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Latest Hindi Mothers Day Maa Shayari Collection and Kaifi Azmi Selected Shayari - मदर्स डे - 'मां' के लिए कहे शायरों के अल्फ़ाज़



Latest Hindi Mothers Day Maa Shayari Collection
Latest Hindi Mothers Day Maa Shayari Collection

मदर्स डे - 'मां' के लिए कहे शायरों के अल्फ़ाज़

 
 
चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
- मुनव्वर राना


कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है
- अंजुम ख़लीक़

जिस ने इक उम्र दी है बच्चों को
उस के हिस्से में एक दिन आया
- अज्ञात


मैं ने माँ का लिबास जब पहना
मुझ को तितली ने अपने रंग दिए
- फ़ातिमा हसन

शायद यूं ही सिमट सकें घर की ज़रूरतें
'तनवीर' माँ के हाथ में अपनी कमाई दे
- तनवीर सिप्रा




सामने मां के जो होता हूँ तो अल्लाह अल्लाह
मुझ को महसूस ये होता है कि बच्चा हूं अभी
- महफूजुर्रहमान आदिल

एक लड़का शहर की रौनक़ में सब कुछ भूल जाए
एक बुढ़िया रोज़ चौखट पर दिया रौशन करे
- इरफ़ान सिद्दीक़ी


रौशनी भी नहीं हवा भी नहीं
माँ का नेमुल-बदल ख़ुदा भी नहीं
- अंजुम सलीमी

इस लिए चल न सका कोई भी ख़ंजर मुझ पर
मेरी शह-रग पे मिरी माँ की दुआ रक्खी थी
- नज़ीर बाक़री


मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल
मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई
- इक़बाल अशहर

मुनव्वर मां के आगे यूं कभी खुल कर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती
- मुनव्वर राना


Maa Shayari Collection
Maa Shayari Collection



इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
- मुनव्वर राना

ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
- जौन एलिया

कोई चराग़ जलाता नहीं सलीक़े से
मगर सभी को शिकायत हवा से होती है
- ख़ुर्शीद तलब

'अरीब' देखो न इतराओ चंद शेरों पर
ग़ज़ल वो फ़न है कि 'ग़ालिब' को तुम सलाम करो
- सुलैमान अरीब




कैफ़ी आज़मी की पुण्यतिथि पर उनके चुनिंदा शेर

 


बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमां जो बस गए
इंसां की शक्ल देखने को हम तरस गए


मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई

रोज़ बढ़ता हूं जहां से आगे
फिर वहीं लौट के आ जाता हूं


बहार आए तो मेरा सलाम कह देना
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने

बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले


अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं

पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था
जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा


जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

ख़ार-ओ-ख़स तो उठें रास्ता तो चले
मैं अगर थक गया क़ाफ़िला तो चले



 
तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मिरी तरह तिरा दिल बे-क़रार है कि नहीं





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