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Best Short Story आखिरी योजना

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इस धंधे में खतरे बहुत थे. पुलिस आए दिन किसी न किसी मामले को ले कर परेशान करती रहती थी. यह अलग बात थी कि सबूत न होने की वजह से वह बच जाता था.

अमजद रईस 


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कानून के रखवालों और जुर्म की दुनिया में लाल मोहम्मद को लालू के नाम से जाना जाता था. लालू एक फ्रौड, ब्लैकमेलर और लुटेरा था. वह पैसों के लिए हर तरह के गैरकानूनी काम करता था. लूटमार और धोखेबाजी उस के मुख्य काम थे. लेकिन वह किसी भी हालत में खूनखराबा नहीं करता था. वह एक सोचीसमझी योजन के तहत काम करता था, जिस से उसे किसी तरह का कोई खतरा नहीं उठाना पड़ता था.


यही वजह थी कि वह कभी पकड़ा नहीं गया था. वह कोई भी काम शम्सुद्दीन उर्फ शम्सू के साथ मिल कर करता था. जहां भी उसे खतरा महसूस होता था, वह शम्सू को आगे कर देता था. क्योंकि वह हर वक्त खतरा मोल लेने को तैयार रहता था. इसीलिए मिले माल में वह आधे से ज्यादा हिस्सा लेता था.


लालू योजना बनाने में होशियार था. वह शिकार को तलाश कर बढि़या योजना बनाता था. उस के बाद दोनों मिल कर उस योजना पर अमल करते थे.


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लालू का काम बढि़या चल रहा था. एक लूट में 2 दिन पहले ही उस के हाथ एक लाख 20 हजार रुपए लगे थे. लेकिन इस में उसे 40 हजार रुपए ही मिले थे. 80 हजार रुपए शम्सू ने ले लिए थे. इस की वजह यह थी कि लालू ने सिर्फ लूट की योजना बनाई थी बाकी का सारा काम शम्सू ने अकेले किया था. ज्यादातर कामों में लालू परदे के पीछे ही रहता था.


इस लूट के बाद लालू अपने कमरे में लेटा शम्सू के बारे में सोच रहा था. पिछले कई महीनों से वह काफी परेशान था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इस तरह वह कब तक शिकार खोज कर योजना बनाता रहेगा. सारी तैयारी वह करता है, जबकि हिस्सा ज्यादा शम्सू ले लेता है, ऐसा कर के कहीं वह गलती तो नहीं कर रहा?



इस लूट को ले कर वह काफी परेशान था. क्योंकि एक लाख 20 हजार में उसे सिर्फ 40 हजार रुपए ही मिले थे. शम्सू ने 80 हजार रुपए रख लिए थे. वह इस काम से ऊब गया था, लेकिन उस के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह ईमानदारी वाला कोई दूसरा काम कर लेता.


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इस धंधे में खतरे बहुत थे. पुलिस आए दिन किसी न किसी मामले को ले कर परेशान करती रहती थी. यह अलग बात थी कि सबूत न होने की वजह से वह बच जाता था. वह एक रेस्टोरेंट खोलना चाहता था. लेकिन उस के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपना रेस्टोरेंट खोल लेता. पर शम्सू के पास काफी पैसे थे. अगर उस के पैसे उसे मिल जाते तो वह आसानी से रेस्टोरेंट खोल सकता था.


लालू का सोचना था कि अगर वह एक बार हिम्मत कर ले तो जिंदगी की गाड़ी बड़े आाम से चलने लगेगी. इस के बाद उसे कोई खतरा भी नहीं उठाना पड़ेगा. लेकिन इस के लिए शम्सू को रास्ते से हटाना होगा, तभी उसे उस के पैसे मिल सकेंगे. आखिर उस ने शम्सू को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली. यह उस की आखिरी योजना थी, जिस में वह पहली और आखिरी बार हत्या करने जा रहा था.


अगले ही दिन लालू सुपर अपार्टमेंट जा पहुंचा, जहां मिस आलिया रहती थीं. लालू आलिया के यहां अकसर आता रहता था. कभीकभार शम्सू भी वहां पहुंच जाता था. लालू को देख कर आलिया ने दिलफरेबी अंदाज में उस का स्वागत किया. वह लालू और शम्सू के धंधे से पूरी तरह वाकिफ थी. वह लालू के लिए जाम और नमकीन ला कर उस के पास बैठ गई. फिर उस का हाथ पकड़ कर बोली, ‘‘इस बार तो बहुत दिनों बाद आए हो.’’



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‘‘बहुत दिनों बाद आया हूं, लेकिन खुश कर के जाऊंगा.’’ लालू ने मुसकराते हुए कहा.


‘‘अच्छा!’’ मिस आलिया की आंखें चमक उठीं.


‘‘अगर तुम्हें बिना कुछ किए 20 हजार रुपए मिल जाएं तो..?’’ लालू ने कहा.


आलिया ने होंठों पर जबान फेर कर कहा, ‘‘खयाल तो बहुत हसीन है, मगर इस की वजह…?’’


‘‘कोई खास नहीं?’’ लालू ने कहा, ‘‘मैं कल रात यहां आ रहा हूं. मैं चाहता हूं कि ऐसा जाहिर हो कि मैं यहां तुम्हारे साथ इसी कमरे में था. यही कोई रात 8 बजे से रात 2 बजे तक.’’


‘‘बहुत खूब.’’ आलिया ने अपनी भौंहें उचकाते हुए अर्थपूर्ण अंदाज में कहा, ‘‘इस के अलावा…’’


‘‘इस के अलावा दूसरा छोटा सा काम यह है कि…’’


लालू अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि आलिया ने कहा, ‘‘तुम रात 8 बजे से रात 2 बजे के बीच कहां और क्या करने जा रहे हो?’’


‘‘दूसरा काम यही हे कि तुम इस बारे में कोई सवाल नहीं करोगी. लेकिन तुम्हारे लिए कोई खतरा नहीं है. कई गवाह होंगे, जो यह साबित कर देंगे कि इस दौरान मैं ने तुम्हारे यहां तुम्हारे साथ समय बिताया है. लेकिन सब से बड़ी गवाह तुम होगी. संभव है, इस की नौबत ही न आए. ओके.’’


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‘‘बात तो ठीक लगती है,’’ मिस आलिया ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘लेकिन रुपए कब मिलेंगे?’’


‘‘10 हजार अभी और 10 हजार काम के बाद.’’ लालू ने कहा.


‘‘इतने से काम के लिए 20 हजार रुपए… कोई बड़ा हाथ मारने जा रहे हो क्या?’’


‘‘कोई सवाल नहीं, मैं पहले ही कह चुका हूं.’’


‘‘ठीक है, मैं तैयार हूं. निकालो 10 हजार रुपए.’’


‘‘तुम अपनी तरफ से भी 1-2 गवाह बना लो तो अच्छी बात है. जैसे तुम किसी बहाने से अपनी किसी सहेली के कान में यह बात डाल दो कि कल रात तुम ने मुझे कंपनी दी थी.’’



‘‘तुम यह तीसरा काम बता रहे हो.’’


‘‘हां, लेकिन इस तरह तुम खुद को अधिक सुरक्षित अनुभव करोगी. चलो, बोनस के रूप में 5 हजार अलग से.’’


अगली सुबह लालू ने जो कपडे़ पहने थे वे दूसरों से अलग नजर आ रहे थे. खाकी रंग की डर्बी कैप भी उस ने सिर पर रख ली थी. खुद को अलग दिखाना उस की योजना का एक हिस्सा था, जिस से देखने वालों को यह बात याद रहे.


घटनास्थल से काफी दूर दिखाई देना अपराधी के लिए लाभदायक साबित होता है. योजना बनाने वाला तो वह था ही, अपराध करने पहली बार जा रह था. अपनी योजना के तहत लालू गेलार्ड होटल पहुंचा. उस ने होटल गेलार्ड में एक कमरा बुक कराया और वहां दोपहर का खाना खा कर बाहर निकल गया.


शाम को 4 बजे वह वापस लौटा और लौबी से गुजरता हुआ औफिस डेस्क पर रूम क्लर्क के पास जा कर बोला, ‘‘हैदराबाद से एक फोन आने वाला है. इस फोन के अलावा जो भी फोन आए, कह देना कि मैं ने होटल छोड़ दिया है. लेकिन हैदराबाद से फोन आए तो उसे बताना कि मैं मिस आलिया के साथ उस के अपार्टमेंट में हूं.’’


उस ने बेतकल्लुफी से रूम क्लर्क को आंख मारी और सौ रुपए का एक नोट उस के आगे खिसकाते हुए बोला, ‘‘अच्छा होगा कि मेरी बात लिख लो, कहीं भूल न जाना.’’


‘‘भूलने का सवाल ही पैदा नहीं होता.’’ रूम क्लर्क ने अपनी बत्तीसी दिखाते हुए कहा.


घंटे भर बाद लालू फूलों की दुकान पर था. वहां से उस ने लाल गुलाबों का गुलदस्ता बनवाया.


‘‘एक सुंदर कार्ड फूलों के साथ लगा दीजिए और उस पर लिखिए-मिस आलिया की मोहब्बत के लिए. हस्ताक्षर की जगह मेरा नाम लाल मोहम्मद लिख दें.’’ लालू ने उस में अपना पूरा पता भी लिखवाया.


वहां से संतुष्ट हो कर लालू ने टैक्सी पकड़ी. टैक्सी ड्राइवर ने उस के विचित्र कपड़ों और कैप पर नजर डाली. उस के बाद फूलों की तरफ देखा. लालू रोमांटिक स्वर में बोला, ‘‘ये फूल मेरी प्रेमिका मिस आलिया के लिए हैं. तुम ने सुपर अपार्टमेंट की इमारत देखी है न?’’



‘‘जी सर.’’


‘‘बस, वहीं ले चलो. मेरी प्रेमिका वहीं रहती है.’’ लालू ने कहा.


टैक्सी ड्राइवर ने मुसकराते हुए टैक्सी आगे बढ़ा दी. टैक्सी सुपर अपार्टमेंट पहुंची तो किराए के अलावा लालू ने टैक्सी ड्राइवर को सौ रुपए टिप में भी दिए. ताकि वह उसे याद रखे. लालू के पैसे खर्च तो हो रहे थे, लेकिन सौदा बुरा नहीं था. रूम क्लर्क, फूल वाला और टैक्सी ड्राइवर… अब तक उस ने घटनास्थल से दूर अपनी उपस्थिति के 3 गवाह बना लिए थे.


थोड़ी देर बाद लालू मिस आलिया को महकते गुलाबों का गुलदस्ता पेश करते हुए बोला, ‘‘मेरी आलिया के लिए.’’


‘‘ओह लालू, यह मेरे लिए?’’ आलिया ने पूछा.


‘‘हां, इस में कोई शक.’’


‘‘ओह लालू, सो स्वीट यू.’’


इस के बाद खानेपीने का दौर चला. लालू ने अपनी ब्रांड के कई सिगरेट पिए और उन के टोटे इधरउधर डाल दिए. उस ने अपनी जेबी कंघी बाथरूम में छोड़ दी. कई जगहों पर लालू से स्वयं अपनी अंगुलियों के निशान छाप दिए. यह सब देख कर आलिया मुसकराते हुए बोली, ‘‘तुम पहले से ज्यादा होशियार हो गए हो.’’


‘‘वक्त आदमी को सब कुछ सिखा देता है.’’ लालू ने कहा, ‘‘और अब ध्यान से सुनो, तुम्हें सिर्फ यह अदाकारी करनी है कि तुम मेरे साथ हो. इस के अलावा किसी से कुछ नहीं कहना. नीचे गार्ड ने देख लिया है कि मैं तुम्हारे पास आया हूं. मैं ने उस से कुछ अर्थपूर्ण बातें भी की थीं. अब मैं खिड़की के रास्ते फायर एस्केप के द्वारा जा रहा हूं. मैं ने अपनी कार यहां से थोड़ी दूरी पर दोपहर में ही खड़ी कर दी थी. अब मैं रात 2 बजे इसी रास्ते से अंदर आऊंगा. खिड़की खुली रखना.’’


डेढ़ घंटे बाद लालू शम्सू के फ्लैट में बैठा था. उस ने वहां की किसी भी चीज को हाथ नहीं लगाया. उस ने खानेपीने से भी इनकार कर दिया था. इस से क्रौकरी पर उस की अंगुलियों के निशान पड़ सकते थे. शम्सू लालू को उस समय देख कर हैरान था. लेकिन जब लालू ने यह कहा कि वह अगले ‘एक्शन’ के लिए योजना बना कर आया है तो शम्सू सामान्य हो गया. उस ने कहा कि उस की हर योजना कारगर होती है तो लालू ने कहा, ‘‘हां, यह बात तो है. चलो, इसी बात पर मुझे 5 हजार रुपए दे दो. कल मैं बैंक से निकाल कर तुम्हें दे दूंगा.’’



‘‘ओके बौस.’’ शम्सू एक छोटी अलमारी की तरफ बढ़ा. लालू को पता था कि शम्सू अपने रुपए कहां रखता है. शम्सू ने अलमारी खोली. दाईं ओर कपड़ों के पीछे एक गुप्त लौकरनुमा खाना था. उस में ढेर सारे नोट रखे थे. शम्सू ने 5 हजार गिन कर अलग किए.


इधर लालू दबेपांव उठा. उस के हाथ में रिवौल्वर था. इस से पहले कि रुपए ले कर शम्सू पलटता, उस के सिर पर भयंकर विस्फोट हुआ. लालू ने फायर नहीं किया था, बल्कि रिवौल्वर का वजनी दस्ता उस के सिर पर जोरों से दे मारा था.


शम्सू की खोपड़ी चटक गई और खून का फव्वारा फूट पड़ा. लेकिन लालू ने खुद को खून के छींटों से बचाए रखा. शम्सू के जमीन पर गिरतेगिरते उस ने 5 वार उस के सिर पर कर दिए. शम्सू की बेनूर आंखें उस की मौत की घोषणा कर रही थीं. शीघ्र ही लालू रात के सन्नाटे में बाहर निकला. उस ने रिवौल्वर को थोड़ी दूर चल कर गंदे नाले में फेंक दिया.


इस के बाद फ्लैटों के पास बने स्विमिंग पूल के पानी से उस ने हाथमुंह तथा अपनी कमीज की आस्तीन धोई और आस्तीनें नीचे गिरा कर बटन लगा दिए. इस के बाद वह शम्सू के फ्लैट में दोबारा गया. उस ने अपने कपड़ों का बारीकी से निरीक्षण किया. फिर छोटी अलमारी का गुप्त लौकर खोल कर उस ने सारे रुपए निकाल लिए. रुपए निकालने और गुप्त लौकर को खोलने से पहले उस ने दस्ताने पहन लिए थे. रुपयों को जेबों में भरने के बाद वह वहां से चल पड़ा. रास्ते में उस ने दस्तानों में बडे़ पत्थर डाल कर उन्हें भी गंदे नाले में उछाल दिया.


लालू अपनी कार में बैठा अपने दिलोदिमाग को सामान्य कर रहा था. यह उस का पहला कत्ल था, इसलिए उस ने सभी पहलुओं पर गौर किया कि कहीं कोई गलती तो नहीं रह गई. रुपयों को उस ने एक सुनसान स्थान पर गड्ढा खोद कर गाड़ दिया था, जहां सरकारी पोल लगा था. मगर बल्ब नहीं जल रहा था.



2 बजे से पहले वह मिस आलिया के अपार्टमेंट से कुछ दूरी पर ही था कि पुलिस की गश्ती टीम उस की कार के पीछे लग गई. उसे लगा कि शायद कार को तेज रफ्तार से चलाने के कारण पुलिस वाले उस के पीछे लग गए हैं. लालू शांत भाव से कार को तेजी से चलाता रहा.


लेकिन पुलिस की गश्ती टीम ने अपने वैन लालू की कार से आगे निकाल कर रोक दी. लालू ने सोचा कि वह अच्छे शहरी की तरह चालान भर कर अपने रास्ते चला जाएगा. लेकिन यहां तो कुछ अलग ही बात थी.


‘‘चलिए जनाब, नीचे उतर कर हमारी वैन में बैठ जाइए. हम आप को बहुत देर से ढूंढ रहे थे.’’ एक पुलिस वाले ने कहा, ‘‘आप को दारोगाजी ने बुलाया है.’’


‘‘यह क्या बकवास है? ऐसा क्या कर दिया है मैं ने जो मुझे पुलिस स्टेशन पर बुलाया गया है.’’ लालू ने कहा.


थोड़ी देर बाद लालू थाने में दारोगा के सामने खड़ा था. उस ने पूछा, ‘‘मुझे यहां क्यों लाया गया है?’’


‘‘तुम रात 10 बजे के बाद कहां थे?’’ दारोगा ने घूरते हुए पूछा.


‘‘मैं अपनी प्रेमिका मिस आलिया से मिलने गया था. लेकिन बात क्या है?’’ लालू ने सब कुछ जानते हुए पूछा.


‘‘तुम ठीक कह रहे हो, लेकिन यह कत्ल का मामला है, जिस में तुम पूरी तरह फंस चुके हो.’’ दारोगा ने कहा.


‘‘कत्ल… किस का कत्ल? मैं ने तो किसी का कत्ल नहीं किया. तुम मुझ पर झूठा आरोप नहीं लगा सकते. अगर रात में किसी का कत्ल हुआ है तो तुम जानते हो कि मैं कहां था. मैं गवाह भी पेश कर सकता हूं.’’ लालू नाराज हो कर बोला.


‘‘गवाह मुझे सब मिल गए हैं, गवाहों की वजह से ही तो हमें कोई परेशानी नहीं हुई.’’ दारोगा ने कहा, ‘‘हम तुम्हें मिस आलिया के कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार कर रहे हैं. रात में आलिया का कत्ल कर के उस का अपार्टमेंट लूटा गया है.’’



यह सुन कर लालू के दिमाग में बम जैसा धमाका हुआ और उस की निगाहों के सामने अंधेरा फैल गया. 

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