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अभी देर नहीं हुई है भाग 1-3 | Abhi Der Nhi Huye H | हिंदी शायरी एच

 अभी देर नहीं हुई है : भाग 1

जव्वाद शाह के 3 बच्चे थे. 2 बेटियां गेतीआरा और गुलआरा और बेटा फव्वाद शाह जिस ने इस साल ग्रेजुएशन किया था और कानून पढ़ने के लिए लंदन जा रहा था. 

अभी देर नहीं हुई है  भाग 3 | Abhi Der Nhi Huye H
Abhi Der Nhi Huye H



शकीला एस हुसैन


जव्वाद शाह के खानदान में किसी लड़की का निकाह बिरादरी से बाहर करने की सख्त मनाही थी. इस की कई वजहें थीं लेकिन मूल यह थी कि इसे वे अपनी शान के खिलाफ मानते थे. नयनतारा इसे अच्छे से भुगत चुकी थी. अब बारी गेतीआरा की थी. क्या नयनतारा की तरह ही गेतीआरा की इच्छाओं की बलि चढ़ा दी गई? जागीरदार जव्वाद शाह की हवेली में आज खूब चहलपहल थी. करीबी रिश्तेदर, दोस्त सभी जमा थे. उन का बेटा फव्वाद शाह पढ़ने के लिए इंग्लैंड जा रहा था. शानदार दावत रखी थी. जव्वाद शाह सिंध के पुश्तैनी रईस थे, कई एकड़ जमीनों के मालिक और समद शाह के इकलौते बेटे. उन की 2 बहनें थीं.


बड़ी बहन की शादी मामू के बेटे से कर दी गई थी और उसे उस का शरई हिस्सा दे दिया गया था. छोटी बहन नयनतारा उन्हीं के साथ रहती थी. बाकी की सारी जायदाद जव्वाद शाह के नाम थी. बड़ी बहन मामू के यहां इसलिए ब्याही गई थी कि जमीन खानदान में ही जाएगी. जागीरदार लोग जमीनजायदाद, खानदान से बाहर जाना कतई पसंद नहीं करते. इस के लिए खूनखराबा तक हो जाता है.


जव्वाद शाह के 3 बच्चे थे. 2 बेटियां गेतीआरा और गुलआरा और बेटा फव्वाद शाह जिस ने इस साल ग्रेजुएशन किया था और कानून पढ़ने के लिए लंदन जा रहा था. दोनों बड़ी बहनें कीमती कपड़े पहने बड़ी हसीन लग रही थीं.


घर में खूब रौनक लगी थी. मुंशी करीम अली ने सारा कामकाज संभाल रखा था. फंक्शन का इंतजाम उन के बेटे अजमत अली ने संभाल रखा था, जोकि एमबीबीएस कर के कसबे के अस्पताल में ही डाक्टर था. जव्वाद शाह के घर के बहुत से बाहरी काम उस के जिम्मे लगे हुए थे.


आज सवेरे से ही वह हवेली में था और बड़ी मीठीमीठी नजरों से गेतीआरा को देख रहा था. सामने हुस्न था, दिल में सच्ची मोहब्बत के जज्बात थे, जो आंखों से बयान हो रहे थे. गेतीआरा का चेहरा शर्म से गुलनार हुआ जा रहा था. परदा, अदब, रुतबा और अदब की दीवारें इतनी ऊंची थीं कि गेतीआरा की उसे निगाह उठा कर देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी. अजमत दूरदूर से ही हुस्न का नजारा कर रहा था.



छोटी बहन गुलआरा भाई के आसपास मंडरा रही थी. उस ने भाई के कान में कुछ कहा और फव्वाद उठ कर उस का हाथ थामे हवेली से जुड़े हुए हिस्से की तरफ चला गया. यह पोर्शन हवेली में ही था पर अलगथलग बना था. बड़ा सा बरामदा, शानदार ड्राइंगरूम उस के बाद नयनतारा का कमरा था. जोकि कीमती फर्नीचर से सजा हुआ था. बड़े से पलंग पर सफेद कपड़ों में नयनतारा बैठी हुई तस्बीह पढ़ रही थी.


‘फूफीबीबी सलाम’ कह कर दोनों भाईबहन फूफी के गले लग गए. नयनतारा ने बहुत प्यार से दोनों की पेशानी चूमी और उन से बातें करने लगी. पूरा कमरा सफेद चादरों और सफेद परदों से ढका हुआ था. माहौल में हलकी सी लोबान की खुशबू फैली हुई थी. कहीं से भी खुली हवा, खुला आसमान और चमकते सूरज का गुजर न था. ठंडा पुरसुकून कमरा.


नयनतारा सफेद कपड़े ही पहनती थी. पेशानी तक सिर ढका रहता था. हाथों में हीरों की चूडि़यां, कानों में हीरों के टौप्स, निगाहें नीचे ?ाकी हुईं, धीमी आवाज में बातें करती किसी संगमरमर के बुत की तरह मालूम होती थी. उस का सब मर्दों से परदा रहता था. कभीकभार भाई जव्वाद शाह इतिला कर के बहन से मिलने आते थे. भतीजा फव्वाद अकसर ही उस के पास आता रहता था. उस के अलावा किसी गैरमर्द की परछाईं पड़ना भी गुनाह था. एक उस की खास नौकरानी रशीदा थी. वही हवेली से उन का खाना वगैरह ले कर आती थी और उन की खिदमत करती थी.


नयनतारा जव्वाद शाह की छोटी बहन थी. जब वह जवान हुई तो उस की खूबसूरती के चर्चे दूरदूर तक फैल गए. गुलाबी रंग, बड़ीबड़ी शरबती आंखें, कमर तक लहराती काली जुल्फें. जो एक नजर डाले, देखता ही रह जाए. हुस्न के साथ दौलत, रुतबा, खानदान और इज्जत- किसी चीज की कमी न थी. एक से बढ़ कर एक रिश्ते आ रहे थे पर जव्वाद शाह के वालिद समद शाह ने हर रिश्ते को बेरुखी से इनकार कर दिया और अच्छी तरह से सब को सम?ा दिया.



‘‘हमारे खानदान में बिरादरी से बाहर लड़की देने का रिवाज नहीं है. हमारे सैयदों के खून में मिलावट आ जाएगी. हम अपने ही रिश्तेदारों में बेटी दे सकते हैं, बाहर नहीं देते. भाई या बहन या कजिन की आलौद को लड़की दे सकते हैं. हम खानदान के बाहर लड़की दे कर अपनी नस्ल खराब नहीं कर सकते.’’ बदनसीबी से उन के भाई या बहन के यहां नयनतारा के जोड़ का कोई लड़का न था.


जव्वाद शाह के दोस्त कर्नल हमीद के बेटे निसार लंदन से बैरिस्टर का कोर्स कर के वापस आए. जव्वाद शाह ने उन की शानदार दावत का इंतजाम किया. निसार ऊंचे पूरे खूबसूरत मर्द थे. इल्म व सम?ादारी की दौलत से मालामाल. दावत में उन की मुलाकात नयनतारा से हुई. दोनों में बातचीत भी हुई. बैरिस्टर निसार एक नजर में ही नयनतारा पर आशिक हो गए और एक फैसला कर लिया कि शादी करेंगे तो नयनआरा से ही करेंगे वरना सारी उम्र कुंआरे रहेंगे.






अभी देर नहीं हुई है : भाग 2

नयनतारा को भी बैरिस्टर निसार बहुत पसंद आए थे. पढ़ालिखा, चाहने वाला हमसफर हर किसी की ख्वाहिश हो सकती है.






दिल की मांगें भी अजीब ही होती हैं. अंदाज भी निराले हैं उस के. जो वह चाहता है उसे पाना जिंदगी का मकसद बन जाता है. उन्होंने अपनी मरजी कर्नल हमीद को बताई. कर्नल हमीद बेहद खुश हुए. वे भी खानदानी व अमीर लोग थे. कर्नल हमीद अपने बेटे का रिश्ता ले कर जव्वाद शाह के यहां गए और बहुत चाहत से उन की बहन नयनतारा का हाथ मांगा.


जव्वाद शाह ने उन की अच्छी खातिर की पर नयनतारा का रिश्ता देने से साफ इनकार कर दिया, कहा कि हमारे यहां खानदान से बाहर लड़की देने का रिवाज नहीं है. कर्नल साहब ने बड़ी मिन्नतें कीं पर जव्वाद शाह टस से मस न हुए. वे लोग मायूस और नाकाम लौट आए.


नयनतारा को भी बैरिस्टर निसार बहुत पसंद आए थे. पढ़ालिखा, चाहने वाला हमसफर हर किसी की ख्वाहिश हो सकती है. उस के दिल में भी मोहब्बत के जज्बात उभर आए. लगातार 3-4 महीने तक कर्नल हमीद चक्कर लगाते रहे. तरहतरह की दलीलें दीं पर जव्वाद शाह ने रस्मोरिवाज, रिवायतों की दुहाई दे कर अपने इनकार को नहीं बदला.


यह सब देखसुन कर नयनतारा ने अम्माजी से कहा, ‘अम्माजी, रिश्ता अच्छा है, निसार पढ़ालिखा व सुल?ा हुआ इंसान है, खानदान भी अच्छा है. फिर अब्बा और भाई इस रिश्ते का विरोध क्यों कर रहे हैं? आप उन्हें बता दीजिए कि यह रिश्ता मु?ो मंजूर है, इसलिए निसार का रिश्ता कुबूल कर लें.’


मासूम नयनतारा यह नहीं जानती कि इस रिवायत, खानदान और रुतबे के पीछे जायदाद का मसला था. समद शाह और जव्वाद शाह नहीं चाहते थे कि उन की जमीनजायदाद खानदान से बाहर जाए, क्योंकि इसलाम में बहन का शरई हक हिस्से के रूप में देना जरूरी है और शरई हक में अच्छीखासी जमीन नयनतारा को देनी पड़ती, जो खानदान से बाहर चली जाती और एक खयाल यह भी था कि सैयद खून में मिलावट आ जाएगी. इसलिए खानदान में शादी करने का रिवाज एक रिवायत बन गया जिसे इन जमीनजायदाद वालों ने बड़ी मजबूती से पकड़ लिया और इस के लिए अपने पीरों को खुश कर के एक गैरइंसानी तरीका ढूंढ़ निकाला.



इस तरीके के पीछे जागीरदारों की जमीन की हवस और खुदगर्जी शामिल थी. आखिर में हमीद साहब ने अपने एक मिनिस्टर दोस्त के जरिए जव्वाद शाह पर दबाव डलवाया. इस का भी कुछ असर न हुआ. इस बार बेइज्जत कर के इनकार कर दिया गया. अब की बार नयनतारा ने भी निसार के हक में आवाज उठाई तो जव्वाद शाह को लगा, खतरा सिर पर मंडरा रहा है. नयनतारा के दिल में भी मोहब्बत की आग भड़क उठी है. समद शाह और जव्वाद शाह गुस्से से भड़क उठे. लगा, कहीं नयनतारा बगावत न कर बैठे, उसे निसार का साथ हासिल है.


सब प्लानिंग में लग गए. उन के पीरसाहब भी आए. 4 दिनों बाद जव्वाद शाह ने खानदानभर में ऐलान कर दिया कि नयनतारा का रिश्ता तय हो गया. अगले जुम्मे को उस का निकाह है. सारे लोग ताज्जुब में पड़ गए कि इतनी जल्दी लड़का भी मिल गया और शादी भी तय कर दी.


सभी जानने की कोशिश में लगे थे कि आखिर कहां शादी हो रही थी. नयनतारा की शादी को सुन कर निसार के दिल पर खंजर चल गए. करीबी रिश्तेदारों को असलियत पता थी. जुम्मे की शाम को पूरा खानदान व मेहमान जमा हो गए. निसार भी दिल पर पत्थर रख कर शादी में पहुंचे. वहां बाकायदा नयनतारा का निकाह कुरान शरीफ से कर दिया गया. अब नयनतारा पाक बीबी थी, उस को हवेली के एक अलग पोर्शन में परदे में बिठा दिया गया. अब उस की शादी किसी और से नहीं हो सकती थी, कोई गैरमर्द उस से नहीं मिल सकता था.


वह अब ‘पाक बीबी’ बन कर जिंदगी गुजारेगी. दुनिया व दुनियादारी से उस का कोई ताल्लुक न होगा. जब उस की शादी कुरान शरीफ से की गई, वह सिर्फ  19 साल की थी. वह बहुत रोई थी, गिड़गिड़ाई थी कि उस की शादी कुरान शरीफ से न की जाए.



उस ने इनकार की धमकी भी दी पर बाप और भाई ने खुद को गोली मार कर मर जाने की धमकी दी. बेटी मांबाप की मोहब्बत के आगे मजबूर हो जाती है. लाख पढ़ीलिखी सही, पर बाप की इल्तजा और बेबसी ठुकरा न सकी और कुरान शरीफ से शादी करने पर राजी हो गई. इस तरह खानदान, इज्जत व रुतबे की दुहाई दे कर एक मासूम लड़की को तिलतिल मरने के लिए छोड़ दिया गया.


पीरसाहब ने भी उसे खुदा की राह में खुद को कुरबान करने की नसीहत दी? नयनतारा की शादी कुरान शरीफ से हो ही गई. आज इस बात को 10 साल गुजर चुके थे. वह 10 साल से तनहाई का अजाब काट रही है. सारे जवान जज्बात, रेशमी ख्वाब और पुरशबाब हुस्न पाक बीबी के नाम पर दफन कर दिए गए.


उस के पास कसबे की औरतें अपने दुखदर्द व मसले ले कर आती हैं. वह उन्हें सलाह देती है, बीवी होने के फर्ज सही तरीके से निबाहने की नसीहत देती है. वह, जिस की शादी मर्द से नहीं हुई, जिसे शादीशुदा जिंदगी का कोई तजरबा नहीं है, शादीशुदा महिलाओं को खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जीने का फलसफा सम?ाती है, यह कैसा मजाक है?


नयनतारा की कुरान से शादी के एक साल बाद ही समद शाह पर फालिज का असर हो गया. 3 साल बिस्तर पर टांगें रगड़ते रहे. नयनतारा का नाम सुनते ही रोने लगते. अब शायद अपने किए पर पछता रहे थे. पर अब तो जबान भी बंद हो चुकी थी. मरने से पहले बेटी से मिलने ले जाया गया, हाथ जोड़ कर बस, आंसू बहाते रहे और फिर खत्म हो गए, कुछ कह न सके.


गुलआरा और फव्वाद को फूफी से


बड़ी मोहब्बत थी. अकसर उन के पास आते और उन्हें देख कर बेचैन हो जाते. वे लोग भी सड़ीगली रिवायतों व दस्तूर के आगे मजबूर थे. फव्वाद शाह के लंदन जाने के बाद हवेली में सन्नाटा खिंच गया. गुलआरा मैट्रिक का एग्जाम दे रही थी और गेतीआरा प्राइवेट बीए कर रही थी. यह अच्छा था कि जव्वाद शाह ने लड़कियों को तालीम से नहीं रोका.



वक्त अपनी रफ्तार से गुजर रहा था कि जव्वाद शाह को सीवियर हार्टअटैक हुआ. मजबूरी में डा. अजमत का हवेली में रोज का आनाजाना हो गया और यह मजबूरी 2 तड़पते दिलों के लिए खुशगवार हवा का ?ांका साबित हुई. अजमत और गेतीआरा की रोज ही मुलाकात हो जाती, कभीकभी बात करने का मौका भी मिल जाता. जव्वाद शाह को कंपलीट आराम की सलाह दी गई थी.


मुंशी करीम अली ने जमीनजायदाद के साथसाथ घर के कामकाज भी संभाल लिए थे. इलाज व दवा लाने की पूरी जिम्मेदारी अजमत अली पर थी. मजबूरी का पौधा जितना तेजी से बढ़ रहा था, मुहब्बत के फूल उतने ही ?ाम कर निकल रहे थे.


जव्वाद शाह को मौत की आहट सुनाई दे रही थी. वे बड़ी बेचैनी से फव्वाद शाह का इंतजार कर रहे थे. उन्हें गेतीआरा की फिक्र सता रही थी. कुछकुछ अंदाज उन्हें भी हो रहा था कि अजमत का बारबार आना, पूरी तवज्जुह से उन का इलाज करना, हर खिदमत के लिए तैयार रहना कहीं कोई गुल न खिला दे. उन्हें बेटे के आने के बाद पहला काम गेतीआरा की शादी करना था. फव्वाद एक साल बाद कानून की डिग्री ले कर लौट आया. उन्होंने फौरन मुंशी करीम अली से जमीन के सारे काम ले कर बेटे को सौंप दिए कि बारबार मुंशीजी को हवेली में आना न पड़े.


फव्वाद नई नस्ल का पढ़ालिखा नौजवान था. उस ने सारे जायदाद के काम मुंशीजी को वापस सौंप दिए, जो सुधार उसे जरूरी लगे उस ने उसे करना शुरू कर दिया. जो गरीब किसानों की घर व जमीनें थोड़ीथोड़ी रकम के एवज में जव्वाद शाह के पास गिरवी रखी थीं, वह सारा कर्ज माफ कर के उस ने गरीबों की जमीनें उन्हें लौटा दीं. कसबे में अपनी जमीन पर एक अच्छे अस्पताल की बुनियाद रखी. लड़कियों का हाईस्कूल खोलने की मुहिम शुरू कर दी. लाखों रुपया जो तिजोरी में सड़गल रहा था उस का सदुपयोग शुरू कर दिया.



मुंशी करीम अली पूरी तरह फव्वाद के साथ थे. नई नस्ल के नौजवान अच्छे कामों में उस का पूरा सहयोग कर रहे थे. जव्वाद शाह काफी कमजोर हो गए थे. इस लायक नहीं थे कि जायदाद या हिसाबकिताब देखते. सारा कुछ फव्वाद शाह के हाथ में था. उस का इरादा कसबे में नई रोशनी लाने का था. पैसे, दिमाग व तकनीक की कमी न थी. नई पीढ़ी साथ थी ही.





अभी देर नहीं हुई है : भाग 3

नयनतारा की कुरान शरीफ से शादी का बैरिस्टर निसार को ऐसा सदमा लगा कि कसबा छोड़ कर शहर चले गए थे. उन्होंने भी शादी नहीं की थी.




अजमत अली के बहुत मिन्नत करने पर करीम अली ने गेतीआरा के लिए अजमत का रिश्ता देने की हिम्मत की. खानदान अच्छा था. अजमत का रिश्ता आना हवेली में एक कयामत बरपा कर गया. जव्वाद गुस्से से उबल पड़े, ‘‘ये दो टके के मुंशी की इतनी हिम्मत कि जागीरदार की बेटी के लिए रिश्ता भेजे. मैं उसे उस की औकात याद दिला दूंगा. उन्हें पता है हमारे यहां खानदान के बाहर शादी नहीं होती. हम ने उन्हें थोड़ी इज्जत क्या दी कि वह हमारी बराबरी करने लगा.’’


फव्वाद शाह ने सम?ाने की बहुत कोशिश की कि अब जमाना बदल रहा है, वक्त के साथ चलने में ही अक्लमंदी है. बहन ने भी सम?ाया पर किसी की बात सम?ा में न आई. एक हफ्ते के अंदर गेतीआरा की शादी का ऐलान कर दिया गया. चचेरे भाई नौशाद के 10-11 साल के लड़के से गेतीआरा का रिश्ता तय कर दिया गया. दूल्हा गेतीआरा से पूरा 12 साल छोटा था. 10-11 साल का दुबलापतला लड़का गेतीआरा का उस से जोड़ न था. अभी भी सब उसे चुन्नू कहते थे.


तालीम, उम्र, शकलसूरत, रुतबा सब में जमीनआसमान का फर्क था. पर जव्वाद शाह की आंखों पर खानदान की काली पट्टी बंधी हुई थी.


गेतीआरा रोईगिड़गिड़ाई, शादी से इनकार किया, लड़का पसंद करने के अपने शरई हक की दुहाई दी कि बिना उस की पसंद के शादी हो नहीं सकती, उस ने धमकी दी वह अपना हक इस्तेमाल कर के साफ इनकार कर देगी. भाई से मिन्नतें कीं कि वह अच्छे से जानता है वह किसे पसंद करती है. उस का अटल फैसला था, अगर उस की मरजी के खिलाफ किया तो वह शादी से साफ इनकार कर देगी. चाहे उस का नतीजा कुछ भी निकले. सारे घर में अजब सी टैंशन हो गई. अब नयनतारा भी भाई के खिलाफ खड़ी हो गई थी. पर जव्वाद शाह अपनी बात पर अड़े रहे.



शादी के दिन सारा खानदान जमा हो गया. अजमत अपने घर के लोगों के साथ आया. फव्वाद शाह अपनी कोशिशों में लगा था. वह बहन की जिंदगी हरगिज बरबाद नहीं करना चाहता था. यह अच्छा था कि युवा पीढ़ी उस के कहने में थी. उसे भी कोई उम्मीद नहीं नजर आ रही थी. गेतीआरा का रोरो कर बुरा हाल था. वह एक 11 साल के मुन्ने से शादी नहीं करना चाहती थी. वह साफ इनकार कर देगी.


जव्वाद शाह ने पिस्टल सिरहाने रख लिया था, किसी ने जरा भी उन की मरजी के खिलाफ किया तो वह खुद को गोली मार लेंगे. अजब मुशकिल में जान थी, सब से ज्यादा फव्वाद परेशान था. बाप की धमकी और मोहब्बत के आगे सब मजबूर थे. शादी का सारा इंतजाम फव्वाद शाह और करीम अली कर रहे थे. फव्वाद अपनी कोशिशों में लगा था. जव्वाद शाह उठबैठ नहीं पाते थे. बहुत कमजोर हो गए थे. उन्हें भी ला कर कोने में एक सोफे पर लिटा दिया गया था.


निकाह का वक्त आ गया. घर में खुशी के बजाय उदासी छाई थी. दोस्तों से घिरा दूल्हा सेहरे में हौल में आ गया. दूल्हे के आते ही काजी साहब ने निकाह की रस्म शुरू कर दी. सारे मेहमानों और रिश्तेदारों से हौल भरा हुआ था. काजी साहब ने मेहर तय करने के बाद गवाह और वकील को लड़की के पास पूछने भेजा. वकील ने गेतीआरा से पूछा, ‘‘गेतीआरा वल्द जव्वाद शाह, आप को अजमत अली वल्द करीम अली बएवज मेहर 5 लाख रुपया निकाह कुबूल है?’’ गेतीआरा ने मारे हैरानी व खुशी के घूंघट उठा कर भाई की तरफ देखा, भाई ने उस के सिर पर हाथ रख कर उसे तसल्ली दी. उस ने फौरन ही कहा, ‘‘कुबूल है.’’


उस की दस्तखत ली गई. फिर बाहर आ कर काजी साहब ने दूल्हे से पूछा, ‘‘अजमत अली वल्द करीम अली, आप को गेतीआरा वल्द जव्वाद शाह से बएवज मेहर 5 लाख रुपया निकाह कुबूल है?’’ फौरन ही आवाज आई ‘कुबूल है.’ उस वक्त मुबारक का शोर उठा. जव्वाद शाह ज्यादा तो नहीं सुन सके, अजमत अली को सुनाई पड़ गया. फौरन दहाड़े, ‘‘यह मैं क्या सुन रहा हूं,  निकाह किस से हो रहा है?’’



फौरन ही फव्वाद, चचा और दूसरे रिश्तेदारों ने उन्हें संभाल लिया. सब ने मिल कर दुनिया की ऊंचनीच सम?ाई, बताया, ‘अगर गेतीआरा इनकार कर देती, अपना शरई हक इस्तेमाल कर लेती तो कितनी बदनामी होती.’ जव्वाद शाह बीमारी, कमजोरी और बुढ़ापे से काफी ढल चुके थे, ‘‘बोले, तुम सब ने धोखा दिया.’’


फव्वाद ने उन के पांव पकड़ लिए. पैरों पर सिर रखते हुए फरियाद की,  ‘‘बाबा, यह धोखा नहीं है, यह वक्त की मांग है. इंसाफ का तकाजा है. आप खुद सोचिए, 20 साल की जवान लड़की 11 साल के लड़के के साथ कैसे खुश रह सकती थी. उस की जिंदगी बरबाद हो जाती. कभीकभी छोटों की जिंदगी की खातिर बड़ों की अवहेलना भी हो जाती है.’’


फव्वाद व नौशाद चचा ने जल्दी से खाना खुलवा दिया और गेतीआरा की रुखसती की तैयारी शुरू करवा दी. आज नयनतारा बहुत खुश थी. गेतीआरा को गले लगा कर खूब प्यार किया. यह नई नस्ल का उजाले की राह पर पहला कदम था. यह सारा फव्वाद का प्लान था, उस ने अपने साथ पहले चचा नौशाद को मिलाया. उन्हें सम?ाया 11 साल के लड़के की, जवान लड़की से शादी एक तमाशे के अलावा कुछ नहीं हो सकती है. अगर गेतीआरा बगावत पर उतर आए और अदालत के जरिए तलाक की मांग करे तो सोचिए आप की पोजिशन कितनी खराब होगी. लड़का किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेगा.


चचा की सम?ा में बात आ गई. खुद लड़के ने भी इनकार कर दिया. उस के बाद उस ने करीम अली को सम?ाया. वे बेचारे पहले बड़े घबराए. फव्वाद ने यकीन दिलाया, ‘‘दो मोहब्बत करने वालों को मिलाना बड़ा नेक काम है और आप पर कोई इलजाम नहीं आएगा. हिम्मत रखें.’’


फिर नई नस्ल साथ थी. अजमत का रिश्ता तो पहले भी गेतीआरा के लिए आ चुका था, सिर्फ दूल्हा बदलना था. अब अजमत अली ने दूल्हे की जगह ले ली. वह तो जीजान से तैयार था. गेतीआरा को पाने के लिए हर रिस्क उठा सकता था. इस तरह फव्वाद की कोशिश व हिम्मत से गेतीआरा की शादी अजमत अली से हो गई और गेती एक अजाबभरी जिंदगी से बच गई.



नयनतारा बेइंतहा खुश थी कि रिवायतों व रस्मों की ऊंची दीवारों में एक खिड़की तो खुली जिस से नए जमाने का उजाला अंदर आ पाएगा. गुलआरा भी बहुत मसरूर थी कि उस के लिए भी अब राहें खुल गईं.


गेती और अजमत बड़ी खुशगवार जिंदगी गुजार रहे थे. उन्हें हंसताबसता देख कर जव्वाद अली को अपनी गलती का एहसास होता, उन्हें अंदर ही पछतावा व घुटन होती. इसी शर्मिंदगी और पछतावे के एहसास के साथ खत्म हो गए. कुछ दिन हवेली गम में डूबी रही. अब सारे फैसले करने का अधिकार फव्वाद के पास था. उस ने कसबे की खुशहाली के लिए कई अच्छे काम किए. उस ने फैसला कर लिया था कि किसी पर जुल्म न होने देगा, बहनों का शरई हिस्सा उन्हें देगा.


नयनतारा की कुरान शरीफ से शादी का बैरिस्टर निसार को ऐसा सदमा लगा कि कसबा छोड़ कर शहर चले गए थे. उन्होंने भी शादी नहीं की थी. अब फव्वाद का एक ही मिशन था कि बैरिस्टर निसार को ला कर नयनतारा की शादी करवानी है. एक उजड़ी हुई जिंदगी को संवारना है, अभी बहुत देर

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मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे