दूध पीना नहीं है पसंद तो डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, कैल्शियम की नहीं होगी कमी सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दूध पीना नहीं है पसंद तो डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें, कैल्शियम की नहीं होगी कमी







विटामिन, प्रोटीन, पौटेशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम से परिपूर्ण दूध हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। शरीर में कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए दूध से बनी चीजों का प्रयोग करते हैं। लेकिन जिनको दूध पसंद नही वो क्या करे? अगर चाहते हैं कि शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मिल जाए और दूध भी पीना ना पड़े तो उसके लिए कुछ चीजें हैं जिन्हें खाने से शरीर में कैल्शियम की कमी पूरी होती है।






इसमें सबसे पहले नाम आता है बादाम का। पोषक तत्वों से भरपूर बादाम को रोजाना अपने खाने में शामिल करेंष दिन में 4 से 5 बादाम खाने से कैल्शियम की कमी तो पूरी होगी ही साथ ही ये ठंड से भी बचाता है। इसके अलावा इसमें पोटेशियम, विटामिन ई और आयरन भी होता है।





बीन्स में काफी मात्रा में कैल्शियम होता है।साथ ही बीन्स चर्बी घटाने में भी कारगर है। बीन्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये आपको काफी समय तक हेवी फील करवाती है, जिस वजह से आप बाहर की चीजों को खाने से परहेज करते हैं। इसके अलावा बीन्स के सेवन से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पाचन क्रिया भी ठीक रहती है।



अंजीर
अंजीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। इसमें कैल्शियम के साथ ही फाइबर और पोटैशियम की मात्रा भी पाई जाती है। अंजीर के सेवन से हड्डियों को मजबूती मिलती है और मैग्नीशियम की मदद से दिल की धड़कन सही बनी रहती है।




संतरा 
विटामिन डी से भरपूर संतरा कैल्शियम का भी एक अच्छा स्रोत है। संतरे में कैल्शियम भी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। इसके सेवन से शरीर में कैल्शियम की पूर्ति की जा सकती है।



दूध 
अपने सलाद में तिल के बीज मिलाएं। ये दूध ना पसंद करने वालों को लिए फायदेमंद है।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे