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Hausla Shayri Collection - Meri Barbadi Shayri सतर्क करते और हौसला देते शेर.

हिंदी शयरी सतर्क करते और हौसला देते शेर.

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हिंदी शयरी सतर्क करते और हौसला देते शेर.


 

मस्जिद हो मदरसा हो कि मज्लिस कि मय-कदा
महफ़ूज़ शर से कुछ है तो घर है चले-चलो
- वहीद अख़्तर




Hosla shayri in hindi
ज़िंदगी को हौसला देने के ख़ातिर
ख़्वाहिशों को रेज़ा रेज़ा चुन रहा हूँ
- महफूजुर्रहमान आदिल




ऐ अदम के मुसाफ़िरो हुश्यार
राह में ज़िंदगी खड़ी होगी
- साग़र सिद्दीक़ी




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इस लिए होशियार रहता हूँ
क्या ख़बर कब वो बे-ख़बर हो जाए
- अहमद महफ़ूज़



 
इस दर्जा होशियार तो पहले कभी न थे
अब क्यूँ क़दम क़दम पे सँभलने लगे हैं हम
- वाली आसी



Josh junoon shayari
सुना है शहर का नक़्शा बदल गया 'महफ़ूज़'
तो चल के हम भी ज़रा अपने घर को देखते हैं
-अहमद महफ़ूज़


उसी ने बख़्शा है मुझ को शुऊ'र जीने का
जो मुश्किलों की घड़ी बार बार आई है
- महफूजुर्रहमान आदिल



वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल



ज़रा महफ़ूज़ रस्तों से गुज़रना
तुम्हारी शहर में शोहरत बहुत है
- अंजुम बाराबंकवी





अपना घर फिर अपना घर है अपने घर की बात क्या
ग़ैर के गुलशन से सौ दर्जा भला अपना क़फ़स
- हीरा लाल फ़लक देहलवी

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