Sarkari Naukri Bihar Urban Development Recruitment 2019-20 Apply For Junior Engineer Vacancy सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Sarkari Naukri Bihar Urban Development Recruitment 2019-20 Apply For Junior Engineer Vacancy


Sarkari Naukri Bihar Urban Development Recruitment  

नगर विकास एवं आवास विभाग में 400 से ज्यादा पद खाली, नहीं देना कोई आवेदन शुल्क


Bihar Urban Development Recruitment 2019 – नगर विकास एवं आवास विभाग,बिहार सरकार ने भर्ती हेतु जूनियर इंजीनियर (असैनिक/यांत्रिक/विधुत) के कुल 463 खाली पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इच्छुक उम्मीदवार जो इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट या आगे दिए गए लिंक के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस नौकरी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आगे दी गई नोटिफिकेशन देखें।


शैक्षिक योग्यता :
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त संस्थानाें के असैनिक / यांत्रिक / विधुत अभियंत्रण में डिप्लोमाधारी जिनकों तकनीकी शिक्षा पर्षद या विश्वविद्यालय द्वारा डिप्लोमा प्राप्त होना आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए आगे दी गई नोटिफिकेशन देखें।


महत्वपूर्ण तिथियां :
आवेदन पत्र जमा करने की प्रारंभिक तिथि : 19 दिसंबर 2019
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि : 08 जनवरी 2020



पदों का विवरण :
पदों का नाम :                                                     पदों की संख्या :
कनीय अभियंता (असैनिक)                                   377
कनीय अभियंता (यांत्रिक)                                       44
 कनीय अभियंता (विधुत)                                        42


आयु सीमा :
पुरुषों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष।
महिलाओं की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी आवश्यक हैं।


आवेदन शुल्क :
उम्मीदवारों के लिए इन पदों पर आवेदन करने के लिए किसी प्रकार का आवेदन शुल्क नहीं देना होगा।


ऐसे करें आवेदन :
उम्मीदवार आवेदन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और अधिसूचना डाउनलोड करें। दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया को अंतिम तिथि 08 जनवरी 2020 की शाम तक पूरा करें। आवेदन करने के बाद एक प्रिंटआउट जरूर लें।


आधिकारिक वेबसाइट के लिए यहां क्लिक करें।
ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे