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सौतन बनी सहेली Sautan Bani Saheli Kahani In Hindi | हिंदी शायरी एच

 सौतन बनी सहेली Sautan Bani Saheli Kahani In Hindi 

चंदा भी मनोज की बातों में आ गई और एक रात उन दोनों ने गांव से भाग जाने का फैसला किया. यह कौन सा शहर था, चंदा को नहीं मालूम था. 

सौतन बनी सहेली Sautan Bani Saheli Kahani In Hindi
सौतन बनी सहेली


 



लेखक-नीरज कुमार मिश्रा

‘‘चंदा, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं और अगर तुम ने मुझ से शादी नहीं की तो मैं जी नहीं सकूंगा,’’ मनोज ने चंदा से कहा. ‘‘पर, मेरे मांबाबूजी तो कभी इस शादी के लिए राजी नहीं होंगे, क्योंकि उन का कहना है कि तू नशा करता है और पूरे गांव में आवारागर्दी करता है,’’ चंदा बोली. ‘‘मैं नशा करता हूं तो तेरी याद में दुखी हो कर करता हूं. अगर आवारागर्दी करता हूं, तो तेरी याद में पागल बन कर… तू मुझे नहीं मिली तो मैं तो दुनिया ही छोड़ जाऊंगा,’’ मनोज ने आंखों में आंसू लाने का नाटक करते हुए कहा. कुछ इसी तरह की मीठीमीठी बातें कर के मनोज ने चंदा को अपनी बातों में फंसा लिया था और उसे इस बात का भरोसा दिलाया दिया कि दोनों भाग कर शादी कर लेंगे और जब मांबाबूजी का गुस्सा शांत हो जाएगा, तो वापस आ कर माफी मांग लेंगे.

चंदा भी मनोज की बातों में आ गई और एक रात उन दोनों ने गांव से भाग जाने का फैसला किया. यह कौन सा शहर था, चंदा को नहीं मालूम था. वह तो बस मनोज पर यकीन कर के ही उस के साथ चली आई थी. चंदा को ले कर मनोज एक बड़े से मकान में पहुंचा. उस कमरे में जरूरत की सारी चीजें पहले से ही मौजूद थीं. मनोज ने चंदा को बताया कि उन दोनों को आज ही मंदिर में शादी करनी होगी और इस के लिए उसे बाजार जा कर जरूरी सामान लाना होगा. मनोज के बाहर जाने के बाद चंदा वहीं पड़े एक बिस्तर पर लेट गई और उस की आंख लग गई. जब थोड़ी देर बाद चंदा की आंख खुली, तो कमरे में मनोज कहीं नहीं दिखाई दिया. कोने में एक आदमी बैठा हुआ था, जो उसे खा जाने वाली नजरों से घूर रहा था.

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एक अजनबी को इस तरह से घूरता हुआ देख कर चंदा घबरा उठी. ‘‘कौन हो तुम? मनोज कहां है?’’ कहते हुए चंदा हकला रही थी. ‘‘मेरा नाम राज है… उस ने कुछ बताया नहीं तुझे क्या?’’ चालबाजी से मुसकराते हुए राज ने पूछा. ‘‘मुझे मेरे पति के पास जाना है,’’ चंदा की घबराहट अब बढ़ने लगी थी. ‘‘अब उसे भूल जा… वह तो तुझे मेरे हाथों बेच गया है… और बदले में 2 लाख रुपए ले कर गया है,’’ राज ने कहा. राज की बातें सुन कर चंदा चीखने लगी, ‘‘मेरा मनोज कहां है… मुझे वहीं पहुंचा दो.’’ राज इलाके का एक रसूख वाला आदमी था. चंदा का चीखना और रोना सुन कर उस को गुस्सा आ रहा था.

वह उठा और चंदा को मारने की गरज से उस ने हाथ उठाया ही था कि तभी कमरे में एक बूढ़ी औरत आई, वे राज की मां थीं, ‘‘अरे राज, तू इसे छोड़ दे… मैं समझाती हूं इसे. ‘‘देख लड़की… अब मेरा बेटा राज ही तेरा पति है और जिसे तू अपना पति कह रही है न, वह आदमी ही तुझे यहां आ कर बेच गया है.’’ बूढ़ी की बात सुन कर चंदा को भरोसा नहीं हो रहा था. वह सहम रही थी. ‘‘अब डरने से काम नहीं चलेगा लड़की… जैसा मैं कहती हूं वैसा करती चल, रानी बन कर राज करेगी यहां पर.’’ थोड़ा रुक कर फिर उस बूढ़ी मां ने बोलना शुरू किया, ‘‘देख, सचाई यह है कि मेरी बहू बच्चा पैदा नहीं कर पा रही है. वह दुष्ट हमारे घर को जायदाद का वारिस नहीं दे पाई है… इसलिए हमें एक ऐसी लड़की की जरूरत थी, जो हमारे ठाकुर खानदान को वारिस दे सके… अब तू आसानी से मान गई तो ठीक… नहीं तो हम मजबूर हो जाएंगे… समझी… ‘‘इस इलाके में औरतों की तादाद मर्दों के मुकाबले वैसे भी बहुत कम है, इसलिए यहां तो केवल मेरा बेटा ही तेरे साथ संबंध बनाएगा और वे सारे सुख देगा, जो ये अपनी असली पत्नी को देता है. तू ने अगर भागने की कोशिश की, तो बाहर कितने लोग तेरा बलात्कार करेंगे… तू गिन भी नहीं पाएगी.’’ ‘‘नहीं, ऐसा नहीं हो सकता… तुम लोग झूठ बोल रहे हो. मुझे मनोज के पास जाना है,’’ चंदा चीख रही थी. ‘‘हां… हां… चली जाना अपने मनोज के पास. एक बात कान खोल कर सुन ले… हमें भी तुम्हारी जरूरत नहीं है… हमें एक लड़का दे दे और फिर चली जाना यहां से,

’’ राज गुस्से में बोल रहा था. उस की बातें सुन कर चंदा कमरे में इधरउधर भागने लगी. ‘‘यह ऐसे नहीं मानेगी राज… ऐसा कर इसे रस्सियों में बांध कर डाल दे… कुछ दिनों में ही इस का दिमाग सही हो जाएगा,’’ बूढ़ी ने कहा. राज ने एक रस्सी मंगवा कर चंदा को बिस्तर के पाए से बांध कर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और चंदा को 2 दिन का समय सोचविचार करने के लिए दिया. चंदा कमरे में बंधी हुई सिसकती रही, उसे क्या पता था कि किसी से प्यार करने की इतनी बड़ी सजा मिलेगी, आज उसे पछतावा हो रहा था. पूरे 24 घंटे हो चुके थे. चंदा ने कुछ भी नहीं खाया था. अचानक कमरे का दरवाजा खुला, चंदा किसी के आने की बात सोच कर अंदर तक दहल गई थी… उस ने अपनेआप को और भी समेट लिया था. ‘‘सुनो… कुछ खा लो… ऐसे कब तक पड़ी रहोगी,’’ यह एक औरत की आवाज थी.



 

आवाज सुन कर चंदा ने आंखें ऊपर की, तो देखा कि एक खूबसूरत औरत सिर पर पल्ला डाले, हाथों में खाने की थाली लिए उस के सामने खड़ी है. चंदा समझ गई कि ये राज की पत्नी है. ‘‘मेरा नाम मंजुला है और तुम्हें मुझ से डरने की जरूरत नहीं है. हालांकि मेरे आदमी को अपने बस में कर के तुम मेरी सौत बन सकती हो, लेकिन फिर भी मैं तुम्हें खाना खिलाने आई हूं.’’ राज की पत्नी ने चंदा के बंधनों को खोला और चंदा के हाथमुंह को साफ किया. ‘‘ये कुछ कपड़े लाई हूं… चाहो तो नहा कर इन्हें पहन सकती हो और फिर खाना खा लो.’’ ‘‘आप मुझे इतना बता दीजिए कि अगर मेरी जगह आप होतीं तो क्या आप खानापीना खा सकती थीं? अगर आप ने किसी से प्यार किया होता और वे आप को धोखा दे दे तो आप को कैसा लगता?’’ ‘‘देखो, मैं यहां बरसों से हूं और मैं यहीं कहूंगी कि जो तुम से कहा जा रहा है उसे मान लो, क्योंकि तुम्हारे रोने का कोई भी असर इन पर नहीं होने जा रहा है,’’ मंजुला ने चंदा को समझाते हुए कहा.

पर फिर भी चंदा को मंजुला की बातें समझ नहीं आ रही थीं. उसे तो लग रहा था कि एक बार अगर वह यहां से भागने में कामयाब हो गई, तो सीधा अपने गांव जा कर मांबाबूजी से माफी मांग लेगी. पर शायद यह सब इतना आसान नहीं होने वाला था, कुछ दिन बीतने के बाद राज की मां फिर से उस कमरे में आईं. उन के साथ में राज भी था. ‘‘सुन लड़की, जा कर नहाधो ले और साजसिंगार भी कर ले. वैसे तू सिंगार नहीं भी करेगी तो भी कोई असर नहीं पड़ने वाला है… और बेटे राज, तू आखिर किस दिन का इंतजार कर रहा है… अब समय आ गया है तुझे अपनी मर्दानगी साबित करनी होगी… दिखा दे दुनिया को, मेरा बेटा राज भी एक बेटा पैदा करने की ताकत रखता है.’’ राज को मानो इसी बात का इंतजार था. चंदा के लाख हाथपैर पटकने के बाद भी राज ने दरवाजा बंद किया और एकएक कर के चंदा के सारे कपड़े उतार फेंके और उस के अनछुए बदन को अपने बदन से रगड़ने लगा और उस का बलात्कार किया. 1-2 बार नहीं, बल्कि पूरे महीने तक, बिना नागा किए हुए राज चंदा के साथ बलात्कार करता रहा. चंदा रोती रही और बलात्कार का शिकार होती रही, पर उस का रोना सुनने वाला वहां कोई नहीं था.

एक दिन राज की मां चंदा के कमरे में आईं. उन के साथ एक डाक्टर भी थी. ‘‘इसे चैक कर के बताओ कि यह पेट से हुई भी है कि नहीं.’’ डाक्टर अपने काम में लग गई और चंदा के कुछ सैंपल ले कर उन की जांच की. कुछ देर बाद डाक्टर ने चंदा के पेट से होने की सूचना दी. राज को यह बात पता चली, तो वह खुशी से फूला न समाया. आज उसे अपनी मर्दानगी पर बड़ा घमंड हो रहा था और उस ने मान लिया था कि औरत बदलने से वह बेटे का बाप बन जाएगा. चंदा पेट से क्या हुई, उस के कमरे में सूखे मेवे, फल का अंबार लगा दिया गया. किसी चीज की कोई कमी नहीं रहने दी गई चंदा के आसपास. राज और उस की मां रोज आते और चंदा के पेट पर नजर डालते और इशारोंइशारों में ही खुश होते. एक दिन सुबह से ही चंदा की खूब आवभगत हो रही थी, क्योंकि राज उसे अपने साथ ले कर पास के अस्पताल में ले जा रहा था. राज वहां जा कर चंदा के पेट में पल रहे भ्रूण के लिंग की जांच कराता और अगर चंदा के पेट में लड़की पल रही होती तो उस का पेट गिरा देता. अपनी कार में चंदा को ले कर बहुत खुशी के साथ वह अस्पताल पहुंचा था, पर उस की खुशी तब काफूर हो गई जब उसे पता चला कि चंदा के पेट में लड़की पल रही है. ‘‘मेरे तो सारे पैसे बरबाद हो गए, मां, इस औरत के पेट में लड़की पल रही है… लगता है,

मेरी किस्मत में ही एक बेटे का सुख नहीं है,’’ रोने लगा था राज. ‘‘अरे, तू चिंता क्यों करता है… इस बार पेट में लड़की आ गई तो क्या… तू फिर से कोशिश कर, थोड़ा और बादाम खिला… और मुझे पोते का मुंह दिखवा दे… अभी भी रास्ता बंद नहीं हुआ है. इसे अस्पताल ले जा और बच्चा गिरवा दे.’’ राज की बीवी मंजुला ने मांबेटे में होने वाली बातें चुपके से सुन ली थीं. उस के कदम चंदा के कमरे की तरफ बढ़ चले. चंदा कमरे में अपने सिर को पैरों में डाल कर बैठी थी. उस की सूनी आंखों में जीवन खत्म होता हुआ सा दिख रहा था. मंजुला चंदा के करीब जा कर उसे पुचकारने लगी. ‘‘मुझे इस दर्द में देख कर तुम्हें तो बहुत ही अच्छा लग रहा होगा न, तुम तो ठहरी ठकुराइन, भला तुम मेरे दर्द को क्या समझोगी, आखिरकार तुम कैसी औरत हो?’’ चंदा का दुख अंदर से उमड़ पड़ा रहा था. ‘‘नहीं, मुझे तुम गलत मत समझो… जब भी मैं पेट से होती हूं, ये लोग मैडिकल जांच करा कर पेट में लड़का या लड़की होने का पता लगा लेते हैं. अगर लड़की होती है, तो मेरा बच्चा गिरवा देते हैं.

मेरी सास और मेरे पति ने मिल कर मेरा 2 बार बच्चा गिरवाया है. बेटा न पैदा कर पाने के लिए मुझ पर कितना जुल्म ढाया है, इन लोगों ने वह मैं जानती हूं… मैं तो खुद ही अभागी हूं,’’ मंजुला की आंखों में भी नमी थी. ‘‘तो फिर तुम ने आवाज क्यों नहीं उठाई… या फिर तुम ने भागने की कोशिश क्यों नहीं की?’’ चंदा ने पूछा. ‘‘यहां से तो भागना मुमकिन नहीं है, क्योंकि आसपास के इलाके में राज के आदमी फैले हुए हैं, जो उस के इशारे पर कुछ भी कर सकते हैं. ‘‘मैं ने आवाज उठाई, तो मुझ पर कई तरह के जुल्म किए गए… और जब ये लोग मुझे शहर के एक अस्पताल में मेरा पेट गिरवाने ले गए, तब मैं बहाने से वहां के टौयलेट में गई… और मैं भागने की जगह तलाशने लगी… वहां खिड़की में लगे शीशे को सावधानी से हटा कर बाहर का रास्ता मिल सकता था और मैं ने वही किया, पर जैसे ही मैं पास ही बने एक पुलिस चौकी में पहुंचने वाली थी कि मेरे पति राज ने मुझे पकड़ लिया और मारते हुए घर ले आए…

तब से ले कर आज तक मैं यहीं कैद हो कर रह गई हूं,’’ सिसकियों में टूट गई थी मंजुला. चंदा ने उसे पानी पीने को दिया. मंजुला कुछ देर चुप रहने के बाद बोली, ‘‘ये लोग तुम्हें भी अस्पताल ले जा कर तुम्हारा बच्चा गिरवाने की कोशिश करेंगे… मुमकिन है कि यह वही अस्पताल हो, जहां मुझे ले जाया गया था. तुम टौयलेट में जा कर खिड़की के शीशे देखना. अगर तुम्हें लगे कि इन्हें हटा कर भागने में मदद मिल सकती है, तो तुम वहां से भाग जाना… पर मेरी तरह टौयलेट जाने का बहाना मत बनाना नहीं, तो इन्हें शक हो सकता है. ‘‘बेहतर होगा कि तुम किसी और बहाने से ऐसी जगह पहुंचो, जहां से बाहर भाग सको. बस तुम्हारी रिहाई का यही रास्ता है,’’ मंजुला ने चंदा को बताया. मंजुला गलत नहीं थी.

कुछ देर बाद ही राज चंदा को ले कर अस्पताल जाने के लिए रवाना हो गया. अस्पताल में चंदा का बच्चा गिरवाया जाना था, पर चंदा सावधान थी. उस ने नर्स से उलटी आने की बात कही. नर्स ने उसे बाथरूम दिखा दिया. यह वही अस्पताल था, जहां मंजुला को पहले लाया गया था. अंदर जा कर चंदा ने देखा कि खिड़की के शीशे को हटा कर भागा जा सकता है, पर ऐसा करने में बेहद सावधानी की जरूरत थी. कांच के टूटने की आवाज सुन कर बाहर बैठे राज को किसी भी तरह का शक हो सकता था, पर अपने ऊपर तरहतरह के जुल्मों की शिकार चंदा कोई भी रिस्क उठाने को तैयार थी. उस ने शीशे हटा कर खिड़की में इतनी जगह बना ली थी, जिस में से वह बाहर निकल सकती थी. आखिरकार उस की कोशिश कामयाब हुई और खिड़की से बाहर आ कर उस को एक नई ताजगी का अहसास हुआ. बाहर निकल कर चंदा सीधे पुलिस चौकी पहुंची और राज और उस की मां के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस राज के घर पहुंची और राज और उस की मां को गिरफ्तार कर लिया. ‘‘पर इंस्पैक्टर साहेब.



.. इस बात का क्या सुबूत है कि मैं ने इस लड़की पर जुल्म किए हैं. इस के पेट में पल रहा मेरा बच्चा ही है,’’ राज तेज आवाज में बोल रहा था. ‘‘मैं देती हूं सुबूत आप को इंस्पैक्टर साहब,’’ मंजुला सामने से आती दिखाई दी. उसे इस रूप में इस तरह से बात करते हुए देख कर राज का मुंह खुला का खुला रह गया. ‘‘हां… मैं हूं गवाह… चंदा पर हुए हर जुल्म और सितम का… और न केवल चंदा पर, बल्कि मुझ पर भी इन लोगों ने एक लड़के की चाहत में अनगिनत जुल्म किए हैं… गिरफ्तार कर लीजिए इन को.’’ पुलिस ने राज और उस की मां को गुनाह साबित होने के बाद जेल भेज दिया. उस के बाद पुलिस ने मनोज की खोज शुरू की और जल्द ही पुलिस ने पाया कि मनोज लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसा कर भगा कर कहीं और ले जाता और बाद में उन्हें बेचने का काम बड़े पेशेवर ढंग से करता था. पुलिस ने मनोज को पकड़ कर जेल भेज दिया. प्यार में एक बार धोखा खाने के बाद चंदा ने फिर कभी किसी दूसरे मर्द पर भरोसा नहीं किया… हां… मंजुला ने उस की सौतन से उस की सहेली बन कर उस का यकीन जिंदगीभर के लिए हासिल कर लिया था.

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