Hindi Top 10 Shayari | Top 10 Shayaro ke In hindi | हिंदी टॉप 10 शायरी टॉप 10 शायरों की हिंदी में - Hindi shayarih सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Hindi Top 10 Shayari | Top 10 Shayaro ke In hindi | हिंदी टॉप 10 शायरी टॉप 10 शायरों की हिंदी में - Hindi shayarih

Hindi Top 10 Shayari | Top 10 Shayaro ke In hindi | हिंदी टॉप 10 शायरी टॉप 10 शायरों की हिंदी में - Hindi shayarih

Top 10 shayari | from top 10 shayaro ke in hindi शायरों की क़ैफ़ियत बताते 10 शेर. Read more about top shayari, famous shayari, famous sher on hindi shayari h.

Hindi Top 10 Shayari | Top 10 Shayaro ke In hindi 



हर कड़े वक़्त से सहल गुज़रे मगर
 इन दिनों दिल परेशां हमारा भी है
- महशर बदायूंनी




 क्यूं इन दिनों 'हसन' तू इतना झटक गया है
 ज़ालिम कहीं तिरा दिल क्या फिर अटक गया है
 - मीर हसन




 क्या बताऊं कि जो हंगामा बपा है
मुझ में इन दिनों कोई बहुत सख़्त ख़फ़ा है मुझ में
 - इरफ़ान सत्तार




Hindi Top 10 Shayari


रात आंखों में गुज़र जाती है
इन दिनों है ये हमारा सोना
- निज़ाम रामपुरी

Yeh Bhi padhe



इक अजब सी कैफ़ियत है
 इन दिनों न ख़ुशी है और न कोई मलाल
 - रुख़्सार नाज़िमाबादी



कहा चाहे है कुछ कहता है
 कुछ और 'हसन' ध्यान इन दिनों तेरा किधर है
- मीर हसन



 इन दिनों उस के सामने दिल की
जी-हुज़ूरी ही जी-हुज़ूरी है
- ज़ीशान साहिल


 यानी कि मैं ख़ुदा से बहुत दूर हो गया उठते
 नहीं दुआ को मिरे हाथ इन दिनों
 - क़मर अब्बास क़मर



 ज़ेहन उभार देता है नक़्श हाल ओ माज़ी के
 इन दिनों तबीअत कुछ यूं बहलती रहती है
 - एजाज़ सिद्दीक़ी





 ग़म का हर आलम नया है
इन दिनों दिल की हर दुनिया नई है
 आज-कल
- शकील बदायूंनी



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे