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'ऐ मालिक तेरे बंदे हम ऐसे हो हमारे करम' लिखने वाले गीतकार 'भरत व्यास' के 5 प्रसिद्ध नग़मे


ऐ मालिक तेरे बंदे हम
ऐ मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चलें
और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम



जब ज़ुलमों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें
हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटे बैर का ये भरम
नेकी पर चलें



ये अंधेरा घना छा रहा
तेरा इनसान घबरा रहा
हो रहा बेखबर
कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छिपा जा रहा
है तेरी रोशनी में वो दम
जो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चलें



बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमीं
पर तू जो खड़ा
है दयालू बड़ा
तेरी कृपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें


ज्योत से ज्योत जगाते चलो
ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो



जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा
प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा...



आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया का जलाते चलो, प्रेम की गंगा...



छाई है छाओं और अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं
धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा...



ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी सब को गले से लगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो ...



कौन है ऊँचा कौन है नीचा सब में वो ही समाया
भेद भाव के झूठे भरम में ये मानव भरमाया
धर्म ध्वजा फहराते चलो, प्रेम की गंगा ...



सारे जग के कण कण में है दिव्य अमर इक आत्मा
एक ब्रह्म है एक सत्य है एक ही है परमात्मा
प्राणों से प्राण मिलाते चलो, प्रेम की गंगा ...
आधा है चंद्रमा, रात आधी
आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी, मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा...



आस कब तक रहेगी अधूरी
प्यास होगी नहीं क्या ये पूरी
प्यासा-प्यासा गगन प्यासा-प्यासा चमन
प्यासे तारों की भी है बारात आधी
आधा है चंद्रमा...



सुर आधा है श्याम ने बाँधा
रहा राधा का प्यार भी आधा
नैन आधे खिले होंठ आधे मिले
रही पल में मिलन की वो बात आधी
आधा है चंद्रमा...



पिया आधी है प्यार की भाषा
आधी रहने दो मन की अभिलाषा
आधे छलके नयन आधे छलके नयन
आधी पलकों की भी है बरसात आधी
आधा है चंद्रमा...



आ लौट के आजा मेरे मीत
आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं
मेरा सूना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं



बरसे गगन मेरे बरसे नयन देखो तरसे है मन अब तो आजा
शीतल पवन ये लगाए अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा
तूने भली रे निभाई प्रीत
तूने भली रे निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं



एक पल है हँसना एक पल है रोना कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला
ये घड़ी न जाए बीत
ये घड़ी न जाए बीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं



जीवन में पिया तेरा साथ रहे
जीवन में पिया तेरा साथ रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे
जीवन में पिया तेरा साथ रहे



जब तक सूरज चन्दा चमके
गंगा जमुना में बहे पानी
रहे तब तक प्रीत अमर अपनी
है ये जनम जनम की दीवानी
ओ रानी याद मिलन
ओ जी हो ओ ओ ओ
ओ रानी याद मिलन की ये रात रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे



श्रृंगार भरा पिया प्यार तेरा
झंकार करे है मेरे कंगना में
लगी जब से लगन मेरे मन में सजन
शहनाई बजे है मेरे अँगना में
ओ पिया याद मिलन
ओ जी हो ओ ओ ओ
ओ पिया याद मिलन की ये रात रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे

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