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आज के टॉप 4 शेर


तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूं मैं
कि तू मिल भी अगर जाए तो अब मिलने का ग़म होगा
-वसीम बरेलवी


यूं बिछड़ना भी बहुत आसां न था उस से मगर
जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना
- परवीन शाकिर


बात उल्टी वो समझते हैं जो कुछ कहता हूँ
अब की पूछा तो ये कह दूंगा कि हाल अच्छा है
- जलील मानिकपूरी


हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल
किसे देख कर आप शरमाइएगा
- जिगर मुरादाबादी


शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफ़ी है
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलने से
- एहतिशाम अख्तर

अँधेरे चारों तरफ़ सांय-सांय करने लगे
चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे


तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर
ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे
- राहत इन्दौरी

इश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया
जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है
- नूह नारवी

कुछ अंधेरा सा हर तरफ़ छाया
खुल गया जब बरस के वो बादल
- मिर्ज़ा शौक़ लखनवी

रात अंधेरे ने अंधेरे से कहा
एक आदत है जिए जाना भी
- कैफ़ी आज़मी

आ गए हो तो उजाला है मिरी दुनिया में
जाओगे तुम तो अंधेरा ही अंधेरा होगा
- लैस क़ुरैशी

रौशनी फैली तो सब का रंग काला हो गया
कुछ दिए ऐसे जले हर-सू अंधेरा हो गया
- आज़ाद गुलाटी

अँधेरों की शिकायत क्या अँधेरे फिर अँधेरे हैं
उजाले भी सितम इस दौर में कुछ कम नहीं करते
- आज़ाद गुरदासपुरी

हमारी प्यास पे बरसा अंधेरे उजियाले
वो कुछ घटाओं सा कुछ माहताब सा क्या था
- बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

मरने वालों की ज़िंदगी तू है
इस अँधेरे की रौशनी तो है
- साहिर लुधियानवी

है अंदर रौशनी बाहर अंधेरा
सो दोनों को मिला लेते हैं थोड़ा
- शोएब निज़ाम

सहर कैसी सहर का ज़िक्र भी इक जुर्म ठहरा है
अँधेरी रात का देखा है ये अंधेर भी मैं ने
- वक़ार मानवी

क्या क्या न अबुल-हौल तराशे गए उस से
जैसे ये अंधेरा भी हो पत्थर का अंधेरा
- आफ़ताब इक़बाल शमीम


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