ज़ी 5 वेब सीरीज़ लालबाजार की समीक्षा स्यंतन घोषाल कौशिक सेन हर्षिता भट्ट सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ज़ी 5 वेब सीरीज़ लालबाजार की समीक्षा स्यंतन घोषाल कौशिक सेन हर्षिता भट्ट

लालबाजार की पुलिस फोर्स ‘सिंघम’ तो नहीं पर ‘सिंघम’ से कम भी नहीं
Lalbazaar Review:




वेब सीरीज़ Review: लालबाजार
कलाकार: कौशिक सेन, ऋषिता भट्ट, सब्यसाची चक्रवर्ती, सुब्रत दत्ता, दिब्येंदु भट्टाचार्य और रंजिनी चकव्रर्ती आदि।
निर्देशक: सयांतन घोषाल
ओटीटी: Zee5
रेटिंग: ***


डिजिटल एंटरटेनमेंट में ये साल पुलिस और पब्लिक का साल है। पाताल लोक के हाथीराम के कारनामों को देखकर अगर आपको खूब आनंद आया है जो Zee5 की नई वेब सीरीज लाल बाजार आपके लिए इस कोरोना काल का नया तोहफा है। गारंटी खुद अजय देवगन की है। जैसा कि अजय देवगन ने सीरीज का पोस्टर रिलीज करते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने वाले लोगों ने जिस तरह इस संकट के समय में पूरे समाज की अनथक सेवा की है, वैसा ही भाव इस सीरीज में काम करने वाले पुलिस वालों का है।


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पहले के कलकत्ता और अब के कोलकाता में किसी से भी 18 लालबाजार स्ट्रीट चलने को कहेंगे तो वह फट से आपका चेहरा जरूर देखेगा। दरअसल ये पता है कोलकाता पुलिस के मुख्यालय का। लालबाजार सीरीज में पुलिस का पूरा लोक आपके सामने है। ये वेब सीरीज दरअसल तीन लोकों की कहानी है और इसकी कथा न तो पुराणों में लिखी है और न ही किसी पुलिस इंस्पेक्टर ने इसे व्हाट्सऐप पर पढ़ा है। यहां ये कहानी तिनका तिनका आगे बढ़ती है तो उसमें आपका हर पल, हर सांस इसके किरदारों के साथ लिपटता जाता है।



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लालबाजार कहानी है एसीपी क्राइम सुरंजन सेन की, जिसे उसका बॉस बहुत चाहता है। सुरंजन भी अपने मातहतों को सीने से लगाकर रखता है। पुलिस डिपार्टमेंट के अपने कुछ रंग हैं, तो कुछ बेरंगी भी इंसानी कमजोरी के रूप में यहां चली आती है। सुरंजन की बहुत करीबी मित्र माया घोषाल उसके साथ रातें गुजारती है और पुलिस के तमाम राज अपने चैनल की टीआरपी बढ़ाने में इस्तेमाल करती है। लालबाजार की दूसरी तरफ बसी दुनिया सिर्फ लाल नहीं है, वह रंगीन है।

 


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ठुमकों और ठेकों के ठिठुरते अरमानों पर मचलती इस दुनिया में सुरंजन की खासमखास फरजाना जो अपने पिता की मुखबिरी की विरासत को संभाले हुए है। और, इन दोनों दुनिया का संगम जिस दुनिया में आकर एक साथ होता है, उस लोक का राजा है गाज़ी। गाज़ी और सुरंजन की अदातव अब नई गुत्थी में उलझी है। कहानी में शेल्टर होम के बहाने होने वाले यौन शोषण की रियल स्टोरी है और है पैंटी मर्डर केस का एक ऐसा पेंच जो आपको फंसा कर रखता है।

 


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रंगन चक्रवर्ती के लिखे लाल बाजार को सजल आनंद ने हिंदी का नया कलेवर दिया है। ये कलेवर आपको कुछ कुछ सुरेंद्र मोहन पाठक और वेद प्रकाश शर्मा के जासूसी उपन्यासों के करीब ले जाता है। हिंदी पट्टी में दोनों लेखकों के उपन्यासों की जो लोकप्रियता रही है, लाल बाजार सीरीज उसी पसंद को वीडियो रूप में आगे बढ़ाती दिखती है। कौशिक सेन, सब्यसाची चक्रवर्ती, सुब्रत दत्ता, दिब्येंदु भट्टाचार्य के कंधे से कंधे मिलाती यहां दिखती हैं ऋषिता भट्ट और रंजिनी चकव्रर्ती।

 



कलाकारों के इन करतबों का कमाल किया इसके निर्देशक सयांतन घोषाल ने। देबज्योति का संगीत सीरीज के सस्पेंस और पेस दोनो को बनाए रखने में अच्छी मदद करता है। सीरीज के कुल 10 एपीसोड हैं और ये तो तय है कि इसे एक बार देखना शुरू करने के बाद बिना इसके आखिरी एपीसोड तक देखे इसे बीच में छोड़ने का आपका मन नहीं करेगा। सीरीज सिर्फ वयस्कों के लिए है तो स्मार्ट टीवी पर इसे देखते समय इसका ख्याल रखना जरूरी है। अमर उजाला के रिव्यू में लालबाजार वेब सीरीज को मिलते हैं तीन स्टार।

 

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