Mirza Ghalib Sahab 10 Selected Shayari Collection हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त मिर्ज़ा ग़ालिब साहब के मशहूर 10 शेर - Hindishayarih सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Mirza Ghalib Sahab 10 Selected Shayari Collection हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त मिर्ज़ा ग़ालिब साहब के मशहूर 10 शेर - Hindishayarih

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Mirza Ghalib Sahab 10 Selected Shayari Collection हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त मिर्ज़ा ग़ालिब साहब के मशहूर 10 शेर
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है 




मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले




न सुनो गर बुरा कहे कोई
न कहो गर बुरा करे कोई 




रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो




कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नज़र नहीं आती




दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है 




मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त
मैं गया वक़्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ 




'ग़ालिब' बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे 





जी ढूँढ़ता है फिर वही फ़ुर्सत कि रात दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानाँ किए हुए





हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

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