Kajol And Govinda Never Worked Together In A Film And This Is The Reason सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Kajol And Govinda Never Worked Together In A Film And This Is The Reason

 

Kajol And Govinda Never Worked Together In A Film And This Is The Reason
Govinda and Kajol



बॉलीवुड की चुलबुली एक्ट्रेस काजोल ने लंबे समय से दर्शकों का मनोरंजन किया है और फिल्मी दुनिया में वो अभी तक एक्टिव हैं। काजोल एक से बढ़कर एक रोल करती हैं और दर्शकों को उनकी एक्टिंग बहुत पसंद आती हैं। हाल ही में उनकी फिल्म 'त्रिभंगा' रिलीज हुई थी जिसमें उनके काम को काफी पसंद किया गया था। काजोल ने बॉलीवुड के लगभग सभी दिग्गज सितारों के साथ काम किया है, लेकिन उनकी जोड़ी कभी गोविंदा के साथ नहीं जमी। ऐसा क्यों हुआ इसे लेकर काजोल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया है।






गोविंदा 90 के दशक के सुपरस्टार हैं और आज भी उनकी फैन फॉलोइंग कम नहीं हुई है। गोविंदा ने उस दौर में सभी बड़ी हीरोइनों के साथ काम किया, लेकिन काजोल और गोविंदा कभी किसी फिल्म में साथ नजर नहीं आए। वहीं इस बारे में बात करते हुए काजोल ने कहा कि, 'हम लोगों ने 'जंगली' नाम की एक फिल्म शुरू की थी, जिसे डायरेक्टर राहुल रवैल बनाने वाले थे। इस फिल्म के लिए फोटोशूट भी किया गया था, लेकिन फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई।





काजोल ने आगे कहा कि, 'एक फोटोशूट के अलावा हमने फिल्म के लिए कोई शूटिंग नहीं की, लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि गोविंदा एक बेहतरीन एक्टर हैं। मैंने हमेशा कहा है कि लोगों को हंसाना बहुत मुश्किल है और गोविंदा वो काम बखूबी कर सकते हैं'। इसके बाद काजोल से पूछा गया कि क्या वो भविष्य में गोविंदा के साथ काम करेंगी? 





इस पर बात करते हुए काजोल ने कहा कि, 'फ्यूचर का तो पता नहीं लेकिन गोविंदा हैं कमाल के एक्टर। अगर कुछ अच्छा होता है तो हम जरूर साथ काम करेंगे'। गौरतलब है कि काजोल की जोड़ी उस समय में शाहरुख खान, सलमान और अजय के साथ खूब जमी थी। आज भी शाहरुख और काजोल जब पर्दे पर साथ आ जाते हैं तो फैंस उन पर खूब प्यार लुटाते हैं।




दूसरी तरफ गोविंदा की जोड़ी सबसे ज्यादा करिश्मा कपूर और रवीना टंडन के साथ जमी थी। इन दोनों एक्ट्रेसेज के साथ गोविंदा की फिल्में सुपरहिट रहीं। गोविंदा अब फिल्मों में कम ही नजर आते हैं वहीं काजोल अभी भी फिल्मों में एक्टिव हैं। उनकी फिल्म 'त्रिभंगा' और 'तान्हाजी' को काफी पसंद किया गया था।




इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे