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New hindi story i'm not characterless by Akshay Kulshrestha नई हिंदी कहानी चरित्रहीन नहीं हूं मैं


नई हिंदी कहानी चरित्रहीन नहीं हूं मैं
चरित्रहीन नहीं हूं मैं


नई हिंदी कहानी चरित्रहीन नहीं हूं मैं
रात में विकास की तबीयत बिगड़ने लगी. वह बारबार राकेश से बात करने की कह रहा था. मीनू ने रात में ही राकेश को फोन किया.
अक्षय कुलश्रेष्ठ 


सुबह के 7 बजे थे, पर उठने का मन नहीं कर रहा था. ज्यों ही विकास ने करवट बदली तभी पत्नी मीनू बोल उठी  “उठ जाइए, कब तक ऐसे लेटे रहेंगे.”

यह सुन कर गुड मॉर्निंग कहता हुआ विकास मुस्कराहट बिखेरते हुए बोला, ” यार मीनू, अब तो अच्छी तरह सो लेने दो. कहीं जाना थोड़े ही न है. ऑफिस बंद है. घर में भी बंद हैं. तुम घर से बाहर निकलने दे नहीं रही हो. बताओ, क्या करूं मैं?”

“करोगे क्या, पहले फ्रेश हो जाओ. चाय पी लो. उस के बाद थोड़ा साफसफाई कर दो, कुछ नहीं है तो छत पर ही टहल लो,” मीनू ने अपनी बात रखी और सलाह देते हुए कहा कि सुबह समय पर उठने से पूरे दिन  एनर्जी बनी रहती है.

पति विकास बोला, “एनर्जी तो तुम ही लो, मुझे बख्शो. साफसफाई तो हो रखी है. फिर क्या जबरदस्ती साफसफाई करूं?”

इस पर मीनू तुनकते हुए बोली,”अच्छा आया कोरोना…? इस ने तो घर में ही कुहराम मचा रखा है.”

“क्या कुहराम…?” पति झल्लाहट भरी आवाज में बोला.

“सुबहसुबह झल्लाने की जरूरत नहीं है, ” मीनू भी अपने तेवर दिखाते हुए बोली तो विकास नरम पड़ गया.

जैसे ही विकास फ्रेश हो कर आया, मीनू से गरमागरम चाय की मांग कर डाली. इस पर मीनू बोली, “जितना यह घर मेरा है उतना ही तुम्हारा भी है. क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आज चाय तुम बनाओ और मैं भी तुम्हारे साथ छुट्टियों का मजा लूं.”

यह सुन कर विकास के ऊपर घड़ों पानी पड़ गया. वह नरमी से बोला,”यदि ऐसी बात है तो आज तो बना देता हूं, पर हर रोज नहीं.”

“हर रोज की कह कौन रहा है,” मीनू भी नहले पर दहला मारते हुए बोली.

विकास किचन में चाय बनाने चला गया, पर न चीनी का पता था और न चाय की पत्ती का. जब पानी उबल गया तो किचन से ही आवाज लगाई,”मीनू, ओ मीनू, चाय की पत्ती कहां है?”


अब तो मीनू को भी बिस्तर से उठ कर किचन तक आना पड़ा. वह मुस्कराते हुए बोली,”रहने दो आप…? मैं बनाती हूं.”

चाय की महक से विकास के चेहरे पर मुस्कान तैर गई.

घर में टेलीविजन खोल कर देखा तो वहां भी कोरोना… कोरोना… को ले कर ही खबरें आ रही थीं.

ऐसी खबरें सुन विकास गुमसुम सा रहने लगा था, वहीं शराब की तलब भी उसे बेचैन कर रही थी.

अनजान बनते हुए मीनू बारबार हाल पूछती, पर वह टाल देता क्योंकि जब से लॉकडाउन हुआ है तब से उसे पीने को शराब नहीं मिल रही थी और न ही वे दोस्त मिल पा रहे थे जो शराब पीने के तलबगार थे.

दिन यों ही गुजरते जा रहे थे. शराब न पीने से विकास की बेचैनी बढ़ती जा रही थी.

तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई. कालबेल बजी. विकास ने उठ कर दरवाजा खोला. सामने उस का पड़ोसी राकेश खड़ा था.

कमरे में आते ही राकेश ने विकास की चालढाल देख कर पूछ लिया तो पता चला कि शराब न मिलने से तबीयत खराब हो रही है.

मीनू राकेश के लिए चाय बना कर लाई, तभी उस की नजर विकास की खूबसूरत पत्नी मीनू पर पड़ी. वह मन ही मन उस को पाने के ख्वाब देखने लगा.

राकेश और विकास ने चाय ली. कुछ देर इधरउधर की बात करने के बाद राकेश वहां से चला गया.

अगले दिन राकेश ने विकास को फोन किया और पूछ बैठा,”आज शाम क्या कर रहा है? क्या आज छत पर आ सकता है, कुछ प्रोग्राम करते हैं.”

विकास बोला,”चल ठीक है, पर किसी को बताना नहीं.”

राकेश भी मजाक करते हुए बोला,” भाभी को भी नहीं?”

“नहीं, नहीं, उसे भी नहीं,” विकास ने जवाब दिया.

“चल ठीक है, फिर शाम को मिलते हैं,” इतना कहने के बाद राकेश ने फोन काट दिया.


शाम को राकेश किसी जरूरी काम में फंस गया और छत पर नहीं पहुंचा. न ही विकास को खबर दी.

शाम को विकास छत पर आ गया. काफी देर राकेश का इंतजार भी किया, पर वह नहीं आया तो उस ने कई बार राकेश को फोन लगाए, पर उस ने उठाया ही नहीं. मन मार कर वह नीचे उतर आया.

रात में विकास की तबीयत बिगड़ने लगी. वह बारबार राकेश से बात करने की कह रहा था. मीनू ने रात में ही राकेश को फोन किया.

फोन सुन कर राकेश तभी शराब ले कर वहां पहुंच गया. राकेश को आया देख विकास खुश हो गया.

2 घूंट गले के नीचे उतरते ही विकास की बेचैनी कम हो गई, पर राकेश के ज्यादा जोर देने पर विकास ने उस रात जम कर शराब पी. कुछ देर बाद विकास बेसुध हो गया.

जब विकास को होश न रहा, तब मौका देख कर राकेश मीनू के पास आया और उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मनमानी कर के छोड़ा.

फिर चुपचाप मुंहअंधेरे अपने घर चला गया.

अब जब भी विकास को शराब पीने की तलब लगती, राकेश को फोन कर देता. राकेश शराब ले कर आ जाता और दोनों ही मिल कर पीते.

विकास तो पी कर नशे में धुत्त हो जाता, वहीं राकेश लिमिट में ही पीता और मीनू से अपनी जिस्मानी भूख शांत करता.

पर, एक दिन तो हद हो गई. मीनू और विकास के बीच जबरदस्त झगड़ा हुआ. झगड़े की वजह राकेश ही था, क्योंकि वह हर दूसरेतीसरे दिन घर पर आ धमकता था और मीनू पर संबंध बनाने के लिए जोर डालता, इस से मीनू उकता चुकी थी.

राकेश का शराब ले कर इस तरह आना मीनू को बिलकुल भी पसंद नहीं था. मीनू नहीं चाहती थी कि राकेश घर आए, पर विकास चाहता था.

इस बात को ले कर मीनू और विकास  में जम कर झगड़ा भी हुआ. मीनू अब राकेश के सामने भी झगड़ने लगी थी.


एक दिन राकेश शराब लाया. नशे में धुत्त होने के बाद राकेश ने विकास को मीनू और अपने संबंध के बारे में बता दिया.

यह सुन कर विकास के पैरों तले जमीन खिसक गई. कभी वह मीनू की ओर देखता तो कभी राकेश की ओर. मीनू भी चुपचाप राकेश की बातें सुन रही थी. पर कुछ बोल नहीं पाई.

राकेश के सामने ही विकास ने मीनू की जम कर पिटाई की.

मौका देख राकेश ने वहां से जाने में ही अपनी भलाई समझी.

उस के जाते ही मीनू और विकास में फिर जम कर झगड़ा हुआ. विकास ने मीनू को चरित्रहीन कहा तो मीनू यह सुनते ही बिफर गई और चिल्ला कर बोली,” चरित्रहीन नहीं हूं मैं, चरित्रहीन तो तुम हो, जो लॉकडाउन में भी गलत तरीके से शराब मंगवा कर पी रहे हो. मैं तो सिर्फ तुम्हारे द्वारा किए गए नाजायज सौदे की नाजायज कीमत अदा कर रही हूं.”

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