती रही। पिया पूरी तरह से रावि में खो गई थी।ना जाने।कितने सपने ढुन लिये थे उसने बस बेसब्री से एय बी ए पूरी होने का इन्तज़ार था।


फाईनल ईयर की परीक्षा नजदीक थी रवि ने(पिया को पूरा ध्यान पढाई में देने की सलाह दी और वादा किया कि अब परीक्षा खत्प होने पर ही बात करेंगे।


पिया थी पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी में जुट गई

चाचाजी की बेटी की शादी तय हो यई थी।लेकिन परीक्षा के बीच में शादी होने के कारण वो जा नही सकी थी।परीक्षा खत्स हुई जरिया हॉस्टल से घर आ गई।

घर जाते ही उसने काव्या को बुलाकर कहना" जल्दी से एल्बय लेकर आए बहुत यन था शादी में जाने का! खैर छोड़ चली एल्बय से ही काय चला लेते हैं।"

जैसे ही उसने दत्हे का चेहरा देखा, एक बिजली स्री आ।गिरीपिया पर/अपनी जांखों पर यकीन नही हो रहा था उसको। वो रावि जिसने उसे शादी के सपने ।दिखाये थे उसकी आंखों के सामने दल्‍्हे के लिबास में था।

"ये कैसे हो सकता है, अपने मन की तसलली के लिये उसने काव्या से पूछा' नाय क्या है लड़के का?"

"चाची ने शायद रवि बताया 4०", काव्या ने जवाब।विया/।

नाय सुनते ही पिया के होश उड़ गये।रावि ही था वो।

पिया।किसी को कुछ ना कह सकी /

आखिर बताती भी तो क्या? अपनी चचेरी बहन की खातिर उसने चुप्पी साध्ध ली/बता देने से भी कुछ बदलने वाला तो नहीं था।

रवि का मोबाइल नम्बर भी जब नही लग रहा था।

पिया को कभी सयझ ही नही आया कि उसकी गलती क्या थी क्‍यों रवि ने उसे धोखा दिया? गुनाह किए बगैर ही वो सजा भुगत रही थी।

इस घटना के बाव से उसमें अजीब बदलाव जा यये थे। हरवम चहकने वाली पिया गुयसुम सी रहने लगी।शादी और लड़कों में तो उसको कोरईबिलचस्पी बची ही नही थी। रवि के इस धोखे से दो जन्दर से पूरी तरह टूट चुकी थी। पिया को इस कदर सच्चा पहुंचा कि एक आय तक नही।निकला उसकी जाँखें से /सारा वर्द उसने अपने अन्दर समेट लिया था।

एक बार।किसी परिचित के यहाँ अचानक ही रवि से मिलना हुआ तो रवि ने ज़हर 4री जुबान खोलते हुए कह्लु "अरे इतना पिरियस क्यूँ ले रही हो गो बस एक टाइय पास जफ़ेयर था येरी तो पहले ही शादी तय थी। और ठुपसे शादी करता थी तो मिलता ही क्यए टीना के पापा ने70 लाख रुपये केशविए हैं।

रावि की बात सुनने के बाद तो यानो उसका लड़कों से।विज्ञास ही उठ गया था।

औरतें मंगल गीत गा रही थीं. उनकी आठाज से पिया झटके से अतीत की यादों से बाहर आई।अभि अब उसका वर्तमान है यह सब सोचते सोचते कब उसे चक्कर आये और दो कुर्सी से नीचे गिर पड़ी उसे पता भी ना चला।

सब तरफ अफरा तफरी सी मच गई ।अभि ने आकर पिया को उठाया और पानी पिलाकर अन्दर लिटा दिया ।अभि के चेहरे पर चिन्ता साफ नज़र आ रही थी।

थोड़ी देर बाद सगाई का कार्यक्रम शुरू हुआ लेकिन अभि ने पिया के चेहरे पर उदासी पढ ली थी......

क्या अभि और पिया की शादी होगी ? क्या अभि पिया का अतीत जान पायेगा? क्यों अभि ने सगाई से पहले पिया से मिलने की कोशिश नही की थी? सभी सठालों के जवाब जानने के लिये कहानी का अगला और अन्तिम भाग ज़रूर पढें।



Read part 3

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे