SPIDER - MAN No Way Home Review In Hindi By Jon Watts | मूवी रिव्यू: स्पाइडरमैन नो वे होम जॉन वाट्स Hindishayarih सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

SPIDER - MAN No Way Home Review In Hindi By Jon Watts | मूवी रिव्यू: स्पाइडरमैन नो वे होम जॉन वाट्स Hindishayarih


सिनेमा का नया उत्सव लेकर आया स्पाइडरमैन SPIDER - MAN No Way Home




मूवी रिव्यू: स्पाइडरमैन नो वे होम
मूवी रिव्यू: स्पाइडरमैन नो वे होम



SPIDER - MAN No Way Home




मूवी रिव्यू: स्पाइडरमैन नो वे होम
कलाकार : टॉम हॉलैंड , जेंडाया , बेनेडिक्ट कम्बरबैच , जैकब बटालोन ,
मारिसा टोमेई और विलियम डफो आदि ।
निर्देशक : जॉन वाट्स
रेटिंग : ★★★★







स्पाइडरमैन नो वे होम review in hindi
सिनेमा अब एक उत्सव है । इससे कम पर इसका जादू काम नहीं करेगा । शर्त यही है कि यह जादू ऐसा हो , जो तीन पीढ़ियों पर असर करे । दूरदर्शन पर स्पाइडरमैन देखने वाले दर्शकों ने अपने बच्चों को सिनेमाघरों में ले जाकर स्पाइडरमैन दिखाई । ये बच्चे अब घर के कमाऊ पूत हैं और अपने बच्चों को थ्रीडी वाला स्पाइडरमैन दिखाने ले जा रहे हैं ।






मार्केल की नई फिल्म ' स्पाइडरमैन : नो वे होम ' इन तीनों पीढ़ियों को एक साथ साधती है । फिल्म की कहानी वहीं से खुलनी शुरू हो जाती है जहां यह 3 साल पहले फिल्म स्पाइडर मैन फार फ्रॉम होम में आकर रुकी थी, यानी पीटर पार्कर की स्पाइडर मैन है, यह सबको पता है उसकी दुनिया अब पहले जैसी नहीं रही दोस्त नेड और एक एमजे उसके करीब तो है लेकिन पीटर को लगता है कि वह खुद से दूर हो गया है वहां एवेंजर डॉक्टर स्ट्रेंज से मिलता है और सब कुछ पहले जैसा कर देने की गुजारिश करता है । इच्छाएं इतिहास बदल देती हैं । मंत्रों की शक्तियां सिर्फ क्षैतिज दिशा में काम नहीं करतीं ।




Read Spider-Man: No Way Home






वे ब्रह्मांड में फैलती हैं और वे सब लौटना शुरू हो जाते हैं , जो यह जानते हैं कि पीटर पार्कर ही स्पाइडरमैन है । टॉम हॉलैंड से पहले परदे पर स्पाइडरमैन का चोला पहनने वाले टोबी मैग्वायर और एंड्रयू गारफील्ड के दौर की फिल्मों से ' स्पाइडरमैन : नो वे होम ' को जोड़ने में निर्देशक जॉन वाट्स पूरी तरह सफल रहे हैं । ' स्पाइडरमैन : नो वे होम ' यादों को कारोबार में बदलने का मार्केल का नया मंत्र है । इसमें फिल्म को सबसे ज्यादा मदद मिलती है स्पेशल इफेक्ट्स और संगीत से । मॉरो की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की जान है । उनका कैमरा इतनी सहजता से धरती , आकाश और पाताल में घूमता है कि दर्शक को कहानी से अपना संबंध बनाते देर नहीं लगती है । जैफ्री फोर्ड ने फिल्म का संपादन भी खासा चुस्त रखा है , लेकिन फिल्म की असल जान है माइकल जियाक्चिनो का संगीत । सिनेमाघरों में लाइव ऑर्केस्ट्रा जैसी अनुभूति देने वाला माइकल का संगीत फिल्म के भावों के आरोह - अवरोह में सटीक साझीदार बनकर सामने आता है । फिल्म तकनीकी रूप से तो बेहद शानदार है ही , इसमें टॉम हॉलैंड भी अपने कॅरिअर के उत्कर्ष पर नजर आते हैं ।















वह समय के साथ अपने भावों को बेहतर तरीके से प्रकट करने में मास्टर होते जा रहे हैं । एमजे के रोल में जेंडाया के साथ उनकी परदे पर जोड़ी सिनेमा के बीते दशक की बेहतरीन जोड़ियों में शुमार है । दोस्ती का नया दम यह फिल्म नेड के जरिए दिखाती है । प्रेम , त्याग , मित्रता , आकांक्षाएं , इच्छाएं- सब यहां उफान पर हैं , लेकिन इन सारे भावों को एक धागे में पिरोने वाली सबसे बड़ी बात है अपनी जिम्मेदारी को समझना । यही बात जब तार्किक तरीके से बड़े परदे पर दिखती है तो लोग वाह वाह कर उठते हैं । डेयरडेविल , वांडा जैसे किरदार यहां सोने पर सुहागा हैं ।

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