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नदी पहाड़ घने जंगलों में चर्चा था
वो बे-गुनाह शजर बे-लिबास कितना था
- आबिद ख़ुर्शीद 





पहाड़ सहरा नदी ने हमें तलाश किया
हमारे बा'द सभी ने हमें तलाश किया
- ज्योती आज़ाद खतरी




पहाड़ होने का सारा ग़ुरूर कांप उठा
बस इक ज़रा सी तजल्ली से तूर कांप उठा
- शाहिद जमाल 



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 ख़ुदा के ज़िक्र में मशग़ूल हैं जो मस्त पहाड़
समझ गए हैं यक़ीनन अदा-ए-वक़्त पहाड़
- फ़ैसल नदीम फ़ैसल 





दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
- निदा फ़ाज़ली








ये पेड़ ये पहाड़ ज़मीं की उमंग हैं
सारे नशेब जिन की उठानों पे दंग हैं
- आफ़ताब इक़बाल शमीम



पहाड़ जो खड़ा हुआ था ख़्वाब-सा ख़याल सा
बिखर गया है रास्ते में गर्द-ए-माह-ओ-साल सा
- करामत अली करामत 





देखो कब तक बाक़ी हैं
दरिया जंगल और पहाड़
- मुज़फ़्फ़र हनफ़ी




पहाड़ काटने वाले ज़मीं से हार गए
इसी ज़मीन में दरिया समाए हैं क्या क्या
- यगाना चंगेज़ी 





पहाड़ भाँप रहा था मिरे इरादे को
वो इस लिए भी कि तेशा मुझे उठाना था
- अख्तर शुमार

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