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Muztar Khairabadi Best Urdu शायरी Selected Collection Shayari - Muztar Khairabadi Shayari: मुज़्तर ख़ैराबादी के चुनिंदा शेर

 Muztar Khairabadi Shayari: मुज़्तर ख़ैराबादी के चुनिंदा शेर  मुज़्तर ख़ैराबादी के शेर, मुज़्तर ख़ैराबादी की ग़ज़ल, उर्दू शायरी







उन का इक पतला सा ख़ंजर उन का इक नाज़ुक सा हाथ


वो तो ये कहिए मिरी गर्दन ख़ुशी में कट गई 





मोहब्बत में किसी ने सर पटकने का सबब पूछा
तो कह दूँगा कि अपनी मुश्किलें आसान करता हूँ 




इलाज-ए-दर्द-ए-दिल तुम से मसीहा हो नहीं सकता
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता


वक़्त दो मुझ पर कठिन गुज़रे हैं सारी उम्र में
इक तिरे आने से पहले इक तिरे जाने के बाद 
न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
जो किसी के काम न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ 


इक हम हैं कि हम ने तुम्हें माशूक़ बनाया
इक तुम हो कि तुम ने हमें रक्खा न कहीं का 

वक़्त आराम का नहीं मिलता
काम भी काम का नहीं मिलता 





तुम अगर चाहो तो मिट्टी से अभी पैदा हों फूल
मैं अगर माँगूँ तो दरिया भी न दे पानी मुझे

ख़त फाड़ के फेंका है तो लिक्खा भी मिटा दो
काग़ज़ पे उतरता है बहुत ताव तुम्हारा 


वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा
रंग गहरे हैं हमारी शाम के

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