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Ramavtar Tyagi Best Hindi Lyrices Ek Bhi Aansu Na Kar Bekar

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क भी आँसू न कर बेकार
जाने कब समंदर माँगने आ जाए



पास प्यासे के कुँआ आता नहीं है
यह कहावत है अमरवाणी नहीं है
और जिसके पास देने को न कुछ भी
एक भी ऎसा यहाँ प्राणी नहीं है

aansu na kar bekar 


कर स्वयं हर गीत का श्रंगार
जाने देवता को कौन सा भा जाय
चोट खाकर टूटते हैं सिर्फ दर्पण
किन्तु आकृतियाँ कभी टूटी नहीं हैं
आदमी से रूठ जाता है सभी कुछ
पर समस्यायें कभी रूठी नहीं हैं

 

 

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हर छलकते अश्रु को कर प्यार
जाने आत्मा को कौन सा नहला जाय !
व्यर्थ है करना खुशामद रास्तों की
काम अपने पाँव ही आते सफ़र में
वह न ईश्वर के उठाए भी उठेगा
जो स्वयं गिर जाए अपनी ही नज़र में

 

ek bhi aansu na kar bekar

 

 

हर लहर का कर प्रणय स्वीकार
जाने कौन तट के पास पहुँच जाय
 

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