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उस बज़्म में जो कुछ नज़र आया नज़र आया
अब कौन बताए कि हमें क्या नज़र आया
- हिज्र नाज़िम अली ख़ान


वही नज़र में है लेकिन नज़र नहीं आता
समझ रहा हूँ समझ में मगर नहीं आता
- कैफ़ी हैदराबादी

कहीं न उन की नज़र से नज़र किसी की लड़े
वो इस लिहाज़ से आँखें झुकाए बैठे हैं
- नूह नारवी


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वो नज़र आता है मुझ को मैं नज़र आता नहीं
ख़ूब करता हूँ अँधेरे में नज़ारे रात को
- इमाम बख़्श नासिख़

बे-तरह पड़ती है नज़र उन की
ख़ैर दिल की नज़र नहीं आती
- अनवर देहलवी


अच्छा तिरी नज़र में बहुत मुख़्तलिफ़ हूँ मैं
यानी तिरी नज़र में कोई दूसरा भी है
- हारिस बिलाल

नज़र चुरा के वो गुज़रा क़रीब से लेकिन
नज़र बचा के मुझे देखता भी जाता था
- मुशफ़िक़ ख़्वाजा

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हर चेहरे में आता है नज़र एक ही चेहरा
लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है
- मुनव्वर राना

जिस सम्त नज़र जाए मेला नज़र आता है
हर आदमी इस पर भी तन्हा नज़र आता है
- जमील मज़हरी


नज़र नज़र से मिलाना कोई मज़ाक़ नहीं
मिला के आँख चुराना कोई मज़ाक़ नहीं
- ज़िया फ़तेहाबादी




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