NBCC MT Recruitment 2019 Know How To Apply For 14 Management Trainee Posts सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

NBCC MT Recruitment 2019 Know How To Apply For 14 Management Trainee Posts


ट्रेनी के पद पर 1.40 वाख सैलरी, इंटरव्यू के आधार पर होगा चयन NBCC MT Recruitment 2019: NBCC MT वेकेंसी, NBCC MT में अनेक पदों पर भर्तियां होने जा रही हैं। आपको बता दें कि 14 मैनेजमेंट ट्रेनी और जीएम वेकेंसी 2019 के पदों के लिए भर्तियां हो रही हैं। उम्मीदवार के लिए पदों पर आवेदन की अंतिम तिथि 28 जनवरी 2020 निर्धारित की गई है। पदों पर आवेदन से संबंधित पूरी जानकारी के लिए उम्मीदवार को विज्ञापन लिंक के साथ-साथ आवेदन लिंक भी खबर में आगे की स्लाइड्स में दिए जा रहे हैं। इस नौकरी से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अगली स्लाइड देखें।




कैसे करें आवेदन-
इच्छुक उम्मीदवार वेबसाइट www.nbccindia.com फॉर्म 28.12.2019 से 28.01.2020 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


Advt. नंबर: 05/2019
NBCC MT चयन प्रक्रिया: चयन GATE 2019 के अंकों और व्यक्तिगत साक्षात्कार पर आधारित होगा।



महत्वपूर्ण तिथियां-
ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि- 28 दिसंबर 2019
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि- 28 जनवरी 2020




आवेदन शुल्क
जीएम और वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक के लिए- 1000 / -
एमटी के लिए- 500 / -
एससी / एसटी / पीडब्ल्यूडी उम्मीदवार के लिए- शुल्क नहीं है।




ऐसे करें आवेदन शु्ल्क का भुगतान- उम्मीदवार डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग के माध्यम से परीक्षा शुल्क का भुगतान करें।




पदों का विवरण-
पद का नाम                                                              पदों की संख्या                       वेतनमान
प्रबंधन प्रशिक्षु - सिविल (एमटी)                                        10                                  40,000-1,40,000 / - मुख्य महाप्रबंधक (सिविल)                                               02                                  1,00,000-2,60,000 / - सीनियर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (सिविल)                          02                                 1,50,000 - 3,00,000 / -



आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें
ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे