सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं मेथी के दाने, ऐसे करें सेवन

 

डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं मेथी के दाने, ऐसे करें सेवन
मेथी के दाने


डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं मेथी के दाने, ऐसे करें सेवनमेथी के सेवन से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।



मेथी हर सीजन में आसानी से मिल जाता है। इसका इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है। जबकि पत्तियों की साग बनाई जाती है। मेथी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं जो सेहत और सुंदरता दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही यह बालों के लिए भी लाभकारी होते हैं। इसके सेवन से कई तरह की बीमारियों में आराम मिलता है। खासकर मोटापे और डायबिटीज में यह किसी वरदान से कम नहीं है। मेथी से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है। डॉक्टर्स भी डायबिटीज के मरीजों को मेथी खाने की सलाह देते हैं। आधुनिक समय में डायबिटीज आम समस्या बन गई है। इसके कई कारण हैं। इनमें प्रमुख कारण खराब दिनचर्या, गलत खानपान और तनाव हैं। अगर आप भी डायबिटीज से पीड़ित हैं और अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो मेथी का सेवन जरूर करें। आइए जानते हैं-



मेथी के दाने में घुलनशील फाइबर पाया जाता है जो कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करते हैं। साथ ही दोनों डायबिटीज के शर्करा क्षमता में भी सुधार करने में सहायक होते हैं। इसमें एमिनो एसिड पाया जाता है जो रक्त में शर्करा को तोड़कर इंसुलिन उत्सर्जन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। कई शोध के परिणाम से पता चला है कि मेथी के सेवन से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।



कैसे करें सेवन


एक शोध के अनुसार, टाइप2 डायबिटीज के मरीजों को रोजाना 10 ग्राम मेथी के दाने का सेवन दही अथवा पानी में भिगोकर 8 हफ्तों तक करना चाहिए। इससे डायबिटीज में आराम मिलता है। जबकि डायबिटीज का खतरा भी कम जाता है। एक अन्य शोध से पता चलता है कि इसके सेवन से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इसके अतिरिक्त मेथी के सेवन से पेट संबंधी सभी विकारों से छुटकारा मिलता है।  



डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।






इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं.

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे