महंगाई रानी को नमन है ! Mahngai Rani Ko Naman Hain Hindi Story
महंगाई रानी मंद-मंद मुस्कुरा रही है. सत्ता सिहासन पर आसीन उनका सुकोमल चेहरा, देदीव्यमान आभा से आभासित है.महंगाई रानी कहती है- "बोलो ! अब बोलो !! बताओ, मेरी महिमा का गान करोगे की नहीं ?"
एक इंडियन- “आज गैस सिलेंडर के दाम तुम्हारे प्रकोप से सीधे एक सौ पचास रूपये बढ़ गए.”
दूसरा इंडियन- देखते ही देखते टमाटर 5 रूपये से 30 रूपये केजी हो गए .”
तीसरा इंडियन- “आलू 10 से 20 रूपये किलो हो गए .”
चौथा इंडियन-” खाने का तेल भी महंगा हो गया.”
पांचवा इंडियन- ” बीच बीच में रेल यात्रा भी महंगी हो रही है .”
सैकड़ों इंडियन महंगाई रानी के समक्ष, उनके सिहांसन के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हैं । किसी के चेहरे पर बारह बज रहे हैं, तो किसी के एक और किसी के चेहरे पर दो बजे हैं.
महंगाई रानी की मुस्कुराहट और मादक हो गई है. वह मधुर स्वर में बोली,- “तुम इंडियन, मेरी पूजा अर्चना नहीं करते, मुझसे घृणा करते हो. मेरी और देखना भी पसंद नहीं करते.यह अब और बर्दाश्त नहीं करूंगी. देखो, मेरी अक्षुण्ण शक्ति को पहचानो, और मेरी देवी! की भांति, पूजा करना प्रारंभ करो.
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एक इंडियन-” हमने तो सदैव देवी- देवताओं की पूजा की है.”
दूसरा इंडियन- “हमारे किसी धार्मिक ग्रंथ में तुम्हारी पूजा के संदर्भ में कोई संकेत नहीं मिलता”
तीसरा इंडियन- “हमारे किसी ऋषि महर्षि ने कभी कोई स्तुति तुम्हारी नहीं गायी है”
चौथा इंडियन- “हे देवी ! हम विवश ह. हम लकीर के फकीर हैं…”
महंगाई रानी हंसती है.उसकी कल- कलकाती हंसी सभी के कानों में गूंज रही है . महंगाई रानी कह रही है-” देखो ! तुम सभी की पूजा करते हो, सांप हो या उल्लू, कुत्ता हो या हाथी, बकरी हो या गाय, आकाश हो या धरती… फिर मेरा अपमान क्यों करते रहते हो!”
सभी इंडियन के चेहरे पर अनेक भाव आ जा रहे हैं.
एक इंडियन- “मगर हम भी क्या करें, हमारे पूर्वजों ने कभी तुम्हारा महत्व हमें बताया ही नहीं… हम क्या करें.”
महंगाई रानी-” तुम बहुत भोले हो, मेरी शक्ति और महाशक्ति का आभास तुम्हें निरंतर हो रहा है, की नहीं.
सभी इंडियंस हाथ जोड़ कर समवेत – “हम तो आपकी महाशक्ति के मर्मांतक पीड़ा से आहत हैं त्राहि त्राहि कर रहे हैं.”
महंगाई रानी-( जोर से हंस कर ) -“मेरी चमत्कारी ताकत से, देश की सरकार, सत्ता, जन-जन कांपते हैं.”
इंडियंस हाथ जोड़कर- “सचमुच ! हम यह अपनी आंखों से देख रहे हैं.”
महंगाई रानी- “तो मूर्खों की तरह गुटूर- गुटूर क्या देख रहे हो,क्यों नहीं, श्रद्धा और भक्ति का चोला ओढ़कर मेरे समक्ष पंक्तिबद्ध खड़े हो जाते. क्यों नहीं घंट बजाते, मेरी स्तुतिका गान करते.”
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इंडियन एक-“हमें सोचने का वक्त दो… हम निरीह गरीब इंडियन पर रहम करो.”
महंगाई रानी- “मैं लगातार, अपनी शक्ति का प्रकोप दिखा रही हूं.”
इंडियंस दो-“हम देख रहे हैं.”
महंगाई रानी-” मैं अपनी ताकत से, तुम्हारा कचूमर निकाल रहीं हूं.”
इंडियन तीन-” हम लोग खून के आंसू रो रहे हैं.”
महंगाई रानी- “देखो ! जब तक तुम श्रद्धा भक्ति के आवेग का प्रदर्शन करते हुए, मेरी अर्चना नहीं करोगे, मैं तुम्हें इसी तरह प्रताड़ित करती रहूंगी. देखो… तुम भ्रम में मत रहना,तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता. मुझे तुम्हारी एक-एक हरकत की, आहट का पता चल जाता है.”
इंडियन चौथा- “वह कैसे महंगाई रानी !”
महंगाई हंसकर- “मुझे पता है,मुझसे बचने तुम सरकार के पास जाकर रोते गिड़गिड़ाते हो… हा… हा… हा .”
इंडियन पांचवा- “सरकार हमारी माई बाप है, महंगाई रानी .”
महंगाई रानी-( हंसकर ) “सरकार, जब तुम्हारी और ध्यान नहीं देती तब तुम विपक्ष के पास जाते हो… हा हा हा मगर विपक्ष मेरी राई रत्ती नहीं बिगाड़ सकता, तुम्हारी रक्षा वह नहीं कर सकता । वह ढोंग करता है देश बंद कराने का ढोंग, मगर क्या उससे मुझसे मुक्ति मिलती है.”
सभी इंडियन समवेत स्वर में- “त्राहिमाम… त्राहिमाम । हमारी रक्षा अब तुम ही करो । हमें रास्ता बताओ । ऐसा रास्ता जिससे हमारा धर्म भी बच जाए और जान भी.”
महंगाई रानी”-एक ही रास्ता है, जो मैं बता चुकी हूं । तुम श्रद्धा भक्ति के साथ जैसे अन्य देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते हो मेरी भी करो.”
सभी इंडियन आंखें फाड़ महंगाई रानी की ओर देख रहे हैं । आंखों में विराट शून्य है ।
महंगाई रानी- “तुम इंडियंस बेहद समझदार हो. खुश हो जाओ. देखो, मेरा प्रकोप त्रेता मे भी था, सतयुग में, भी द्वापर में भी.मगर आज कलयुग में मैं अपने उध्दाम स्वरूप में हूं हा हा हा…”
सभी इंडियन- “हमें सोचने का वक्त दो, किसी सहृदय से मशविरा कर ले.”
महंगाई रानी-” ठीक है,मैं फिर आऊंगी । हा हा हा…”
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एक इंडियन- “आज गैस सिलेंडर के दाम तुम्हारे प्रकोप से सीधे एक सौ पचास रूपये बढ़ गए.”
दूसरा इंडियन- देखते ही देखते टमाटर 5 रूपये से 30 रूपये केजी हो गए .”
तीसरा इंडियन- “आलू 10 से 20 रूपये किलो हो गए .”
चौथा इंडियन-” खाने का तेल भी महंगा हो गया.”
पांचवा इंडियन- ” बीच बीच में रेल यात्रा भी महंगी हो रही है .”
सैकड़ों इंडियन महंगाई रानी के समक्ष, उनके सिहांसन के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हैं । किसी के चेहरे पर बारह बज रहे हैं, तो किसी के एक और किसी के चेहरे पर दो बजे हैं.
महंगाई रानी की मुस्कुराहट और मादक हो गई है. वह मधुर स्वर में बोली,- “तुम इंडियन, मेरी पूजा अर्चना नहीं करते, मुझसे घृणा करते हो. मेरी और देखना भी पसंद नहीं करते.यह अब और बर्दाश्त नहीं करूंगी. देखो, मेरी अक्षुण्ण शक्ति को पहचानो, और मेरी देवी! की भांति, पूजा करना प्रारंभ करो.
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एक इंडियन-” हमने तो सदैव देवी- देवताओं की पूजा की है.”
दूसरा इंडियन- “हमारे किसी धार्मिक ग्रंथ में तुम्हारी पूजा के संदर्भ में कोई संकेत नहीं मिलता”
तीसरा इंडियन- “हमारे किसी ऋषि महर्षि ने कभी कोई स्तुति तुम्हारी नहीं गायी है”
चौथा इंडियन- “हे देवी ! हम विवश ह. हम लकीर के फकीर हैं…”
महंगाई रानी हंसती है.उसकी कल- कलकाती हंसी सभी के कानों में गूंज रही है . महंगाई रानी कह रही है-” देखो ! तुम सभी की पूजा करते हो, सांप हो या उल्लू, कुत्ता हो या हाथी, बकरी हो या गाय, आकाश हो या धरती… फिर मेरा अपमान क्यों करते रहते हो!”
सभी इंडियन के चेहरे पर अनेक भाव आ जा रहे हैं.
एक इंडियन- “मगर हम भी क्या करें, हमारे पूर्वजों ने कभी तुम्हारा महत्व हमें बताया ही नहीं… हम क्या करें.”
महंगाई रानी-” तुम बहुत भोले हो, मेरी शक्ति और महाशक्ति का आभास तुम्हें निरंतर हो रहा है, की नहीं.
सभी इंडियंस हाथ जोड़ कर समवेत – “हम तो आपकी महाशक्ति के मर्मांतक पीड़ा से आहत हैं त्राहि त्राहि कर रहे हैं.”
महंगाई रानी-( जोर से हंस कर ) -“मेरी चमत्कारी ताकत से, देश की सरकार, सत्ता, जन-जन कांपते हैं.”
इंडियंस हाथ जोड़कर- “सचमुच ! हम यह अपनी आंखों से देख रहे हैं.”
महंगाई रानी- “तो मूर्खों की तरह गुटूर- गुटूर क्या देख रहे हो,क्यों नहीं, श्रद्धा और भक्ति का चोला ओढ़कर मेरे समक्ष पंक्तिबद्ध खड़े हो जाते. क्यों नहीं घंट बजाते, मेरी स्तुतिका गान करते.”
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इंडियन एक-“हमें सोचने का वक्त दो… हम निरीह गरीब इंडियन पर रहम करो.”
महंगाई रानी- “मैं लगातार, अपनी शक्ति का प्रकोप दिखा रही हूं.”
इंडियंस दो-“हम देख रहे हैं.”
महंगाई रानी-” मैं अपनी ताकत से, तुम्हारा कचूमर निकाल रहीं हूं.”
इंडियन तीन-” हम लोग खून के आंसू रो रहे हैं.”
महंगाई रानी- “देखो ! जब तक तुम श्रद्धा भक्ति के आवेग का प्रदर्शन करते हुए, मेरी अर्चना नहीं करोगे, मैं तुम्हें इसी तरह प्रताड़ित करती रहूंगी. देखो… तुम भ्रम में मत रहना,तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता. मुझे तुम्हारी एक-एक हरकत की, आहट का पता चल जाता है.”
इंडियन चौथा- “वह कैसे महंगाई रानी !”
महंगाई हंसकर- “मुझे पता है,मुझसे बचने तुम सरकार के पास जाकर रोते गिड़गिड़ाते हो… हा… हा… हा .”
इंडियन पांचवा- “सरकार हमारी माई बाप है, महंगाई रानी .”
महंगाई रानी-( हंसकर ) “सरकार, जब तुम्हारी और ध्यान नहीं देती तब तुम विपक्ष के पास जाते हो… हा हा हा मगर विपक्ष मेरी राई रत्ती नहीं बिगाड़ सकता, तुम्हारी रक्षा वह नहीं कर सकता । वह ढोंग करता है देश बंद कराने का ढोंग, मगर क्या उससे मुझसे मुक्ति मिलती है.”
सभी इंडियन समवेत स्वर में- “त्राहिमाम… त्राहिमाम । हमारी रक्षा अब तुम ही करो । हमें रास्ता बताओ । ऐसा रास्ता जिससे हमारा धर्म भी बच जाए और जान भी.”
महंगाई रानी”-एक ही रास्ता है, जो मैं बता चुकी हूं । तुम श्रद्धा भक्ति के साथ जैसे अन्य देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते हो मेरी भी करो.”
सभी इंडियन आंखें फाड़ महंगाई रानी की ओर देख रहे हैं । आंखों में विराट शून्य है ।
महंगाई रानी- “तुम इंडियंस बेहद समझदार हो. खुश हो जाओ. देखो, मेरा प्रकोप त्रेता मे भी था, सतयुग में, भी द्वापर में भी.मगर आज कलयुग में मैं अपने उध्दाम स्वरूप में हूं हा हा हा…”
सभी इंडियन- “हमें सोचने का वक्त दो, किसी सहृदय से मशविरा कर ले.”
महंगाई रानी-” ठीक है,मैं फिर आऊंगी । हा हा हा…”
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