Top 5 Amazing, 90s Comedy Shows 90 के दशक में ये कॉमेडी शोज थे बेहद पॉपुलर-आज भी नहीं है कोई टक्कर में - Hindi Shayarih सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Top 5 Amazing, 90s Comedy Shows 90 के दशक में ये कॉमेडी शोज थे बेहद पॉपुलर-आज भी नहीं है कोई टक्कर में - Hindi Shayarih

90 के दशक में ये कॉमेडी शोज थे बेहद पॉपुलर-आज भी नहीं है कोई टक्कर में
Top 5 Amazing, 90s Comedy Shows



कोरोना काल में दूरदर्शन के सुनहरे दिन लौट आए हैं। कई पुराने टीवी शोज का प्रसारण फिर से किया जा रहा है। टीवी पर आने वाले सभी धारावाहिकों में अगर सबसे ज्यादा मनोरंजन किसी में मिलता है तो कॉमेडी शो में। आइए आपको बताते हैं 90s के उन कॉमेडी शोज के बारे में जिनको याद लोगों को आज भी बहुत आनंद आता है। वहीं आज के कई बड़े कॉमेडी शोज भी इनका मुकाबला नहीं कर सकते हैं।

 
ऑफिस-ऑफिस
ऑफिस-ऑफिस

ऑफिस-ऑफिस
लगभग दो दशक पुराने टीवी शो 'ऑफिस ऑफिस' की एक बार फिर से टीवी पर वापसी हो चुकी है। यह शो अपने समय में भारत के दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार को व्यंग्यात्मकपूर्ण तरीके से परोसने के लिए बहुत लोकप्रिय हुआ था। इस शो का निर्देशन राजीव मेहरा ने किया है। दोबारा प्रसारित हो रहे इस शो को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। 

देख भाई देख
देख भाई देख
 



देख भाई देख
आइकॉनिक कॉमिक शो देख भाई देख में दीवान फैमिली की तीन पीढ़ियों के बीच खूबसूरत बॉन्डिंग दिखाई गई थी। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ा, रिश्तों में होने वाली तकरार और पारिवारिक दिक्कतों को यह शो बड़े चुटीले अंदाज़ में दिखाता था।

 
हम पांच
हम पांच


हम पांच
‘हम पांच’ फिर से टीवी पर आ रहा है। यही वो धारावाहिक है जिसके सहारे एकता ने भारत के घर- घर तक पहुंच बनाई। यहीं से शुरू हुआ उनकी कामयाबी का सिलसिला। यह सीरियल 1995 से 1999 तक टेलीकास्ट हुआ था। इसके पॉपुलर होने की वजह से इसका एक दूसरा सीजन भी बना।

 



फ्लॉप शो
यह एक बेहद पॉपुलर कॉमेडी सीरियल था। इसका निर्देशन पॉपुलर कॉमेडियन जसपाल भट्टी ने किया था। उन्होंने शो में अपनी पत्नी सविता भट्टी संग लीड रोल अदा किया था।

 
श्रीमान और श्रीमती
श्रीमान और श्रीमती




श्रीमान और श्रीमती
90 के दशक का एक कॉमेडी सीरियल था 'श्रीमान श्रीमती'। इन दिनों दूरदर्शन पर इस सीरियल का प्रसारण हो रहा है। पहली बार इसका प्रसारण साल 1994 में हुआ था। इस सीरियल का निर्देशन राजन वाघधर ने किया था। इस सीरियल में जतिन कनकिया, अजय नागरथ, रीमा लागू, राकेश बेदी और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे। 

 









इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे