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Hindi शायरी Best Shakh Shayari Collection शाख़ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़ - Hindi Shayari H

'शाख़' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़


Hindi शायरी Best Shakh Shayari Collection 'शाख़' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़



वो शाख़ बने-सँवरे वो शाख़ फले-फूले
जिस शाख़ पे धूप आए जिस शाख़ को नम पहुँचे
- ज़िया जालंधरी
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शाख़-दर-शाख़ तिरी याद की हरियाली है
हम ने शादाब बहुत दिल का शजर रक्खा है
- सलीम फ़िगार
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पेड़ उजड़ते जाते हैं
शाख़ों की नादानी से
- हम्माद नियाज़ी
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आँधियाँ आती थीं लेकिन कभी ऐसा न हुआ
ख़ौफ़ के मारे जुदा शाख़ से पत्ता न हुआ
- शहरयार
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परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है
उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में
- खलील तनवीर
शाख शेर, 





सब्ज़ मौसम से मुझे क्या लेना
शाख़ से अपनी जुदा हूँ बाबा
- क़ैशर शमीम
शाख शायरी, 

जो शाख़ शाख़ परिंदों का आशियाना था
वो बर्ग बर्ग पुराना शजर समेटा है
- अज़रा वहीद
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ये शाख़ शाख़ परिंदे पुकारते हैं 'मतीन'
हमें तो शाख़ से गिर कर गुलाब होना है
- ग़यास मतीन
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पेड़ों पे चुप रहने वाली राग गई
शाख़ शाख़ पे बोलने वाला दिन निकला
- मोहम्मद अल्वी
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ढलता सूरज शाख़ हुआ
झुका हुआ है टूटा दिन
- नज़ीर क़ैसर
उर्दू शायरी

तू शाख़ शाख़ पे बैठा है फूल की सूरत
मैं ख़ार ख़ार से उलझूँ तो तुझ से बात करूँ
- राज कुमार क़ैस
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