Govt Jobs Madras High Court Recruitment 2020 Vacancy For 32 District Judge Posts Sarkari Naukri सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Govt Jobs Madras High Court Recruitment 2020 Vacancy For 32 District Judge Posts Sarkari Naukri



Govt Jobs Madras High Court Recruitment 2020 Vacancy Sarkari Naukri


Madras High Court Recruitment 2020: अगर आप उच्च न्यायालय में नौकरी करना चाहते हैं, तो यहां आवेदन कर सकते हैं। दरअसल, मद्रास उच्च न्यायालय (High Court of Madras) ने जिला न्यायाधीश (एंट्री लेवल) के पदों पर आवेदन मांगे हैं। इन पदों पर नियुक्ति के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 08 जनवरी 2020 है। आवेदन करने के लिए उम्मीदवार High Court of Madras की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। नौकरी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आगे की स्लाइड देखें...



पदों का विवरण :
पद का नाम :                                                      पदों की संख्या :
जिला न्यायाधीश (एंट्री लेवल)                                        32


आयु सीमा :
उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष तक निर्धारित की गई है।


महत्वपूर्ण तिथि :
ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की प्रारंभिक तिथि : 12 दिसंबर 2019
ऑनलाइन आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि : 08 जनवरी 2020
आवेदन शुल्क के भुगतान की अंतिम तिथि 10 जनवरी 2020



शैक्षिक योग्यता :
अनिवार्य शैक्षिक योग्यता से संबंधित जानकारी के लिए उम्मीदवार आगे दिया गया नोटिफिकेशन देख सकते हैं।


आवेदन प्रक्रिया :
इन पदों पर आवेदन करने से पहले उम्मीदवार अधिसूचना को जरूर पढ़ें। सभी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें। जान लें किसी प्रकार की त्रुटि हो जाने पर आवेदन पत्र मान्य नहीं होगा।



चयन प्रक्रिया :
उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और मौखिक परीक्षा के आधार पर किया जाएगा।



आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें
ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ऑनलाइन आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Famous Love Shayari Of These Five Noted Urdu Poet होठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते

  Bashir badr shayari  बशीर बद्र की नज़्मों में मोहब्बत का दर्द समाया हुआ है। उनकी शायरी का एक-एक लफ़्ज़ इसका गवाह है। Bashir badr shayari     होठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आंखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते दिल उजड़ी हुई इक सराये की तरह है अब लोग यहाँ रात जगाने नहीं आते उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते इस शहर के बादल तेरी ज़ुल्फ़ों की तरह हैं ये आग लगाते हैं बुझाने नहीं आते अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गये हैं आते हैं मगर दिल को दुखाने नहीं आते मोहब्बत के शायर हैं जिगर मुरादाबादी इक लफ़्ज़-ए-मुहब्बत का अदना सा फ़साना है सिमटे तो दिल-ए-आशिक़, फ़ैले तो ज़माना है हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है रोने को नहीं कोई हंसने को ज़माना है ये इश्क़ नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे एक आग का दरिया है और डूब के जाना है     जिगर मुरादाबादी शायरी     वो हुस्न-ओ-जमाल उन का, ये इश्क़-ओ-शबाब अपना जीने की तमन्ना है, मरने का ज़माना है अश्क़ों के तबस्सुम में, आहों के तरन्नुम में मासूम मुहब्ब