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Intezar par hindi shayari and book of shayari | 'इंतिज़ार' पर कहे गए 10 शेर. किताबों पर कहे शायरों


इंतिज़ार' पर कहे गए 10 शेर. किताबों पर कहे शायरों
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'इंतिज़ार' पर कहे गए 10 चुनिंदा शेर...

जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
- जौन एलिया

कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
- कैफ़ भोपाली


इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के
- फ़रहत एहसास

इंतिज़ारी तो जान ले लेती
सब्र मिलता रहा सितारों से
- शौक़ मुरादाबादी
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मुफ़्लिसी हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
मौत का इंतिज़ार क्या करते
- सिरज आलम ज़ख़मी

न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद
मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था
- फ़िराक़ गोरखपुरी


मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई
- असरार-उल-हक़ मजाज़

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा
- साक़ी फ़ारुक़ी

कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
- हसरत जयपुरी


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किताबों पर कहे शायरों के अल्फ़ाज

दिल मिरा साफ़ आइने की तरह
एक सादा किताब है यारो
- दानिश फ़राही


खुली किताब थी फूलों-भरी ज़मीं मेरी
किताब मेरी थी रंग-ए-किताब उस का था
- वज़ीर आग़ा
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फ़ल्सफ़ा भी ख़ुदी फ़लसफ़ी भी ख़ुदी
आप तालिब है आप ही किताब आदमी
- आतिफ़ ख़ान


मैं उसे पढ़ती हूँ मोहब्बत से
उस का चेहरा किताब जैसा है
- शबाना यूसुफ़
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हर शख़्स है इश्तिहार अपना
हर चेहरा किताब हो गया है
- क़ैसर-उल जाफ़री


ग़ौर से पढ़ सको तो समझोगे
एक दिलकश किताब है दुनिया
- अहसन इमाम अहसन

वो चेहरा किताबी रहा सामने
बड़ी ख़ूबसूरत पढ़ाई हुई
- बशीर बद्र
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अश्कों में पिरो के उस की यादें
पानी पे किताब लिख रहा हूँ
- हसन आबिदी


हम राज़-ए-दिल छुपाते मगर अपनी ज़िंदगी
पूरी खुली किताब अगर हो तो क्या करें
- जमील उस्मान


पढ़ता रहता हूं आप का चेहरा
अच्छी लगती है ये किताब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब
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