टीपू का टाइम पास हिंदी कहानी | Hindi Kahani | Tipoo Ka Time Pass, सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

टीपू का टाइम पास हिंदी कहानी | Hindi Kahani | Tipoo Ka Time Pass,


अगर आपको कहानी पढ़ना पसंद है तो यह टीपू का टाइम पास कहानी आपके लिए बहुत अच्छी होने वाली है
टीपू का टाइम पास
किस ने दी टीपू को ज्ञानवाणी जो बन गई उस का टाइम पास...
डा. पी के राय |

Hindi Kahani | Tipoo Ka Time Pass,
Hindi Kahani | Tipoo Ka Time Pass,



मैं एक कुत्ता-टीपू. सेन साहब जब 4 साल पहले मुझे लाए थे तो सब गोद में लिए घूमते रहते थे. मैं भी बच्चों के साथ खूब मजे करता था, उन के मुंह चाटा करता था. बच्चे अकसर अपने हिस्से की चौकलेट मुझे दे दिया करते थे. जिंदगी मजे में गुजर रही थी, पर जैसेजैसे मैं आकार में बढ़ता गया और मेरी खुराक बढ़ती गई, उसी हिसाब से सेन साहब के परिवार का मेरे प्रति प्रेम घटता गया.

आज हालत यह है कि मुझे सुबह से ही घर के बाहर बांध दिया जाता है. चेन भी इतनी छोटी रखी है कि ज्यादा घूम नहीं सकता और न तो आनेजाने वालों को भूंक कर डरा सकता हूं. अब तो पास से बकरी भी बड़ी शान से निकल जाती है, जैसे कि मैं एक खुद बकरी हूं. मैं शर्म से पानीपानी हो जाता हूं. घर के सब लोग एकएक कर के काम पर निकल जाते हैं, सिर्फ मैं गेट के पास बंधा रहता हूं और अंदर मिसेज सेन सदा की तरह घर के कामों में ही व्यस्त रहती हैं. मेरे पास सिर्फ पानी का एक बरतन रहता है, उस में से भी कभीकभी पानी गिर जाता है तो कोई दोबारा भरने भी नहीं आता. ऐसे में मेरे पास कोई चारा नहीं है कि आखिर मैं करूं क्या.

कुत्ता बंधा हुआ है, कुछ नहीं कर पाएगा

मैं दिनभर ऊंघऊंघ के थक जाता हूं. साथ में यदि घर में मेरी बिरादरी के कुछ और कुत्ते होते तो उन के साथ गुजारे गए अच्छे पलों को याद कर के टाइम पास कर लेता, पर मैं अकेला लाया गया था, इसलिए यादों का भी कोई सहारा नहीं है. इंसानों की तरह हम कुत्तों में भी सैक्स का अनुपात गड़बड़ हो रहा है. अब कुत्ते ज्यादा हो गए हैं और कोई भी घर में कुतिया नहीं पालना चाहता, इसलिए अगलबगल भी वही कुत्ते और वे भी बंधे हैं. कोई काम के नहीं हैं. भूंकने से भी कोई फायदा नहीं कि थोड़ा टाइम पास हो जाए क्योंकि सब को मालूम है, कुत्ता बंधा हुआ है, कुछ नहीं कर पाएगा, सिर्फ टाइम पास के लिए भूंक रहा है.


वह तो भला हो पड़ोसी के टौमी का, जो एक बार भूल से खुला रह गया और मेरे पास आ कर टाइम पास का एक मंत्र दे गया. बोला, ‘जब तक तुम बंधे हो, टाइम पास के लिए, उन लोगों की लिस्ट बनाया करो जिन्हें यदि तुम कभी खुले रह गए तो काटोगे. इस तरह तुम्हारा अच्छा टाइम पास हो जाएगा. कभी नए लोग जोड़ो और कभी पुराने लोगों को उन के अच्छे व्यवहार के कारण लिस्ट से हटा दो. बहुत मजा आएगा और टाइम भी अच्छा पास हो जाएगा.’



दूसरे दिन से ही जब मेरे साहब मुझे गेट में बांध कर गए तो मैं ने शुरू में तो ऊंघने का बहाना किया पर जैसे ही वे अंदर गए, मैं जिन्हें मुझे काटना है, उन की लिस्ट बनाने में लग गया. लिस्ट में सब से पहले मैं ने गुड्डू को शामिल किया जो लगभग 20 साल का होगा. कई साल स्कूल में फेल हुआ और बड़ी मुश्किल से कालेज पहुंचा. वह पाजी जब भी मेरे पास से निकलता था, अपने साथियों के साथ, तो उन से डींग मारता था कि मैं पैर से ऐसा कंकड़ उछालूंगा कि वह सीधे टीपू को लगे. अकसर वह लोगों से शर्त लगाता था और जीत भी जाता था. मैं उस के आने पर खड़ा हो कर भूंकता था तो उस का निशाना और सटीक हो जाता था.

अंत में मैं ने भैया लोगों के साथ टीवी में जो अंगरेजी की फिल्मों में देखा था, आजमाना शुरू कर दिया. उस में मैं ने देखा था, जैसे ही पिस्तौल की गोलियां चलती हैं, लोग जमीन पर लेट जाते हैं. मैं ने भी उस की निशानेबाजी के समय जमीन पर लेटना शुरू कर दिया. उस का निशाना इस वजह से कई बार चूक जाता था और उस का कंकड़ मुझे नहीं लगता था. वह शर्त में हारने से बहुत झल्ला जाता. अगले दिन बडे़ कंकड़ का उपयोग करता. कंकड़ों के लगने से मेरे शरीर में दर्द होता था, उस की उस को कोई परवा न थी. मुझे यदि मौका मिला और मैं बंधने से बच गया तो सब से पहले गुड्डू को ही काटूंगा और फुरसत से काटूंगा.


ये भी पढ़ें-हिंदी कहानी टिप्स

3 घर छोड़ कर, नायक साहब के घर में छोटेछोटे बच्चे रोज ही मेरे सामने से निकलते हैं. वे अकसर मुझे प्यार करते हैं और अपनी आधी खाई हुई चौकलेट भी मुझे दिया करते हैं. पर उन के साथ चलती हुई एक आया से मुझे सख्त नफरत है. काली सी, मोटी आया, जिस के हाथ में हमेशा एक संटी रहती है, मुझे टौफी खिलाने पर बच्चों को डांट लगाती है और चलतेचलते मुझे अपनी संटी से मार कर भी जाती है.

असल में बच्चों की चौकलेट पर उस की नजर होती थी जो वे मुझे दे दिया करते थे. मैं थोड़ा भूंकने के अलावा कुछ नहीं कर सकता. काली काया, मोटा शरीर, मैं सिर्फ मन ही मन उस को गाली देने के अलावा क्या कर सकता था पर टौमी की सलाह पर अब मैं ने उसे भी अपनी लिस्ट में शामिल कर लिया और यह भी निश्चय कर लिया कि जब भी मौका लगेगा, मैं उस के पिछले हिस्से में ही काटूंगा, जिस से वह जमीन पर बैठने के काबिल भी न रहे. फिलहाल तो मैं मजबूर हूं, सिर्फ लिस्ट बना सकता हूं पर यह आया मेरी लिस्ट में दूसरे नंबर पर है.




Hindi Storytipoo ka time pass
मेरी लिस्ट में अगला नाम दयाशंकर का है जो हमारे महल्ले का दूध वाला है. मैं ने उस को कई बार दूध में नल से पानी मिलाते देखा. मेरी मालकिन उस दूध में और पानी मिला कर मुझे देती है यानी कि मुझे डबल पानी वाला दूध मिलता है. दयाशंकर शान से मेरे सामने से अपनी मोटरसाइकिल से निकलता है, दोनों तरफ दूध की टंकियां लटकती रहती हैं. और खासकर जब वह लेट आता है, और मैं बाहर ही बंधा रहता हूं, तो जानबूझ कर मेरे पास से अपनी मोटरसाइकिल निकालता हुआ जाता है, उस की दूध की टंकी की चोट से जब मैं बचने की कोशिश करता हूं और खड़ा हो जाता हूं तो उसे बहुत मजा आता है. उस को भी मैं ने अपनी काटने वालों की लिस्ट में काफी आगे रखा है. एक तो इस के कारण मुझे पानी वाला दूध मिलता है और फिर इस का मेरे साथ बचकाना व्यवहार. पैर में ऐसा काटूंगा कि दूध बेचना भूल जाएगा.


मेरी लिस्ट में अगले हैं मास्टर साहब, जो सामने वाली दीदी को पढ़ाने आते हैं. हैं तो अधेड़ और दीदी लगभग 22 साल की, पर जब मैं उन लोगों को साथ में देखता हूं तो मुझे कुछ न कुछ गड़बड़ लगता है. विनोदजी अपनी लड़की को कालेज इसलिए नहीं भेजते थे क्योंकि उन के अनुसार, वहां का माहौल ठीक नहीं है. पर अब तो घर में ही माहौल बिगड़ रहा है. इस का उन को या उन की पत्नी को पता नहीं है. विनोदजी पूरे समय टीवी पर खबरें या हाईप्रोफाइल लोगों की किसी भी ताजे मुद्दे पर होती बहस का लुत्फ उठाते रहते हैं और उन की धर्मपत्नी अपने मायके वालों से और सखीसहेलियों से फोन या मोबाइल से बातें करती रहती हैं. दोनों को नहीं मालूम कि उन के घर में ही एक नया सीरियल चल रहा है. वैसे मैं उन को दीदी कह रहा हूं पर सच तो यह है कि वे मुझे भी अच्छी लगती हैं. और मैं मास्टर साहब को खलनायक समझता हूं, इसीलिए मैं ने मास्टर साहब को भी अपने काटने की लिस्ट में शामिल कर लिया है.

ये भी पढ़ें- हिंदी कहानी तांबे का सिक्का


Hindi Kahanitipoo ka time pass
और एक हैं मिसेज दीवान जो वाकई मेरी काटने की लिस्ट में दूरदूर तक नहीं हैं, लगभग 35 साल की, बैंक में नौकरी और अति सुंदर. रोज लगभग सुबह 10 बजे बैंक जाने के लिए घर से निकलती हैं. उन के पति भी उसी बैंक में काम करते हैं. पर

उन के साथ जाने में कतराते हैं, क्योंकि 2-3 बार लोगों ने फब्ती कस दी थी कि वाह री जोड़ी. कौए की चोंच में अनार की कली. उन से बहुत कम उम्र के लड़के भी अपना सब काम छोड़ कर तब तक देखते रहते हैं जब तक वे उन की आंखों से ओझल नहीं हो जाती हैं.

पूरे महल्ले की कालेज जाने वाली लड़कियां और कम उम्र की सारी महिलाएं मिसेज दीवान से बेहद जलती हैं, क्योंकि इस उम्र में भी उन्हें देखने वाले, घूरने वाले और आहें भरने वाले उन सब कम उम्र की लड़कियों से कहीं ज्यादा हैं. यदि टीवी चैनल वालों की भाषा में कहें तो मिसेज दीवान की टीआरपी उन सब के मुकाबले कहीं ज्यादा है. मेरे पास से जब भी वे निकलती हैं, मुझे प्यार से ‘हैलो टीपू’ कहती हैं जिस से मैं शरमा जाता हूं. बहुत देर तक उन के सैंट की खुशबू मेरी नाक में रहती है क्योंकि हम कुत्तों की सूंघने की शक्ति इंसानों से बहुत ज्यादा होती है.




Tipoo ka time pass
हां, एक और इत्तफाक है. मेरे मालिक रोज किसी न किसी बहाने ठीक 10 बजे गेट पर आ कर खड़े हो जाते हैं. मुझे प्यार करने का नाटक करते हैं. एक ऐक्स्ट्रा रोटी देने के और खिलाने के बहाने वहीं खड़े रहते हैं. जब तक मिसेज दीवान घर के सामने आ नहीं जातीं. और जैसे ही वे पास आती हैं, बड़े प्यार से मालिक उन से कहते हैं, ‘गुड मौर्निंग मिसेज दीवान, आप कैसी हैं? कभी हमारे घर चाय पर आइए.’ दिखाने की वे यह कोशिश करते हैं जैसे उन का गेट पर आना, और मुझे रोटी देना और मिसेज दीवान का सामने से निकलना एक इत्तफाक है पर मैं ने अक्ल लगाई तो नोट किया कि रविवार और बैंकों की छुट्टियों में उन का मेरे प्रति प्यार गायब हो जाता था. प्यार करना तो दूर, मेरे लिए ऐक्स्ट्रा रोटी देने भी नहीं आते थे.

मेरे अनुमान की सचाई तब और सामने आई जब एक बार मालिक के बड़े लड़के ने सुबह 10 बजे के करीब, उन के बाथरूम में उन से पहले घुस कर उसे ब्लौक कर दिया, उस समय उन का गुस्सा देखने लायक था. उन का बस चलता तो अपने लड़के को मारमार कर उस की चमड़ी ही उधेड़ देते. उस दिन मेरे मालिक ने अपने बड़े लड़के के कारण मिसेज दीवान को देखना मिस कर दिया था. मिसेज दीवान के लिए मेरे दिल में भी बहुत सौफ्टकौर्नर है. यदि कभी खुला रह गया तो मैं उन को काटूंगा तो बिलकुल भी नहीं, पर चाटूंगा जरूर. यह मेरी दिली तमन्ना है. लिस्ट तो बहुत बड़ी है पर समय कम है. आज टाइम पास के लिए इतना ही बहुत है. कल  कुछ  नए  नाम जोड़ूंगा. आज के सफल टाइम पास के लिए मैं टौमी को धन्यवाद देता हूं.

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक दिन अचानक हिंदी कहानी, Hindi Kahani Ek Din Achanak

एक दिन अचानक दीदी के पत्र ने सारे राज खोल दिए थे. अब समझ में आया क्यों दीदी ने लिखा था कि जिंदगी में कभी किसी को अपनी कठपुतली मत बनाना और न ही कभी खुद किसी की कठपुतली बनना. Hindi Kahani Ek Din Achanak लता दीदी की आत्महत्या की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. फिर मुझे एक दिन दीदी का वह पत्र मिला जिस ने सारे राज खोल दिए और मुझे परेशानी व असमंजस में डाल दिया कि क्या दीदी की आत्महत्या को मैं यों ही व्यर्थ जाने दूं? मैं बालकनी में पड़ी कुरसी पर चुपचाप बैठा था. जाने क्यों मन उदास था, जबकि लता दीदी को गुजरे अब 1 माह से अधिक हो गया है. दीदी की याद आती है तो जैसे यादों की बरात मन के लंबे रास्ते पर निकल पड़ती है. जिस दिन यह खबर मिली कि ‘लता ने आत्महत्या कर ली,’ सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि यह बात सच भी हो सकती है. क्योंकि दीदी कायर कदापि नहीं थीं. शादी के बाद, उन के पहले 3-4 साल अच्छे बीते. शरद जीजाजी और दीदी दोनों भोपाल में कार्यरत थे. जीजाजी बैंक में सहायक प्रबंधक हैं. दीदी शादी के पहले से ही सूचना एवं प्रसार कार्यालय में स्टैनोग्राफर थीं. लता

Hindi Family Story Big Brother Part 1 to 3

  Hindi kahani big brother बड़े भैया-भाग 1: स्मिता अपने भाई से कौन सी बात कहने से डर रही थी जब एक दिन अचानक स्मिता ससुराल को छोड़ कर बड़े भैया के घर आ गई, तब भैया की अनुभवी आंखें सबकुछ समझ गईं. अश्विनी कुमार भटनागर बड़े भैया ने घूर कर देखा तो स्मिता सिकुड़ गई. कितनी कठिनाई से इतने दिनों तक रटा हुआ संवाद बोल पाई थी. अब बोल कर भी लग रहा था कि कुछ नहीं बोली थी. बड़े भैया से आंख मिला कर कोई बोले, ऐसा साहस घर में किसी का न था. ‘‘क्या बोला तू ने? जरा फिर से कहना,’’ बड़े भैया ने गंभीरता से कहा. ‘‘कह तो दिया एक बार,’’ स्मिता का स्वर लड़खड़ा गया. ‘‘कोई बात नहीं,’’ बड़े भैया ने संतुलित स्वर में कहा, ‘‘एक बार फिर से कह. अकसर दूसरी बार कहने से अर्थ बदल जाता है.’’ स्मिता ने नीचे देखते हुए कहा, ‘‘मुझे अनिमेष से शादी करनी है.’’ ‘‘यह अनिमेष वही है न, जो कुछ दिनों पहले यहां आया था?’’ बड़े भैया ने पूछा. ‘‘जी.’’ ‘‘और वह बंगाली है?’’ बड़े भैया ने एकएक शब्द पर जोर देते हुए पूछा. ‘‘जी,’’ स्मिता ने धीमे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘और हम लोग, जिस में तू भी शामिल है, शुद्ध शाकाहारी हैं. वह बंगाली तो अवश्य ही

Maa Ki Shaadi मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था?

मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? मां की शादी- भाग 1: समीर अपनी बेटी को क्या बनाना चाहता था? समीर की मृत्यु के बाद मीरा के जीवन का एकमात्र मकसद था समीरा को सुखद भविष्य देना. लेकिन मीरा नहीं जानती थी कि समीरा भी अपनी मां की खुशियों को नए पंख देना चाहती थी. संध्या समीर और मैं ने, परिवारों के विरोध के बावजूद प्रेमविवाह किया था. एकदूसरे को पा कर हम बेहद खुश थे. समीर बैंक मैनेजर थे. बेहद हंसमुख एवं मिलनसार स्वभाव के थे. मेरे हर काम में दिलचस्पी तो लेते ही थे, हर संभव मदद भी करते थे, यहां तक कि मेरे कालेज संबंधी कामों में भी पूरी मदद करते थे. कई बार तो उन के उपयोगी टिप्स से मेरे लेक्चर में नई जान आ जाती थी. शादी के 4 वर्षों बाद मैं ने प्यारी सी बिटिया को जन्म दिया. उस के नामकरण के लिए मैं ने समीरा नाम सुझाया. समीर और मीरा की समीरा. समीर प्रफुल्लित होते हुए बोले, ‘‘यार, तुम ने तो बहुत बढि़या नामकरण कर दिया. जैसे यह हम दोनों का रूप है उसी तरह इस के नाम में हम दोनों का नाम भी समाहित है.’’ समीरा को प्यार से हम सोमू पुकारते, उस के जन्म के बाद मैं ने दोनों परिवारों मे