First Make In India Tws Bassbuds Plus Launched In India At Rs 999 सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

First Make In India Tws Bassbuds Plus Launched In India At Rs 999

 

Ptron ने लॉन्च किया पहला मेड इन इंडिया

Tws-bassbuds Plus

First Make In India Tws Bassbuds Plus Launched In India At Rs 999 Ptron ने लॉन्च किया पहला मेड इन इंडिया Tws-bassbuds Plus



ऑडियो एसेसरीज बाजार में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करने वाली घरेलू कंपनी पीट्रोन (pTron) ने अपना पहला मेड इन इंडिया ट्रू वायरलेस ईयरबड्स Bassbuds Plus लॉन्च कर दिया है। पीट्रोन के इस नए Bassbuds Plus की बिक्री अमेजन इंडिया से हो रही है। कंपनी ने अपने इस ईयरबड्स को लेकर शानदार ऑडियो क्वालिटी का दावा किया है। प्रत्येक ईयरबड्स का वजन महज 4 ग्राम है। 


शानदार ऑडियो के इस Bassbuds Plus में 8एमएम का कॉपर का ड्राइवर दिया गया है। इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी के लिए इसमें ब्लूटूथ 5.0 दिया गया है। चार्जिंग केस के साथ इसकी बैटरी को लेकर 12 घंटे के बैकअप का दावा किया गया है। कॉलिंग के लिए इस बड्स में इनबिल्ट माइक्रोफोन भी है। बैटरी लेवल के लिए चार्जिंग केस में एक स्मार्ट डिस्प्ले भी है।


Bassbuds Plus में गूगल असिस्टेंट और एपल सिरी का भी सपोर्ट है। कॉलिंग के लिए आप सिंगल बड्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वाटरप्रूफ और स्वेट प्रूफ के लिए इसे IPX4 की रेटिंग भी मिली है। इसकी कीमत महज 999 रुपये है।

 


बता दें कि कुछ दिन पहले ही कंपनी ने pTron Bassbuds Urban को भारतीय बाजार में उतारा है। पीट्रोन बासबड्स अरबन के प्रत्येक बड्स में 50mAh की बैटरी है, जबकि चार्जिंग केस में 400mAh की बैटरी दी गई है। इसमें स्मार्ट टच का भी सपोर्ट है जिसके जरिए फोन कॉल रिसीव किया जा सकता है। इसकी कीमत 1,299 रुपये है।

 

इसके अलावा म्यूजिक को भी कंट्रोल किया जा सकता है। म्यूजिक प्लेबैक के टाइम को लेकर पांच घंटे के बैकअप का दावा किया गया है। कनेक्टिविटी के लिए इसमे ब्लूटूथ 5.0 दिया गया है जिसकी रेंज 10 मीटर है। चार्जिंग के लिए आपको माइक्रो यूएसबी पोर्ट मिलेगा। इसमें 6एमएम का डायनेमिक ड्राइवर दिया गया है।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे