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Bulandi Written By Badrish Top Shayari Collection - बुलंदी पर शायरों के चुनिंदा अल्फ़ाज़

Bulandi Written By Badrish Top Shayari Collection

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है
- बशीर बद्र



आता है यहां सब को बुलंदी से गिराना
वो लोग कहां हैं कि जो गिरतों को उठाएं
- अज्ञात


अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है
ये शहर बुलंदी से दरिया नज़र आता है
- इनाम नदीम


आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
- वसीम बरेलवी


ज़रा ये भी तो देखो हंसने वालो
कि मैं कितनी बुलंदी से गिरा हूं
- नूर क़ुरैशी


तुम उस को बुलंदी से गिराने में लगे हो
तुम उस को निगाहों से गिरा क्यूं नहीं देते
- सिराज फ़ैसल ख़ान


मैं एक ज़र्रा बुलंदी को छूने निकला था
हवा ने थम के ज़मीं पर गिरा दिया मुझ को
- नज़ीर बाक़री


जब बुलंदी पर पहुंच जाते हैं लोग
किस क़दर छोटे नज़र आते हैं लोग
- फ़ैज़ी निज़ाम पुरी


बुलंदी के लिए बस अपनी ही नज़रों से गिरना था
हमारी कम-नसीबी हम में कुछ ग़ैरत ज़ियादा थी
- राजेश रेड्डी


अपनी क़िस्मत का बुलंदी पे सितारा देखूं
ज़ुल्मत-ए-शब में यही एक नज़ारा देखू
ग़ुलाम मुर्तज़ा राह



इश्क़ में कौन बता सकता है
किस ने किस से सच बोला है
- अहमद मुश्ताक़


ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है बढ़ता है तो मिट जाता है
ख़ून फिर ख़ून है टपकेगा तो जम जाएगा
- साहिर लुधियानवी


रात को सोना न सोना सब बराबर हो गया
तुम न आए ख़्वाब में आंखों में ख़्वाब आया तो क्या
- जलील मानिकपूरी


रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है
- वसीम बरेलवी








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