शीन काफ़ निज़ाम: बेहतरीन चुनिंदा शेर Sheen Kaaf Nizam Selected Shayari Collection - HindiShayariH सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शीन काफ़ निज़ाम: बेहतरीन चुनिंदा शेर Sheen Kaaf Nizam Selected Shayari Collection - HindiShayariH


Sheen Kaaf Nizam · Beech ka badhta hua har fasla le jayega Shayari by Sheen Kaaf Nizam · Khamosh tum the aur mere hont bhi the band Couplet by Sheen Kaaf Nizam 
 
 
 


वही न मिलने का ग़म और वही गिला होगा
मैं जानता हूँ मुझे उस ने क्या लिखा होगा 
 



Vahi na milne ka gham aur vahi gila hoga 
Main janta hun mujhe us ne kya likha hoga
 
 


वही न मिलने का ग़म और वही गिला होगा
मैं जानता हूँ मुझे उस ने क्या लिखा होगा 
 
 
Vahi na milne ka gham aur vahi gila hoga 
Main janta hun mujhe us ne kya likha hoga 
 



कभी जंगल कभी सहरा कभी दरिया लिख्खा
अब कहाँ याद कि हम ने तुझे क्या क्या लिख्खा
 

Kabhi jungle kabhi sehra kabhi dariya likhkha 
Ab Kahan Yaad ki hum ne tujhe kya kya likhkha
 


लौटा ले अपनी बस्ती
मुझ को मेरा सहरा दे 
 
 
Lauta le apni basti 
Mujh ko mera sehra de 
 


इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र
मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया 

Es fikr hi mein apni to gujri tamam umr 
Main us ko tha pasand toh kyun chhod kar gaya
 
 


आइने में तो अक्स है लेकिन
मार डालेगा मुझ को डर मेरा 
 
Aaine mein to aks hai lekin 
Maar dalega mujh ko dar mera 
 



वो गुनगुनाते रास्ते ख़्वाबों के क्या हुए
वीराना क्यूँ हैं बस्तियाँ बाशिंदे क्या हुए 


Woh gungunate raste khwabon ke kya hue
 Veerana kyun hain bastiyan bashinde kya huye
 


रास्ता कोई कहीं मिलता नहीं
जिस्म में जन्मों से अपने क़ैद हूँ 
 

Rasta koi kahin milta nahi 
Jism mein janmon se apne kaid hoon 
 
 

कहाँ जाती हैं बारिश की दुआएँ
शजर पर एक भी पत्ता नहीं है 



 Kahan jaati hain barish ki duaen 
Shajar par ek bhi patta nahi hai 
 


बीच का बढ़ता हुआ हर फ़ासला ले जाएगा
एक तूफ़ाँ आएगा सब कुछ बहा ले जाएगा  

Beech ka badhta hua har fasla le jayega 
Ek tufaan aayega sab kuchh baha le jayega
 
 



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे