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"dard kahata hai" "दर्द कहता है" (Kuchh ko badalna baki hai)


"दर्द कहता है"

दर्द कहता है आँसुओं से,जरा धीरे चलना।
सामने खड़े हैं वो, देख तेरी निगाहों के।।



दर्द कहता है आहटों से, बस चुप रहना।
मुस्कराये खड़े हैं वो, बीच तेरी राहों के।।


दिल कहता है चाहतों से, तू जिंदा रहना।
जिंदगी कुछ भी नहीं, बिन उनकी चाहों के ।।


दिल कहता है राहतों से, एक घड़ी तो ठहरना।
क्यों सजा देते हो तुम मुझको, बिन गुनाहों के।।

स्वरचित/सुनील भट्ट






"कुछ को बदलना बाकी है"

कुछ बेटी बदल चुकी,
कुछ को बदलना बाँकी है।
कुछ सपने पूरे हुए,
कुछ सपने सजाना बाँकी है।
कुछ मंजिल पा चुके,
कुछ मंजिल को पाना बाँकी है।
जन्म से पहले मर रही बेटी,
उन्हें बचाना बाँकी है।
तोड़कर चाहरदीवारी को,
अभी बाहर आना बाँकी है।
स्वतंत्र नभ में बेटी को,
पंख फैलाना बाँकी है।
समाज की कुरीति को,
अभी मिटाना बाँकी है।
फेंककर बेटी को चूड़ी -पायल,
रेस लगाना बाँकी है।
लड़कर हर जंग से,
अभी सम्मान पाना बाकी है।
कुछ बेटी तो बदल चुकी,
कुछ को बदलना बाकी है।

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